पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर महाराज के प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां आ रहे हैं। पथरिया से पढ़िए, यह खबर…
पथरिया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने बताया कि पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर महाराज के प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां आ रहे हैं। मुनिश्री ने पथरिया में अपने प्रवचन में कहा कि हम सभी जीवन में सुख, शांति और संतोष की तलाश करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सच्ची खुशी कहाँ मिलती है? वह ना धन में है, ना पद में। सच्ची खुशी छुपी है दूसरों की मदद करने में। जब आप किसी भूखे को खाना देते हैं, किसी दुखी को सांत्वना देते हैं, या किसी ज़रूरतमंद का सहारा बनते हैं दृ उस वक्त जो सुकून मिलता है, वह शब्दों से परे है। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्र कहते हैं कि परोपकाराय सतां विभूतयः। अर्थात महान व्यक्ति वही होते हैं जो दूसरों की भलाई में अपने जीवन की सार्थकता देखते हैं। एक दिया जब जलता है, तो खुद भी रोशनी देता है और आसपास भी उजाला फैलाता है।
उसी तरह, जो व्यक्ति दूसरों की मदद करता है, वह न केवल किसी और की जिंदगी संवारता है, बल्कि अपने जीवन को भी सार्थक बनाता है। याद रखिए मदद करने के लिए अमीर होना जरूरी नहीं। एक मुस्कान, एक सांत्वना, एक छोटी-सी सहायता भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। तो आइए, आज हम सब यह संकल्प लें हर दिन कम से कम एक अच्छा कार्य करेंगे। जिससे किसी को राहत मिले, खुशी मिले, सहारा मिले। यही सेवा का भाव, यही करुणा हमें सच्चे अर्थों में इंसान बनाती है और हमारे जीवन को भर देती है अनमोल खुशियों से।













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