आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जी का 57वां दीक्षा दिवस पंचबाल्यती मंदिर, विजयनगर में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि प्रातः मुनि श्री विनम्र सागर महाराज ससंघ देवास नाका से विहार करके पंच बाल्यती मंदिर में पधारे। पढ़िए यह रिपोर्ट…
इंदौर। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जी का 57वां दीक्षा दिवस पंचबाल्यती मंदिर, विजयनगर में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि प्रातः मुनि श्री विनम्र सागर महाराज ससंघ देवास नाका से विहार करके पंच बाल्यती मंदिर में पधारे। मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज की दीक्षा 56 वर्ष पूर्व हुई थी। यदि हम उनको समझाना चाहते हैं तो उनके द्वारा लिखी हुई पुस्तकों को पढ़ना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि आपके द्वारा दिए हुए दान से बहुत कुछ मिल जाता है। मुनि श्री ने कहा कि आचार्य श्री जी कहते थे कि मैं तो निमित्त मात्र हूं, स्वयं को कर्ता और उपभोक्ता मत मानना। जीवन में दया – करुणा आदमी का वक्त बदल देती है। भगवान को भगवान के रूप में देखना सरल है, लेकिन गुरु को भगवान के रूप में देखना बहुत कठिन है। थोड़े से ज्ञान से आदमी अपने आप को बहुत ज्ञानी समझने लगता है। गुरुदेव ने इस संसार में जिनकी चिंता कोई नहीं करता उनकी चिंता भी एक कमरे में बैठकर की। उन्होंने जेल में जाकर भी कैदियों को प्रवचन दिए और कई कैदियों को हथ करघा प्रकल्प से जोड़कर उनके जीवन को सुधार दिया।
कई कैदियों ने जीवन भर के लिए अपने दुर्व्यसनों को छोड़ने का संकल्प भी उनसे लिया। मुनि श्री ने कहा कि आज आचार्य श्री शरीर से हमारे बीच रहें ना रहें, वह कल भी हमारे भगवान थे और आज भी हमारे भगवान हैं। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि वह आप सभी का वक्त बदले। मुनि श्री के साथ मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी, मुनि श्री निसर्ग के सागर जी एवं क्षुल्लक श्री हीरक सागर जी महाराज भी मंच पर विराजमान थे।
इस अवसर पर ब्रह्मचारी सुरेश भैया, जिनेश भैया , अभय भैया के साथ ही चातुर्मास समिति के अध्यक्ष मनोज बाकलीवाल, संयोजक मनीष नायक,सतीश जैन, संजय अहिंसा , सतीश डबडेरा, सचिन जैन, मुकेश बाकलीवाल, वीरेंद्र जैन, अमित जैन आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।













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