संयम की राह पर अग्रसर 18 त्यागियों की नगरी में निरंतर पद विहार कर रहे साधु-संतों का आना जारी है। इसी क्रम में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका 105 श्री विश्वयशमति जी एवं आर्यिका श्री विमलमति जी का मंगल प्रवेश सोमवार शाम को श्री सिद्धांचल पोदनपुरम की ओर से हुआ। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…
सनावद। संयम की राह पर अग्रसर 18 त्यागियों की नगरी में निरंतर पद विहार कर रहे साधु-संतों का आना जारी है। इसी क्रम में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका 105 श्री विश्वयशमति जी एवं आर्यिका श्री विमलमति जी का मंगल प्रवेश सोमवार शाम को श्री सिद्धांचल पोदनपुरम की ओर से हुआ। आर्यिका संघ नवकार तीर्थ में होने वाले भव्य पंचकल्याणक में अपना सानिध्य प्रदान करने वाली हैं। आर्यिका संघ ने मंगलवार को सुबह नगर के सभी जैन मंदिरों के दर्शन किए एवं मंदिरों के इतिहास को जाना। प्रातःकालीन मंगल बेला की प्रवचन माला में संगीता पाटोदी द्वारा मंगलाचरण कर सभा का शुभारंभ किया गया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री विश्वयशमति जी ने अपनी देशना में कहा कि आज का दिन हमारे लिए बहुत ही अविस्मरणीय क्षणों को संजोने वाला है क्योंकि, आज सौभाग्य प्राप्त हुआ गुरु के जन्म नगरी की धूल मस्तक लगाने का। ये वो धरा है जहां से एक दो नहीं बल्कि 18 संत इस मार्ग पर निकले। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के हस्त करकमलों द्वारा हमें आर्यिका दीक्षा लेने का सौभाग्य मिला। सनावद नगरी का परिचय किसी व्यापार से नहीं या भूगोल की दृष्टि से नहीं है बल्कि इस धरती का परिचय त्याग की दृष्टि से होता है।

सब जी रहे हैं दूसरों के लिए
इसी क्रम में आर्यिका श्री श्रृष्टि भूषण माताजी ने कहा कि इस नगर को गौरवान्वित करने वालेआचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के साथ हमें महावीरजी तीर्थ क्षेत्र राजस्थान में चातुर्मास करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आचार्य श्री का वात्सल्य पाकर हम तो धन्य हो गए। आप सब सौभाग्यशाली हैं कि आप ने इस धरती पर जन्म लिया है। अपने लिए कौन जी रहा है। अपने लिए कोई नहीं जी रहा है, सब जी रहे हैं दूसरों के लिए क्योंकि, इन पांचों इंद्रिय को सही उपयोग करोगे तो एक इंद्रिय बन जाओगे। सिर्फ बाहर का त्याग नहीं अंदर के राग का ेभी समाप्त करना तुम्हारा जीवन त्याग मय हो जाएगा। कभी ये मत सोचना कि हम घर में रहो, लेकिन दिल से दर पर रहो तो तर जाओगे।
नगर के आचार्य सूर्य के समान आज पूरे विश्व में चमक रहे
मुनि श्री निराकुल सागर जी महाराज ने कहा की सनावद का अर्थ है। सनआवाद सन याने सूरज और हमारे आचार्य जो है वो सूर्य के समान होते हैं। आज नगर के आचार्य सूर्य के समान आज पूरे विश्व में चमक रहे हैं। मुनि श्री ने बताया कि मोक्ष मार्ग कैसे पाएंगे तो आप को कुछ नहीं करना है जहा से जोड़े हो वहा से मोड़ ले लो रास्ते पर आ जाओगे। जो चीज इंद्रिय विषय में हो चाहे जो भी हो आप कर्म करे फल अवश्य मिलेगा।
सम्यक दर्शन के बिना जैनत्व प्राप्त ही नहीं होता
मुनि श्री अक्षय सागर महामुनिराज ने अपनी देशना में कहा कि हमें यह नहीं पता की जैनत्व कब आता है? सम्यक दर्शन के बिना जैनत्व प्राप्त ही नहीं होता और सम्यक दर्शन कब होता है, जब वीतराग पर विश्वास से ही जैनत्व प्राप्त होता है। देव का निर्मय हुए बिना धर्म का निर्मय नहीं होता। जिनशासन की प्रभावना में प्रत्येक पात्र को बनाने की कला प्रत्येक के पास रहती है और कौन से जीव कौन से सूत्र द्वारा ऊपर उठेगा। कह नहीं सकते यही लक्ष्य बना के जैन आचार्यों ने हम लोगों के लिए जो धर्मादेश बताया है। इसी देशना की देशना लब्धी द्वारा पतित से पतित आत्मा भी पावन बनने की पूरी संभावना बन जाती है। आज की इस मंगल बेला में मुनि श्री आर्यिका माताजी को आहार करवाने का सौभाग्य मंजुला हेमचंद भूच परिवार, सुनीता भूपेंद्र लश्करे परिवार एवं अविनाश कुमार पारस कुमार वाचनालय परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।
आर्यिका संघ हुआ मंगल विहार
नगर में विराजमान आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी संसंघ का मंगल विहार बेड़िया की ओर हुआ। आप ने मार्ग में सर्वार्थ सिद्धि द्वार एवं मुनि श्री चा सागर जी महाराज की छतरी का अवलोकन भी किया। ज्ञात है कि आर्यिका माता जी भोपाल में चर्तुमास संपन्न कर नवकार तीर्थ नाशिक महाराष्ट्र की ओर निरंतर अग्रसर है। इस अवसर पर मुकेश जैन, राजेश पंचोलिया, राजीव जैन,,हर्षित जैन, पुलकित जैन, नीरव जैन, प्रशांत चौधरी, अचिंत्य जैन, सहित अनेक समाजजन विहार में सहयोगी बने।













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