मुनिश्री सुधा सागरजी ने कहा कि तुम्हें दुःखी देखा नहीं कि मैं दुःखी हो जाता हूं कि मेरा भक्त परेशान हो। वही विजय धुर्रा ने कहा कि असीम क़ालीन भक्तावर के रूप में भक्तों को एक रक्षा कवच मिला है। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
थूवोनजी। तुम्हें दुःखी देखा नहीं कि मैं दुःखी हो जाता हूं कि मेरा भक्त परेशान हो मेरा भक्त होकर ग़रीब है। भगवान इसकी कैसे भी गरीबी दूर करो। कुछ तो पुण्य का उदय रहता है कि छोटा सा बालक है अभी तो गोदी में ही है और उसे महाराज के दर्शन करने तुम लेकर आ गए तो मैं बहुत खुश होता हूं। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सोचता हूं कि ये जन्म-जन्म का धर्मात्मा है, अभी पैदा ही हुआ है और परिवार वाले तीर्थ क्षेत्र के दर्शन कराने ले आए गुरु महाराज के चरणों में लाकर समर्पित कर दिया। ऐसा सहयोग भी बहुत पुण्य के योग से मिलता है। धर्म कराने के तरीके हैं जिस-जिस के दान के पीछे पड़ूं तो समझ लेना कि उसका पैसा पुण्य के उदय से आया है। ड़ाकू और साधु की एक ही जाति है ड़ाकू को पता चले कि सेठ पर माल है ऐसे ही साधु को पता चले तो वह उसे दान के लिए प्रेरित करने लगता है साधु सोचते हैं कि मेरा भक्त इतना पुण्य आत्मा है सब कुछ करके भी दो पैसे बचे हैं तो आगे भी उसका भला होता रहें, इसलिए उसको दान की प्रेरणा दे देता है।
विश्व शांति महायज्ञ प्रतिदिन होंगी आहुतियां
इस दौरान क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी आने वाले भक्तों के लिए असीम क़ालीन भक्तामर के रूप में एक ऐसा रक्षा कवच प्रदान किया है, जो आपकी रक्षा घर के बाहर रहने पर करेगा। गुरु ने कहा था कि जब आप घर से बाहर रहते हैं तो ये जो विधान कर रहे हैं। यही आपके लिए सुरक्षा चक्र का कार्य करेगा। ऐसे असीम क़ालीन भक्तामर महामंडल विधान का महा मंगल कलश अजयकुमार विजयकुमार कटारिया जयपुर एवं विधान कलश श्राविका शिरोमणि सुशीला पाटनी आरके मार्वल किशनगढ़ ने स्थापित किया।
प्रमुख पात्र बनकर भक्तों ने की शांतिधारा
इस दौरान जगत कल्याण की कामना के लिए शांतिधारा के पात्रों का चयन प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भइया ने करते हुए कहा कि दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के खड़े बाबा का महाभिषेक करने वाले पात्रों को एक साथ चार लाभ मिल रहे हैं। ऐसे परिवार का नाम गुरु मुख से होगा। परिवार जनों के नाम शांतिधारा में आ रहे हैं। उन्हें गंधोदक से परिपूर्णित रजत कलश एवं खड़े बाबा का विशाल चित्र सम्मान स्वरूप कमेटी द्वारा भेंट किया जा रहा है। महा शांतिधारा करने का सौभाग्य संदीप गोधा मकराना, संजय जैन नेयेडा, शीला विनोदकुमार मुज्जफरनगर, ज्ञानेंद्र गदिया, सूरज सहित अन्य भक्तों को मिला। इनका सम्मान थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर, धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव जैन, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी, जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजीत बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार सहित अन्य प्रमुखजनों ने अभिनंदन किया।
बचें हुए पैसे को धर्म कार्य में लगा कर यश कीर्ति अर्जित करें
उन्होंने कहा कि बचे हुए पैसे को धर्म कार्य में लगा कर यश कीर्ति अर्जित करें, ये जो पैसा बचा है, जो किसी ना किसी धर्म के वृक्ष पर लगा हुआ फल है। बचे हुए पैसे से पाप मत करना। वो तुम्हारे महान पुण्य का फल है। जाओ ये तुम्हारे जन्म-जन्म के पुण्य का फल है। मेरे भक्त के पास पैसा बढ़ता है। मेरे भक्त का व्यापार बढ़ता है तो मेरा सीना छप्पन इंच का हो जाता है। ये जन्म-जन्म का पुण्यात्मा है तो आज संपन्नता की जिंदगी जी रहे। अब आपको आगे इसे आगे बनाए रखने के लिए सतत् पुरुषार्थ करते रहना चाहिए।













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