दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में चल रही प्रवचनमालाओं में आज उन्होंने जीवन की गूढ़ सच्चाइयों पर प्रकाश डाला। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य रोटी के पीछे नहीं, बल्कि सत्य और त्याग के मार्ग पर चले तो संसार स्वयं उसके चरणों में आ जाता है। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…
दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जिस दिशा में सोचता है, उसी दिशा में जीवन चलता है। “यदि तुम भीड़ के पीछे चलते हो तो गुलामी का प्रतीक है, पर यदि भीड़ तुम्हारे पीछे चले, तो वही बादशाहत है।” उन्होंने कहा कि संसार को जो त्याग देता है, संसार उसी के पीछे चलता है।
पुण्य का त्याग ही सच्ची साधना
मुनि श्री ने कहा कि महावीर ने केवल पाप नहीं, बल्कि पुण्य से प्राप्त सुखों के त्याग की शिक्षा दी। भोग-विलास की वस्तुएँ भी अंततः दुःख देती हैं, अतः उनका त्याग ही मुक्ति का सच्चा मार्ग है।
गगन विहारी भगवान की प्रतिमा का निर्माण
तीर्थ क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि गगन विहारी भगवान की विशाल पाषाण प्रतिमा पंचमुखी जिनालय और सिंहद्वार के साथ निर्मित की जा रही है। इस दिव्य रचना में 225 कमलों की आकृतियाँ इंद्रों द्वारा सृजित होंगी। शिलान्यास 16 नवम्बर को प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के निर्देशन में सम्पन्न होगा।
108 इंद्रों द्वारा अभिषेक और शांति धारा
वाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया ने कहा कि निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में 108 इंद्रों द्वारा पूजित शांति धारा का आयोजन हो रहा है, जो चक्रवर्ती भगवान को समर्पित विधि के समान है।
“तुम भोजन के लिए हो या भोजन तुम्हारे लिए”
मुनि श्री ने गूढ़ प्रश्न पूछते हुए कहा कि विचार करो — धन तुम्हारे लिए है या तुम धन के लिए; भोजन तुम्हारे लिए है या तुम भोजन के लिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भोजन का दास बन जाता है, वह आत्मज्ञान से दूर हो जाता है, जबकि साधक भोजन का स्वामी होता है। इस अवसर पर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन (टींगू मिल), महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री राजेन्द्र हलवाई, प्रदीप जैन रानी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य आत्मजागरण और जगत कल्याण की भावना को प्रबल करना रहा।













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