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क्या इस्तीफे से निकल पाएगा समाधान : इस्तीफे से ज्यादा जरूरी है चुनाव प्रक्रिया का समाधान


दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद में चल रहा संग्राम चर्चा का विषय बनकर रह गया है। इस्तीफा देना चाहिए, ये बातें हो रही हैं लेकिन क्या इस संग्राम का हल इस्तीफा ही है और क्या इस्तीफे के बाद यह विवाद थम जाएगा ? अजमेर में दो गुटों को एक कर दिया गया। चार महीने बाद फिर संग्राम हुआ और इतना हुआ कि संत भवन पर दोनों गुटों ने अपना-अपना ताला लगा दिया। इंदौर संग्राम का हल इस्तीफा होने के बाद भी हो जाएगा, इस पर भी शंका बनी हुई है। पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज के दीपक जैन की विशेष अपील


इंदौर। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद में चल रहा संग्राम चर्चा का विषय बनकर रह गया है। इस्तीफा देना चाहिए, ये बातें हो रही हैं लेकिन क्या इस संग्राम का हल इस्तीफा ही है और क्या इस्तीफे के बाद यह विवाद थम जाएगा ? अजमेर में दो गुटों को एक कर दिया गया। चार महीने बाद फिर संग्राम हुआ और इतना हुआ कि संत भवन पर दोनों गुटों ने अपना-अपना ताला लगा दिया। इंदौर संग्राम का हल इस्तीफा होने के बाद भी हो जाएगा, इस पर भी शंका बनी हुई है। दोनों गुट के अध्यक्षों को इस्तीफे हो गए तो इसके बाद चुनाव प्रक्रिया कौन करवाएगा? इस्तीफे के बाद संसद के बने संविधान के अनुसार कौन सा गुट चुनाव करवाएगा? अगर दोनों गुट को छोड़ कर कोई अन्य चुनाव करवाता तो क्या वह संविधान के अनुसार होगा?  अगर संविधान के अनुसार नहीं हुआ तो फिर वही स्थिति बनेगी जो अभी है। इस्तीफे से पहले वोटर लिस्ट बने और चुनाव किस प्रक्रिया से हो, यह मंदिर का प्रतिनिधि करे। समाज का प्रत्येक व्यक्ति वोट डालकर चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा कैसे बने, जब तक स्पष्ट नहीं होगा सही मायने में संसद के संग्राम का कोई हल नहीं है। दोनों गुटों ने इस्तीफा दे दिया तो फिर तीसरा कौन व्यक्ति आ करके चुनाव को निष्पक्षता के साथ कर सकता है, ऐसा विश्वास समाज को कौन देगा? अगर पूरे घटनाक्रम को समझें तो संसद के इस संग्राम का हल इस्तीफा नहीं है, बल्कि समुचित चुनाव प्रक्रिया है और चुनाव प्रक्रिया पर समाज को, समाज के वरिष्ठ जनों को चिंतन करना चाहिए। इंदौर जैन समाज का प्रत्येक व्यक्ति सोचे कि जो समाचार व्हाट्सएप से आता है, वह कितना सच है और कितनी अफवाह? हमें सच को स्वीकार करना पड़ेगा कि किसी भी लड़ाई का अंत इस्तीफा नहीं है। ये परिस्थितियों क्यों बनीं, अगर इस पूरे घटनाक्रम को देखा जाए तो यह निकल कर आएगा कि जब तक चुनाव प्रक्रिया दुरुस्त नहीं हो जाती, तब तक स्थाई समाधान नहीं है। चुनाव प्रक्रिया कैसी होगी, इसका निष्कर्ष निकालने के लिए संतों के पास पहुंचकर अपनी बात रखें और संत समाज आशीर्वाद दे कि आप अपनी चुनाव प्रक्रिया सही करके समाज के धार्मिक और सामाजिक कार्यों और संस्कार-संस्कृति को बढ़ावा देने का काम करें। मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज, मुनि पूज्य सागर महाराज संसद के संग्राम को लेकर अपना मार्गदर्शन दे चुके हैं। अगर वास्तव में समाज बंधु संग्राम को विराम देना चाहते हैं तो निश्चित रूप से दोनों गुटों के लोगों को बैठ करके चुनाव प्रक्रिया को स्पष्ट कर लेना चाहिए क्योंकि अगर दोनों के इस्तीफा देने के बाद चुनाव प्रक्रिया कौन कराएगा, इस पर संशय बना रहा तो निश्चित रूप से यह समाज के लिए अधिक घातक सिद्ध हो सकता है और इससे उलझन और बढ़ सकती है। इसलिए पहले यह तय कर दिया जाए कि चुनाव प्रक्रिया कैसे होगी, कौन कराएगा और किस संविधान के अनुसार होगी। नहीं तो समाज की स्थिति और गंभीर होती जाएगी। चलिए यह भी मान लिया जाए कि इस्तीफे से समाधान निकल जाएगा तो फिर इस्तीफे के बाद चुनाव प्रक्रिया कैसे की जाएगी और कौन कराएगा, इसका स्पष्टीकरण भी होना अत्यंत आवश्यक है। यह भी संभव है कि अगर चुनाव की प्रक्रिया और चुनाव करने वाला व्यक्ति भी दोनों गुटों को या किसी एक गुट को मंजूर नहीं हुआ तो फिर क्या स्थिति होगी? इसलिए संसद की एक साधारण बैठक हो और उसे बैठक में यह निर्णय किया जाए कि इस्तीफे के बाद चुनाव प्रक्रिया और चुनाव करने वाला व्यक्ति कौन होगा, तो निश्चित रूप से संभव है कि एक ऐसा समाधान सामने आ जाए जो आने वाले समय में भी ऐसे गहन विवाद से बचा सकता है। याद रखें, सभी लोग स्थिति के पीछे पड़े हुए हैं पर वास्तव में यह ठीक नहीं है ।स्थिति के पहले चुनाव प्रक्रिया पर भी चर्चा होनी चाहिए, जैसे मकान बनाने के पहले हम मकान का नक्शा तैयार कर लेते हैं, उसी प्रकार अगल चुनाव का कैसे होगा, इसकी प्रक्रिया भी हमें अभी से तैयार कर लेनी होगी।

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