मुनि श्री सारस्वतसागर जी महाराज, मुनि श्री जयंतसागर जी और मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज रुकडी के श्री आदिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां बुधवार को श्री आदिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में श्री भगवान महावीर मनोकामना सिद्धि विधान और गुरुवार को लघु गणधर वलय महामंडल विधान किया गया। रुकड़ी से पढ़िए, यह खबर…
रुकडी(महाराष्ट्र)। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वतसागर जी महाराज, मुनि श्री जयंतसागर जी और मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज रुकडी के श्री आदिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां बुधवार को श्री आदिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में श्री भगवान महावीर मनोकामना सिद्धि विधान और गुरुवार को लघु गणधर वलय महामंडल विधान किया गया। मुनिश्री सारस्वतसागर जी ने अपने प्रवचन में अहिंसा का महत्व बताया। मुनि श्री जयंतसागर जी ने 2023 में बड़ौत, 2024 में सोलापुर और 2025 में नांद्रे में चातुर्मास किया है। उन्होंने पाठशाला के बच्चों को संस्कारित करने का कार्य किया है। मुनिश्री सिद्धसागर जी ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांत अहिंसा, सत्य, अचौर्य अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य एवं अनेकांतवाद पर आधारित हैं। भगवान महावीर स्वामी ने सभी जीवों पर दया करने का संदेश दिया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक पाटील ने बताया कि जैन धर्म में मुनि दीक्षा लेकर आचार्य गुरु के मार्गदर्शन में अपना जीवन समर्पित करना है। सांसारिक जीवन से बाहर निकलकर मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए मुनि दीक्षा लेते हैं। मुनि दीक्षा दिन का भी बडा महत्त्व है।
गुरुवार को शत तारका लॉन में मुनि श्री जयंतसागर जी का तृतीय मुनि दीक्षा दिवस भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। आहारचर्या, गुरु पूजा, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट और मुनिराज के प्रवचन हुए। वीर सेवा दल, वीर महिला मंडल, महावीर तरुण मंडल ने संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया था। कार्यक्रम में सोलापुर, कोल्हापुर, नांदणी, सांगली, नांद्रे, जयसिंगपुर माणगाव, रुई, हुपरी, इचलकरंजी, भिंड से श्रावक-श्राविकाएं और मुनिश्री के भक्त बडी संख्या में उपास्थित थे।













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