अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने बारह भावना प्रवचन श्रृंखला में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भावना का अर्थ है मन की कल्पना, खयाल, चिंतन, ध्यान, विचार। व्यक्ति जैसे व्यक्तियों की संगति करता, बैठता, बोलता, सुनता वैसे ही वह मन में कल्पना करता है, विचार करता है और वैसा ही कर बैठता है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। श्री 1008 मुनिसुव्रत नाथ दिगम्बर जैन मंदिर, स्मृति नगर में बारह भावना प्रवचन श्रृंखला के प्रथम दिन भावना का अर्थ बताते हुए आचार्य श्री अभिनंदन सागर महाराज के शिष्य अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि भावना का अर्थ है मन की कल्पना, खयाल, चिंतन, ध्यान, विचार। व्यक्ति जैसे व्यक्तियों की संगति करता, बैठता, बोलता, सुनता वैसे ही वह मन में कल्पना करता है, विचार करता है और वैसा ही कर बैठता है।
धार्मिक भावना करने के लिए संत की संगति, सकारात्मक विचार वाले धार्मिक व्यक्ति की संगति करना जरूरी है, तभी धार्मिक भावना का जन्म होगा। भावनाओं को सुधारने में संगति का बड़ा असर होता है। मुनि श्री ने एक कहानी से माध्यम से संगति का असर बताते हुए कहा कि एक शिकारी ने एक ही तोते के दो बच्चों को अलग-अलग जगह बेच दिया। एक बच्चे को साधु ले गया और दूसरे बच्चे को डाकू ले गया। एक दिन राजा डाकू के वहां गया तो वहां पर जो तोता था, वह राजा को देख करके बोलने लगा, राजा आया है। इसे लूटो, मारो और जो बच्चा आश्रम में साधु के साथ था, वह राजा को देखकर कि बोला आइए, राजा साहब आपका स्वागत है। आप यहां बैठिए। संत कुछ देर में आने वाले हैं।

दूसरे के लिए सोचें सकारात्मक
भावनाओं को धार्मिक बनाने के लिए स्वाध्याय, संत संगति और भगवान की आराधना निरंतर करनी चाहिए। आपके भाव विचार कितने भी सुंदर हों लेकिन अगर आपकी संगति ठीक नहीं है, संगति पापी व्यक्ति से है, गलत व्यक्ति से है तो एक न एक दिन आप के भाव भी उसी प्रकार बन जाएंगे और देखने वाले भी आपको देख यही कहेंगे कि व्यक्ति ठीक नहीं है। आपके प्रति उनकी भी गलत भावनाएं बन जाएंगी। लोहा पानी में डाल दें तो उसे भी जंग लग जाती है और उसी लोहे पर रंग कर दें तो लोहे पर जंग नहीं लगती।

आप के प्रति लोगों की क्या भावना है, इसे ना देखते हुए आपकी दूसरे लोगों के प्रति कैसी भावनाएं हैं, उस पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि उसी के आधार पर आपके भाव, आपके विचार, मन की कल्पनाएं बनेंगी। अगर आप दूसरों के लिए सकारात्मक सोचते हैं तो आपकी भावना, विचार, कल्पानाएं सकारात्मक होंगी और आप दूसरों के बारे में गलत सोचते हैं तो आपकी भावनाएं- विचार भी गलत होंगे। सभा का संचालन ब्रह्मचारी अजय भैया ने किया।













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