शहर के बाजार नं. 3 में स्थित श्रीआदिनाथ भगवान के 90 वर्ष पुराने मंदिर को पूरा उतारकर नींव से लेकर शिखर तक मकराना मार्बल से बनाया जा रहा है। मंदिर के नव निर्माण के लिए युद्ध स्तर पर कार्य जारी है। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर…
रामगंजमंडी। शहर के बाजार नं. 3 में स्थित श्रीआदिनाथ भगवान के 90 वर्ष पुराने मंदिर को पूरा उतारकर नींव से लेकर शिखर तक मकराना मार्बल से बनाया जा रहा है। मंदिर के नव निर्माण के लिए युद्ध स्तर पर कार्य जारी है। श्रीआदिनाथ जैन श्वेतांबर श्रीसंघ ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख ने इसकी कमान संभाल रखी है। पारख ने बताया कि पूर्व के मंदिर में खनन एवं शिलान्यास नहीं होने एवं सामरण शिखर होने, शिखर बंध नहीं होने के साथ कई दोष बताए थे। साथ ही आचार्यों एवं मंदिर बनाने वाले कई शिल्पकारों ने इस मंदिर को घर देरासर की श्रेणी में माना और मंदिर जीर्णाेद्धार करवाने की बात कही। मंदिर बनाने के प्रयास कई वर्षों से मीटिंगों एवं कागजों तक ही सीमित रहे, लेकिन कभी धरातल पर कार्य शुरू नहीं हो पाया।
देवस्थान विभाग कोटा से ट्रस्ट का पंजीकरण हुआ
रामगंजमंडी श्वेतांबर समाज के वरिष्ठ ट्रस्टी विजयकुमार छाजेड़, सुभाष बापना, राजेंद्र रांका, दिलीप तिल्लानी, सुरेंद्र बापना, कोषाध्यक्ष सुशील गोखरू, सदस्य सुधीर पारख, रवि बापना, गौरव बापना, विनोद डोसी, अक्षत डांगी, यशवंत बापना, अभय बोहरा, दिलीप लोढ़ा, प्रेमचंद छाजेड़, कमल चाहेद, अक्षत डांगी, संदीप मोरावाल, कोमलचंद बोथरा, सुशील चोपड़ा, मोहित छाजेड़ और शैलेंद्र कटारिया ने बताया कि वर्ष 2022 में अध्यक्ष बने राजकुमार पारख का कार्यकाल स्वर्णिम रहा। उनके प्रयासों से राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग कोटा से ट्रस्ट का पंजीकरण हुआ। आयकर विभाग से स्थाई 12 ए मिलना, नीति आयोग भारत सरकार में रजिस्ट्रेशन होना, दादाबाड़ी का आकर्षक नवीनीकरण, साधु साध्वी के ठहरने के उपाश्रय का बेहतर नवीनीकरण, भोजनशाला में टाइल्स एवं कोटा स्टोन लगाने का कार्य और वर्षों से लंबित पड़े मंदिर के निर्माण का कार्य अध्यक्ष राजकुमार पारख की लगन और मेहनत से शुरू हुआ। साथ ही बाहर के बड़े धार्मिक धर्मादा ट्रस्टों से बड़ी सहयोग राशि लाने जैसे कार्य ने समाज को अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़े कर दिया।
मात्र 10 महीनों में पूर्ण होगा मंदिर का निर्माण
श्रीसंघ ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख एवं ट्रस्टी राजेंद्र रांका ने बताया कि 5 जून 2025 को भगवान की प्रतिमाओं का उत्थापन हुआ था। वहीं 5 मार्च को पूरा मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने बताया कि परमात्मा के विराजने का गर्भगृह, रंगमंडप, समवशरण, 42 फिट ऊंचा शिखर और मंदिर परिसर के अंदर की दीवारें मार्बल से बन चुकी हैं। देवी-देवताओं के विराजमान होने के गोखलों का निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं, फरवरी माह में पूरे मंदिर परिसर में फर्श (गलीचे) फ्लोरिंग और सामने की दीवार पर सफेद मकराना मार्बल कार्विंग किया हुआ लगाया जाएगा। इसके बाद मकराना से बन रहा 26 फिट ऊंचा सिंह द्वार भी लगेगा।
प्रतिष्ठा महोत्सव 13, 14 और 15 अप्रैल को
श्रीसंघ ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार पारख ने बताया कि कम समय में भव्य मंदिर का निर्माण होना भगवान की कृपा, दादा गुरुदेव के आशीर्वाद एवं अवंती तीर्थाेद्धारक, युग दिवाकर, मरुधर मणि, खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिन मणिप्रभ सूरीश्वर महाराज की पावन निश्रा है। जिन्होंने अब तक लगभग 300 मंदिरों एवं दादाबाड़ियों की प्रतिष्ठा करवाई है। मणिप्रभ सूरीश्वर महाराजा की निश्रा में इस मंदिर की भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव 13, 14 और 15 अप्रैल को होगा। साथ ही यह प्रतिष्ठा महोत्सव रामगंजमंडी के सकल जैन समाज के मार्गदर्शन में होगा। श्वेतांबर सकल संघ, दिगंबर सकल संघ और रामगंजमंडी के विभिन्न समाजों के प्रतिष्ठित लोगों को साथ में लेकर यह प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया जाएगा।
एक महीने में 750किमी का विहार करेंगे गुरुदेव
रामगंजमंडी के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाने के लिए आचार्य श्री मणिप्रभ सूरीश्वर महाराज जैसलमेर से रामगंजमंडी तक का 750 किमी का उग्र विहार एक महीने में करेंगे। रामगंजमंडी के जैन समाज पर यह उनकी विशेष कृपा दृष्टि को दर्शाता है। प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए श्रीसंघ अध्यक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक, विधायक चंद्रसिंह सिसोदिया, पूर्व कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रमोद जैन भाया को लिखित आमंत्रण दिया है।
हाथ में फ्रैक्चर हो जाने के बाद भी हौसला कायम
शहर के मुख्य बाजार नंबर 3 में स्थापित इस मंदिर के बन रहे स्वरूप को हर व्यक्ति रुक कर निर्माण कार्य को देख रहा है। कार्य की कमान संभाल रहे राजकुमार पारख मंदिर निर्माण के दौरान कार्य करते हुए गिर गए। जिससे से उनका हाथ फ्रैक्चर हो गया, इसके बाद भी मंदिर निर्माण में उनका हौंसला कायम रहा। इतना ही नहीं कोटा के निजी अस्पताल में ऑपरेशन हुआ, लेकिन ऑपरेशन के बाद अगले ही दिन पारख मंदिर निर्माण के कार्य में लग गए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि पारख हार्ट के मरीज हैं एवं उनकी बाईपास सर्जरी हो चुकी है।













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