इंदौर कांच मंदिर में सोमवार को दिगंबर जैन समाज ने 104वीं बार सामूहिक क्षमावाणी पर्व मनाया। साधु-साध्वी संघ ने क्षमा, सरलता और एकता का संदेश देते हुए समाज को कृतार्थ किया। कार्यक्रम के अंत में कलशाभिषेक हुआ। “क्षमा वह शक्ति है जो कषाय को मिटाकर आत्मा को शुद्ध कर देती है।”
इंदौर। कांच मंदिर परिसर में सोमवार को दिगंबर जैन समाज द्वारा भव्य सामूहिक क्षमावाणी पर्व मनाया गया। यह परंपरा पिछले 104 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। इस वर्ष आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज,आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज,आचार्य श्री विप्रणतसागर जी महाराज,अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज सहित अनेक साधु ,आर्यिका माता जी का सानिध्य रहा ।
आचार्यों और मुनिश्री का संदेश
आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज ने कहा— “क्षमा वीरों का भूषण है, क्षमा वीरों का धर्म है। हमारे तीर्थंकर क्षत्रिय थे, गणधर ब्राह्मण थे और इन्हीं के कारण जैन धर्म की उन्नति संभव हुई। आज धर्म की क्षति हमारे ही मतभेदों के कारण हो रही है। हमें समाज की एकता और तीर्थों की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा।”
अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने प्रेरणादायक प्रवचन में कहा— “जीवन में दो रास्ते हैं— राम का और रावण का। रावण ने भक्ति और साधना तो की, लेकिन कषाय के कारण नरक में गया। जबकि श्रीराम ने पिता की आज्ञा और संयम का पालन कर भगवान बन गए। हमें भी कषाय को बाहर निकालना होगा, तभी जीवन सफल होगा।”
आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज ने कहा— “क्षमा आत्मा का स्वभाव है। हमें हर जीव से क्षमा मांगनी और हर जीव को क्षमा करना चाहिए।”
इस अवसर पर आचार्य श्री विप्रणतसागर जी महाराज और गणिनी आर्यिका श्री यशस्विनी ,आर्यिका श्री सगंममति माताजी ने भी मंगल संदेश दिए।
कार्यक्रम का समापन
सभा के अंत में श्रीजी भगवान का कलशाभिषेक किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु समाजजन उपस्थित रहकर धर्मलाभी बने।
उपस्थित थे
इस अवसर पर श्री सेठ माणकचंद मगनीराम गोठ परिवार से धीरेन्द्र कासलीवाल, अमित कासलीवाल, आदित्य कासलीवाल एवं सामाजिक संसद से राजकुमार पाटोदी, सुशील पंड्या, राजेन्द्र सोनी तथा दिगंबर जैन सोशल ग्रुप से मनोहर झांझरी, सतीश जैन इजालाबाद,संजय पापड़ीवाल,कमलेश कासलीवाल, कुशलराज जैन,और एम.के. जैन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
“क्षमा केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा की साधना और मोक्ष का सच्चा मार्ग है।”













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