समाचार

त्याग और तपस्या का महापर्व है दीपावली : भीतर ज्ञान, भक्ति और ईश्वर के प्रति प्रेम की अखंड ज्योति जलाने का दिवस है दिवाली


आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के मुनि श्री गुरुदत्त सागर एवं मुनि श्री मेघ दत्त सागर ने रविवार को अजितनाथ जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीपावली जैन धर्म में त्याग और तपस्या का महापर्व है। महरौनी से पढ़िए, यह खबर…


महरौनी। आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के मुनि श्री गुरुदत्त सागर एवं मुनि श्री मेघ दत्त सागर ने रविवार को अजितनाथ जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दीपावली जैन धर्म में त्याग और तपस्या का महापर्व है। इसी दिन भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं, को निर्वाण की प्राप्ति हुई थी। साथ ही अमावस्या की सांझ के समय उनके प्रथम गणधर गौतम स्वामी को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसलिए यह पर्व आत्म ज्योति प्रज्ज्वलित करने का प्रतीक है। मुनि श्री ने बताया कि दीपावली के अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालु मंदिरों में भगवान महावीर की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, लाडू चढ़ाते हैं और सायंकाल घर-घर दीप प्रज्ज्वलित कर खुशी मनाते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में भी दीपावली का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त कर 14 वर्ष का वनवास पूर्ण करने के बाद अयोध्या लौटकर प्रजाजनों के साथ हर्षोल्लास से दीप जलाए थे।

इसके अतिरिक्त, इसी दिन राजा विक्रमादित्य का राजाभिषेक हुआ था, भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था और महाभारत काल में पांडवों ने 12 वर्ष के वनवास के बाद हस्तिनापुर लौटकर दीपोत्सव मनाया था। मुनि श्री ने कहा कि दीपावली केवल बाहरी दीपक जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि अपने भीतर ज्ञान, भक्ति और ईश्वर के प्रति प्रेम की अखंड ज्योति जलाने का दिवस है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहीं। जानकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर को अजितनाथ जैन मंदिर में चातुर्मास समापन एवं क्षमावाणी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page