आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपनी साधना में एक कदम और बढ़ाते हुए सोनागिरी सिद्धक्षेत्र पर एक नियम लिया है कि अब वह आहार उन्हीं से लेंगे जो श्रावक की 11 प्रतिमा में से पहली दर्शन प्रतिमा का पालन करेंगे। उन्हें बाजार के खाद्य पदार्थ का त्याग करना होगा। जिन जैन घरों में इतर जाति की लड़की बहू बनकर आई है। उनसे वे आहार नहीं लेंगे। पढ़िए इंदौर की यह पूरी खबर…
इंदौर। आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज आचार्य पुष्पदंत सागरजी महाराज के शिष्य है। आचार्यश्री महाराज ने अपनी साधना में एक कदम और बढ़ाते हुए सोनागिरी सिद्धक्षेत्र पर नियम लिया है कि अब वह आहार उन्हीं से लेंगे जो श्रावक की 11 प्रतिमा में से पहली दर्शन प्रतिमा का पालन करेंगे। उसके अंतर्गत उन्हें बाजार के खाद्य पदार्थ का त्याग करना होगा।
नियमों का पालन करें
पहली दर्शन प्रतिमा के पालनार्थ अब घर में मर्यादि भोजन प्रारंभ करना होगा। इसके अलावा उन्हें पानी छान कर पीना होगा। याद रहें कि देव दर्शन के बिना भोजन नहीं करना होगा।
अजैन लड़की बहू से आहार वर्जित
जिन जैन घरों में अजैन लड़की बहू बनकर आई है। उनसे वे आहार नहीं लेंगे और जो बिना शादी-शुदा लड़के-लड़कियां है उन्हें एक महीने का रात्रि भोजन, आलू, प्याज आदि का त्याग करना होगा और रात्रि 7 से 9 के बीच में वे पानी और दूध ले सकते है। बाकी का त्याग जो करेंगे वे उन्हीं से आहार लेंगे।













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