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कहानी उत्तम त्याग धर्म की : सर्वोत्तम माना गया है दान


उत्तम त्याग धर्म का अर्थ है सर्वोत्तम त्याग का धर्म या श्रेष्ठ त्याग की सिद्धि। यह विचार भारतीय धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उत्तम त्याग का तात्पर्य है उन वस्तुओं, इच्छाओं या लाभों को छोड़ देना जो आत्मा की उच्चतम उन्नति के मार्ग में बाधक हो सकते हैं। आज पढ़िए उत्तम त्याग धर्म की कहानी…


बात सन् 1547 की है। मेवाड़ के चितौड़गढ़ में एक दानवीर भामाशाह का जन्म ओसवाल जैन परिवार में हुआ था। वे महाराणा प्रताप के सलाहकार थे। एक बार मुगल शासकों ने मेवाड़ राज्य पर आक्रमण कर दिया। दोनों सेनाओं के बीच भीषण युद्ध हुआ। मेवाड़पर मुगलों ने जीत हासिल कर ली। हार के बाद जब महाराणा प्रताप अपने परिवार के साथ जंगलों में भटक रहे थे, तब भामाशाह ने अपनी सारी जमा-पूंजी महाराणा प्रताप को समर्पित कर दी। महाराणा प्रताप के लिए उन्होंने अपनी निजी सम्पत्ति में इतना धन दान दिया था, जिससे 20 हजार सैनिकों का 14 वर्ष तक निर्वाह हो सकता था।

भामाशाह से प्राप्त सहयोग के कारण महाराणा प्रताप में नया उत्साह आया। उन्होंने दोबारा सैन्य शक्ति संगठित किया। नए जोश और उत्साह से मुगल शासकों को पराजित किया और फिर से मेवाड़ का राज्य प्राप्त किया। अतः आज इतने वर्ष बाद भी जो व्यक्ति अच्छी भावना से दान करता है, उसे भामाशाह कहा जाता है।

दान अवश्य करें हम सभी को अपने धर्म, देश और समाज के लोगों के लिए दान करना चाहिए। हमें हर दिन मंदिर की दानपेटी में दान करना चाहिए। अगर मंदिर नहीं जा सकते, तो घर पर मंदिर के लिए अलग गुल्लक बनाकर दान करना चाहिए। मुनि महाराज के लिए आहार, शास्त्र और औषधि दान करना चाहिए। दान को सर्वोत्तम माना गया है।

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Shreephal Jain News

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