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धर्म जागृति संस्थान महिला शाखा ने गौशाला में की सेवा: विकलांग गौवंश को गुड़-केले खिलाए


अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान, शाखा अंबाह की महिला इकाई की सदस्यों ने बुधवार को परेड चौराहा स्थित विकलांग गौशाला में पहुंचकर गौसेवा का पुण्य कार्य किया। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर…


अंबाह। अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान, शाखा अंबाह की महिला इकाई की सदस्यों ने बुधवार को परेड चौराहा स्थित विकलांग गौशाला में पहुंचकर गौसेवा का पुण्य कार्य किया। इस सेवा कार्यक्रम में पूनम जैन, रजनी जैन, रेनू जैन, बबीता जैन, रश्मि जैन, रेखा जैन, दीपा जैन, प्रीति जैन, नीलम जैन, वर्षा जैन और इंदिरा जैन ने सहभागिता निभाई। समूह की महिलाओं ने गौशाला में मौजूद विकलांग एवं निर्बल गायों को स्नेहपूर्वक गुड़ और केले खिलाकर सेवा-भाव प्रकट किया। गौशाला परिसर में प्रवेश करते ही महिलाओं ने श्रद्धा के साथ गौमाता को नमन किया और एक-एक गोवंश को स्नेह से पुचकारते हुए आहार अर्पित किया। इस दौरान सेवा, करुणा और संवेदना का वातावरण पूरे परिसर में महसूस किया गया। रजनी जैन ने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है और यह कर्म मानवता के सर्वाेच्च मूल्यों को पुष्ट करता है। उनके अनुसार गौवंश के प्रति करुणा न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि सामाजिक चेतना का भी प्रतीक है। इसी भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से समूह समय-समय पर गौसेवा के कार्यक्रम आयोजित करता है। सेवा के इस अवसर पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से यह संकल्प भी दोहराया कि वे समाज में जीवदया और सहृदयता की भावना को और अधिक मजबूती से स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास करती रहेंगी। उनके अनुसार किसी भी जीव के प्रति करुणा ही सच्चे धर्म का मार्ग है, और जब सेवा श्रद्धा से की जाए तो वह उपासना का स्वरूप ले लेती है।

गौमाता के चरणों में प्रणाम कर कल्याण की कामना 

गौशाला में उपस्थित गायों को महिलाओं ने आत्मीयता से फलाहार कराते हुए भारत की उन शाश्वत परंपराओं का स्मरण किया, जिनमें गौमाता को परिवार का सदस्य और समृद्धि का आधार माना जाता है। गुड़ और केले के सेवन के दौरान गायों का शांत व्यवहार और स्नेहपूर्ण प्रतिक्रिया महिलाओं को भीतर तक संतुष्टि प्रदान कर रही थी। सेवा के बाद महिलाओं ने गौमाता के चरणों में प्रणाम कर कल्याण की कामना भी की। कार्यक्रम के अंत में महिला समूह ने एक स्वर में कहा कि गौसेवा केवल आयोजन नहीं, बल्कि जीवन की नियमित साधना है, जिसे समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनाना चाहिए। सेवा के उसी संकल्प के साथ यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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