झुमरीतिलैया (कोडरमा) में दसलक्षण महापर्व के नवें दिन जैन समाज ने “उत्तम आकिंचन धर्म” का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया। अभिषेक, शांतिधारा, प्रवचन, भजन, fancy dress प्रतियोगिता सहित अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए। पढ़िए राजकुमार जैन अजमेरा एवं नवीन जैन की ख़ास रिपोर्ट…
झुमरीतिलैया (कोडरमा)। जैन धर्म का सर्वोच्च पर्व दसलक्षण महापर्व का नवम दिवस “उत्तम आकिंचन धर्म” के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर पंडित अभिषेक शास्त्री एवं डॉ. निर्मला दीदी ने प्रवचन देते हुए कहा कि “किंचित भी मेरा नहीं है, संसार का कोई भी पदार्थ मेरा नहीं है”—ऐसा मानना और जानना ही आकिंचन धर्म है। उन्होंने समझाया कि जीवन क्षणभंगुर है, ममता और विकल्पों का त्याग ही आकिंचन धर्म का सार है।
प्रातःकाल जयपुर से पधारी दीदी के मुखारविंद से नया मंदिर जी में महाशांतिधारा का पाठ किया गया। भगवान महावीर की प्रतिमा का प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य अनिल, रौनक जैन कासलीवाल एवं प्रदीप-पीयूष जैन छाबड़ा परिवार को प्राप्त हुआ। बड़ा मंदिर में भगवान पारसनाथ का प्रथम अभिषेक कमल, राजीव एवं अमित जैन छाबड़ा परिवार को मिला। सरस्वती भवन में भगवान अनंतनाथ की प्रतिमा पर प्रथम अभिषेक मुन्ना-दिलीप जैन बाकलीवाल परिवार ने किया। इसी प्रकार 1008 पुष्पदंतनाथ भगवान का मंगल विहार एवं प्रथम अभिषेक श्री प्रकाश-विदित जैन गंगवाल और शांतिधारा पारस-ऋषभ जैन सेठी परिवार ने किया।
नीचे वेदी पर 1008 आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा ललित-सौरभ जैन पापड़ीवाल परिवार को मिला। समाज के सह मंत्री राज जैन छाबड़ा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन काला, सुबोध-आशा जैन गंगवाल, ललित-नीलम जैन सेठी, सुशील जैन छाबड़ा व पार्षद पिंकी जैन ने सभी व्रतधारियों की अनुमोदना की। प्रेम झांझरी (सोलह कारण व्रतधारी), अंकित जैन थोल्या एवं नेहा जैन झांझरी (दसलक्षण व्रतधारी) की भी विशेष अनुमोदना की गई।
फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, ड्रॉ निकाला
रात्रि को मंदिर परिसर में नन्हें-मुन्ने बच्चों की fancy dress प्रतियोगिता आयोजित हुई। सभी प्रतिभागियों को रांची प्रवासी सरोज एवं अंकुर जैन पापड़ीवाल द्वारा पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता की परियोजना निदेशक रिंकू जैन गंगवाल, मोना जैन छाबड़ा तथा संयोजक संजय थोल्या, मोहित जैन सोगानी, आशा जैन गंगवाल, रीता जैन सेठी एवं आशिका जैन कासलीवाल रही। विशेष कूपन ड्रॉ में दो भाग्यशाली विजेताओं को जैन युवक समिति शिखरजी महावंदना ग्रुप द्वारा पुरस्कृत किया गया।













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