आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज मुरैना की जैन समाज से विशेष स्नेह रखते थे। आपका अनेकों बार मुरैना में आगमन हुआ । पूज्य गुरुदेव मुरैना को अपनी साधना स्थली कहा करते थे। पूज्य गुरुदेव के समाधिमरण से उनके भक्तों में शोक व्याप्त है। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। दिगम्बराचार्य विरागसागर जी महाराज का जालना (महा.) के पास में 04 जुलाई की मध्य रात्रि को संलेखना पूर्वक समाधिमरण हो गया। बुंदेलखंड के प्रथम दिगंबराचार्य विराग सागर महाराज का जन्म मध्य प्रदेश के सागर जिले में ग्राम पथरिया में 02 मई 1963 में श्रावक श्रेष्ठी कपूरचंद श्यामा देवी जैन के परिवार में हुआ था। आपका गृहस्थ अवस्था का नाम अरविंद जैन था । आपकी क्षुल्लक दीक्षा 02 फरवरी 1980 को वुढार जिला शहढोल में आचार्य श्री सन्मति सागर महाराज के करकमलों द्वारा हुई थी । आपको मुनि दीक्षा 09 दिसंबर 1986 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज के द्वारा प्रदान की गई। जानकारी के अनुसार आचार्य श्री का 2024 का पावन वर्षायोग महाराष्ट्र के जालना में होना था, जिसके लिए वे अपने शिष्यों के साथ पद विहार कर रहे थे । 02 जुलाई को महाराष्ट्र के जालना के नजदीक देवभूति के ग्राम सिदखेड़ा में पदविहार करते समय अचानक विराग सागर महाराज का स्वास्थ्य खराब हो गया ।
उन्होंने तुरंत संल्लेखना समाधि ग्रहण की और 03/ 04 जुलाई की मध्य रात्रि को 02.30 बजे इस नश्वर शरीर को त्यागकर देवलोक को गमन किया । उनकी समाधि की खबर सुनते ही जैन समाज में शोक की लहर दौड़ गई । अंतिम संस्कार के समय दर्शनों के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा । हजारों की संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे। आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज ने अपने संयमी जीवनकाल में 350 से अधिक दीक्षाए प्रदान कीं। आपके दीक्षित मुनि, आर्यिकांए पूरे विश्व में अहिंसा, शाकाहार और जैन धर्म के सिद्धांतो का प्रचार प्रसार कर रहे हैं । आपने अनेकों पुस्तकों का लेखन किया, साथ ही अनेकों शास्त्रों की टीकाएं लिखीं। आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज मुरैना की जैन समाज से विशेष स्नेह रखते थे। आपका अनेकों बार मुरैना में आगमन हुआ । पूज्य गुरुदेव मुरैना को अपनी साधना स्थली कहा करते थे। पूज्य गुरुदेव के समाधिमरण से उनके भक्तों में शोक व्याप्त है ।













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