दाहोद दिगंबर जैन समाज ने दशलक्षण पर्युषण महापर्व के समापन उपरांत क्षमा वाणी पर्व का आयोजन भक्ति और उल्लास के साथ किया। भगवान जिनेंद्र की रथ यात्रा नगर में धूमधाम से निकाली गई, जहां मुनि श्री सूरत सागर जी ने क्षमा वाणी पर्व का महत्व बताया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
दाहोद। दिगंबर जैन समाज ने दशलक्षण धर्म पर्युषण महापर्व मना कर अब क्षमा वाणी पर्व की ओर कदम बढ़ाए। पूनम और एकम के अवसर पर दाहोद के प्राचीन दिगंबर जैन मंदिरों से जिनेंद्र प्रभु को चांदी की गंधकुटी और कास्ट के प्राचीन रथों में सवार कर नगर भ्रमण हेतु शोभायात्रा निकाली गई।
बैंड-बाजा, ढोल-ताशे की धुन पर सैकड़ों समाजजन, युवक-युवतियां और बालक-बालिकाएं भक्ति भाव से रास-डांडिया खेलते हुए महावीर शेरी जिनालय से नगर पालिका चौक होते हुए गोविंद नगर टोपी हॉल पहुंचे। यहां श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा और आरती संपन्न हुई।
मुनि श्री सूरत सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि जैसे सड़क कितनी भी अच्छी हो, धूल आ ही जाती है, वैसे इंसान कितना भी अच्छा हो, उससे भूल हो जाती है। लेकिन जब इंसान भूल पर क्षमा मांग ले तो वह उत्तम कार्य है। उन्होंने क्षमा वाणी पर्व के महत्व को समझाते हुए मैत्री और क्षमा भाव धारण करने का संदेश दिया। दोपहर बाद भगवान को पुनः रथ में सवार कर निज मंदिर में लाया गया, जहां नृत्य और रास-डांडिया के साथ उन्हें विराजमान किया गया। पूरा नगर धार्मिक उल्लास और भक्ति से सराबोर रहा।













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