आगरा के अवधपुरी जैन समाज में दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजन एवं मंगल आरती बड़े उत्साह से सम्पन्न हुई। पंडित विवेक जैन ने मार्दव धर्म का महत्व समझाया। पढ़िए शुभम जैन की खास रिपोर्ट…
आगरा। सकल दिगंबर जैन समाज अवधपुरी द्वारा बोदला स्थित श्री पद्मप्रभु जिनालय में दशलक्षण महापर्व की मंगल आराधना बड़े उत्साह के साथ की जा रही है। महापर्व के दूसरे दिन 29 अगस्त को उत्तम मार्दव धर्म का आयोजन हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।
पंडित विवेक जैन शास्त्री के निर्देशन में अष्ट द्रव्यों से पूजन एवं पंचपरमेष्ठी पूजन की विधियां सम्पन्न की गईं। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि उत्तम मार्दव धर्म का अर्थ है – चित्त में मृदुता और व्यवहार में विनम्रता। यह तब प्रकट होता है जब मनुष्य में मान कषाय का अभाव हो। उन्होंने समझाया कि जाति, कुल, रूप, ज्ञान, तप, वैभव, प्रभुत्व और ऐश्वर्य से उत्पन्न अभिमान को मद कहा जाता है और इसी मद का अभाव ही उत्तम मार्दव कहलाता है।
संगीतमय वातावरण में प्रभु की मंगल आरती
सांयकाल में भक्तों ने संगीतमय वातावरण में प्रभु की मंगल आरती कर भक्ति का आनंद लिया। इस अवसर पर इंद्रप्रकाश जैन, विकास जैन, रविंद्र जैन, मनीष जैन, प्रवीन जैन, नरेंद्र जैन, राकेश जैन, संजय जैन, अनिल जैन, ऋषभ जैन, शुभम जैन, कविता जैन, गीता जैन, रंजना जैन, पुष्पा जैन, अंजू जैन, सीमा जैन, बीना जैन, पायल जैन सहित समस्त अवधपुरी जैन समाज के लोग उपस्थित रहे। यह महापर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज में त्याग, संयम और सद्भाव की भावना भी जागृत करता है।













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