कोडरमा के तरुणसागरम तीर्थ पर आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने प्रवचन में कहा कि ठंडा दिमाग और सकारात्मक सोच जीवन की सभी उलझनों को मिटा देती है। उन्होंने समाज में बढ़ रहे पंथवाद और वैमनस्य पर चिंता जताई और सहिष्णुता का संदेश दिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
कोडरमा (झारखंड) के तरुणसागरम तीर्थ पर वर्षायोग के दौरान आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री 108 पियूष सागरजी महाराज ससंघ विराजमान हैं। यहां हो रहे धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला में प्रवचन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जैसे ठंडा पानी और गर्म प्रेस कपड़ों की सलवटें मिटा देते हैं, वैसे ही ठंडा दिमाग और सकारात्मक सोच इंसान की जीवन यात्रा को सहज बना देती है।
उन्होंने कहा कि आज समाज में नफरत, घृणा और वैमनस्य का जहर इतना गहरा हो चुका है कि यह कड़क सर्दी और भीषण गर्मी से भी ज्यादा खतरनाक प्रतीत होता है। मौसम का असर केवल शरीर तक सीमित है, जबकि हमारी सोच का असर पूरे जीवन पर पड़ता है। आचार्य श्री ने दुख जताया कि आज धर्म, पंथ और सम्प्रदाय की आड़ में असली साधना और पूजा-पाठ कहीं पीछे छूट गए हैं, और व्यापारिक प्रवृत्तियां आगे आ रही हैं। उन्होंने कहा कि असली शत्रु कोई बाहरी नहीं, बल्कि हमारा पंथाग्रह, संप्रदायवाद और हटाग्रह है, जो हमें कोल्हू के बैल की तरह एक ही जगह पर घूमाता रहता है। आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि धर्म का मापदंड भेदभाव नहीं, बल्कि आत्मकल्याण होना चाहिए।













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