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मुनिश्री विलोकसागरजी का पोरसा में मंगल प्रवेश पर दिखी श्रद्धा भक्ति : साधर्मी बंधुओं ने मुनि संघ की भव्य अगवानी की


दिगंबर जैन साधुओं का पोरसा नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। युगल मुनिराजों को भव्य शोभायात्रा के साथ नगर प्रवेश कराया गया। आचार्यश्री विद्यासागरजी एवं आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज का गुरुवार को प्रातःकालीन बेला में भव्य मंगल आगमन हुआ। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना/पोरसा। दिगंबर जैन साधुओं का पोरसा नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। युगल मुनिराजों को भव्य शोभायात्रा के साथ नगर प्रवेश कराया गया। आचार्यश्री विद्यासागरजी एवं आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज का गुरुवार को प्रातःकालीन बेला में भव्य मंगल आगमन हुआ। पोरसा के बंधु मुरैना से ही मुनिराजों का विहार करा रहे हैं। साधर्मी बंधुओं ने नगर की सीमा पर पहुंचकर मुनिराजों का पाद प्रक्षालन किया, उनकी आरती उतारी। श्री चरणों में श्रीफल समर्पित कर उनकी अगवानी की। नगर सीमा से युगल मुनिराजों को भव्य शोभायात्रा के साथ नगर भ्रमण कराते हुए मंदिर ले जाया गया। शोभायात्रा में बैंडबाजों की मधुर धुन एवं जैन भजनों पर भक्ति पूर्ण नृत्य करते हुए श्रद्धालु अपनी खुशी को जाहिर कर रहे थे। विभिन्न स्थानों पर युगल मुनिराजों का पाद प्रक्षालन एवं आरती कर अगवानी की गई। नगरवासी दिगंबर साधुओं को देखकर उनके त्याग और संयम की अनुमोदना कर रहे थे। नगर प्रवेश के अवसर पर मुरैना, अंबाह एवं अन्य नगरों के बंधुओं ने भी सहभागिता प्रदान की

 साधु-संतों का समागम पुण्य कर्म के उदय से होता है प्राप्त 

भव्य शोभायात्रा जिनालय पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हुई। धर्मसभा को संबोधित करते हुए युगल मुनिराजों ने कहा कि साधु-संतों का समागम एवं सान्निध्य पुण्य कर्म के उदय से ही प्राप्त होता है। जब भी आपको गुरुओं का सान्निध्य अथवा उनकी सेवा करने का अवसर मिले तो उसे चूकना नहीं चाहिए। साधु संत तो चलते फिरते रहते हैं, आज आपको सान्निध्य मिला है फिर न जाने कब मिलेगा। दिगंबर साधुओं के दर्शन मात्र से सातिशय पुण्य का अर्जन होता है। धर्मसभा से पूर्व चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन का सौभाग्य मुरैना एवं अन्य स्थानों से पधारे हुए श्रावक श्रेष्ठी राजेंद्र भंडारी (अध्यक्ष टिकटोली), राजकुमार जैन राजू, बृजेश जैन दादा, राकेश जैन, सोनू जैन ज्ञानतीर्थ, सुनील जैन मुरैना, अशोक जैन छतरपुर को प्राप्त हुआ।

अतिथियों का किया बहुमान 

ज्ञातव्य हो कि युगल मुनिराजों ने मुरैना में चातुर्मास किया था। चातुर्मास निष्ठापन के बाद 27 अक्टूबर को मुरैना से पोरसा के लिए मंगल पद विहार किया और दिमनी, अंबाह होते हुए पोरसा नगर में प्रवेश किया। नगर में युगल मुनिराजों के पावन सान्निध्य में पुण्यार्जक परिवार श्रावक श्रेष्ठी पवन जैन, सिद्धार्थ जैन के सौजन्य से श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का 6 नवंबर तक चलने वाला आठ दिवसीय आयोजन संपन्न होगा। मंदिर कमेटी एवं विधान पुण्यार्जक परिवार ने अतिशय क्षेत्र टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी, बड़ा मंदिर मुरैना के पूर्व कोषाध्यक्ष राजकुमार जैन राजू, पिच्छिका प्राप्तकर्ता बृजेश जैन दादा, राकेश जैन, सोनू जैन ज्ञानतीर्थ, सुनील जैन, दीक्षा जैन, अनुश्री जैन, मीना जैन मुरैना, अशोक जैन छतरपुर एवं अन्य अतिथियों का बहुमान किया।

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