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अतिशय तीर्थक्षेत्र सिहोनियां जी में आयोजन : मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर आराधना के लिए जुटे श्रद्धालु


अतिशय तीर्थक्षेत्र सिहोनियां जी में श्री दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर पर जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप व मोक्ष कल्याणक दिवस बुधवार को धर्ममय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर देश भर के जैन समाज के लोग मौजूद रहे। मंदिर परिसर में प्रात: काल में शांति धारा के उपरांत विश्व कल्याण की कामना हेतु श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का आयोजन किया गया। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट…


अम्बाह। अतिशय तीर्थक्षेत्र सिहोनियां जी में श्री दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर पर जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप व मोक्ष कल्याणक दिवस बुधवार को धर्ममय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर देश भर के जैन समाज के लोग मौजूद रहे। मंदिर परिसर में प्रात: काल में शांति धारा के उपरांत विश्व कल्याण की कामना हेतु श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान से देश में सुख समृद्धि और शांति की कामना की।

विधान में पंडित राजेंद्र शास्त्री और संजय जैन शास्त्री विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने समस्त धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराईं। आयोजन में नित्य नियम पूजन, शांतिधारा के उपरांत भगवान शांतिनाथ नाथ का सामूहिक मंत्रोच्चारण के बीच 108 कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। तत्पश्चात भगवान के निर्वाण महोत्सव के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू चढ़ाकर मंगल कामना की।

मुक्तिपथ की ओर बढ़ने की देते हैं प्रेरणा

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य अर्जित किया। कार्यक्रम में मंदिर कमेटी के संरक्षक एवं अंबाह नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जिनेश जैन ने कहा कि जैन धर्म में तीर्थंकर भगवान के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक का विशेष महत्व है। भगवान के ये कल्याणक हमें मुक्तिपथ की ओर बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। यह आयोजन मानव से महामानव और आत्मा से परमात्मा बनने का प्रतीकात्मक आयोजन है, जिनके जरिए धर्म और पुण्य का संचय होता है। भगवान शांतिनाथ ने चक्रवर्ती सम्राट होने के बावजूद सब कुछ त्याग कर आत्म कल्याण के मार्ग को अपनाया था, जिसके जरिए उन्होंने मोक्ष को प्राप्त कर जगत को मोह माया राग द्वेष से दूर रहने का संदेश दिया था।

कमेटी के प्रमुख आशीष जैन सोनू ने कहा कि भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप मोक्ष कल्याणक पर्व हमें संसारी विकारों से दूर रहने की शिक्षा देता है। तीर्थंकर भगवान शांति के विधाता हैं और जगत को शांति प्रदान करते हैं। इसलिए आज हम सभी एकत्रित होकर उनकी जगत शांति हेतु आराधना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं अनंत है जो कभी पूर्ण नहीं होतीं। भगवान ने दिव्य देशना में जो ज्ञान दिया था, वही ज्ञान आज हमारा मार्गदर्शन कर रहा है। प्रत्येक जीव में निर्वाण प्राप्त करने की योग्यता है। इसलिए हमें भगवान के बताए मार्ग पर चलना चाहिए। वहीं कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ भगवान का गुणगान कर चंबल अंचल में सुख, शांति, समृद्धि के साथ-साथ अच्छे मानसून की कामना की। इस दौरान देशभर से पधारे लोगों के लिए निशुल्क आवास और भोजन व्यवस्था सोनू मित्र मंडल द्वारा की गई।

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