बकस्वाहा में दसलक्षण महापर्व एवं क्षमावाणी पर्व के अवसर पर श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान भगवान का 1008 कलशों से जलाभिषेक किया गया और मुनि संघ ने मंगल उपदेश दिए। समाज ने शोभायात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया। पढ़िए रत्नेश जैन रागी की खास रिपोर्ट…
बकस्वाहा। यहां पर जैन धर्म के दस दिवसीय महापर्व दसलक्षण एवं पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर क्षमावाणी पर्व मनाया गया। इस अवसर पर पिछले वर्षों की परंपरा अनुसार श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकालकर जलाभिषेक किया गया।
श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर तथा मुनि सुब्रतनाथ जैन मंदिर से श्रीजी की शोभायात्रा प्रारंभ हुई, जो भगवान महावीर मार्ग, बुधवारा बाजार, बड़ा बाजार होते हुए बस स्टैंड और मुख्य मार्ग से गुजरकर गांधी चबूतरा मैदान पहुंची। यहां 1008 कलशों से श्रीजी का जलाभिषेक कर क्षमावाणी पर्व मनाया गया।धर्मसभा में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री श्रुतेश सागर जी एवं मुनि श्री सुश्रुत सागर जी ने मंगल उपदेश दिए। उन्होंने मिलजुलकर शांति पूर्वक रहने और क्षमावाणी पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात शोभायात्रा अहिंसा मार्ग से होती हुई जैन मंदिर रोड पहुंचकर संपन्न हुई।
शोभायात्रा व जलविहार का आयोजन किया जाता है
रास्ते में श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर लाभ लिया। जैन समाज व युवा मंच के अनिल जैन बड़कुल और रत्नेश जैन रागी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष दसलक्षण महापर्व की समाप्ति पर इस प्रकार की शोभायात्रा व जलविहार का आयोजन किया जाता है, जिसमें समाज के लोग भक्ति व उत्साह के साथ भाग लेते हैं। इस अवसर पर संदेश दिया गया कि आत्मा की शुद्धि का यह महापर्व शांति, अहिंसा, जीव दया और जियो और जीने दो का संदेश देता है।













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