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मुनि श्री विद्यासागरजी महाराज आचार्य पद प्रतिष्ठापन महा महोत्सव में उमडा जनसैलाब : इनाम धामणी में हुए भव्य आयोजन में निकली शोभायात्रा


भारत का दिगम्बर जैन समाज धन्य हुआ। 20 फरवरी को इनाम धामणी में मुनि श्री विद्यासागर जी महाराज को आचार्य पद मिला।आचार्य श्री वर्धमानसागरजी द्वारा मुनिश्री विद्यासागरजी महाराज को आचार्य पद प्रदान करने के संस्कार देखने जन सैलाब उमड़ा। इनाम धामणी से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर…


इनाम धामणी (महाराष्ट्र )। भारत का दिगम्बर जैन समाज धन्य हुआ। 20 फरवरी को इनाम धामणी में मुनि श्री विद्यासागर जी महाराज को आचार्य पद मिला।आचार्य श्री वर्धमानसागरजी द्वारा मुनिश्री विद्यासागरजी महाराज को आचार्य पद प्रदान करने के संस्कार देखने जन सैलाब उमड़ा। विशाल जनसमूह इस न भूतो न भविष्यति उत्सव को देखने के लिए उपस्थित था। विद्यासागर जी महाराज का स्वभाव शांति प्रिय है। विद्यासागर जी महाराज ने कभी भी कोई भी कार्य बगैर गुरु आज्ञा के नहीं किया। हमने उन्हें कभी भी किसी को डांटते हुए नहीं देखा। कहते हैं कि सौम्यता हो तो साधुता है। यह सब विद्यासागर जी महाराज में दिखने को मिलती है। आचार्य उन्हें कहा जाता है, जो संघ के मुनिराजों को आदेश और निर्देश दें। जो मोक्ष मार्ग पर आने वालों को संस्कारित कर दीक्षा दें।

सभी भव्य शोभायात्रा के साथ मुख्य मंडप में पधारे

सुबह आहार चर्या, सामायिक के उपरांत दोपहर को आचार्य वर्धमानसागर जी महाराज, आचार्य चंद्रप्रभुसागर जी महाराज,आचार्य सुयशसागर जी, 40 मुनिराज, 6 माताजी, जिनसेन भट्टारक महास्वामीजी नांदणी, लक्ष्मीसेन भट्टारक महास्वामीजी कोल्हापुर एवं स्वस्तिश्री चारुकीर्ती भट्टारक महास्वामीजी, रथ, हाथ में शास्त्र एवं कलश लेकर श्रावक- श्राविका आदि सभी भव्य शोभायात्रा के साथ मुख्य मंडप में पधारे।

आगमानुसार भक्तिपाठ किया

जैसे ही मुहूर्त का समय हुआ, वैसे ही आचार्य श्री वर्धमानसागरजी महाराज ने अपने आचार्य पद त्याग की घोषणा करके आचार्य आसन से उठे और मुनि आसन पर विराजमान मुनि श्री विद्यासागर को उठाकर अपने आचार्य आसन पर बिठाया। वे स्वयं मुनि आसन पर विराजमान हो गए। उन्होंने आगमानुसार भक्तिपाठ आदि करते हुए मुनि श्री विद्यासागर जी के ऊपर आचार्य पद के संस्कार किए।

अलौकिक दृश्य देख अभिभूत

आचार्य श्री विद्यासागर जी ने अत्यन्त विनम्र भाव से मुनि श्री वर्धमानसागर जी को नमोस्तु निवेदित किया। यह दृश्य देखने लायक था। उसके बाद आचार्य श्री विद्यासागर जी का आचार्य पद से प्रथम प्रवचन हुआ। उन्होंने समाज को संबोधित किया। इस अवसर पर अशोक पाटणी, अतुल शहा, भालचंद्र पाटील, हेमंत लट्ठे आदि मान्यवर आचार्यपद प्रतिष्ठापन महामहोत्सव में उपस्थित थे।

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