कहते हैं पेड़ धरा के आभूषण हैं। लेकिन आधुनिकता की चकाचौंध भरी जिंदगी में मनुष्य पर्यावरण का संरक्षण करना भूलता जा रहा है। वन महोत्सव या विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पेड-पौधे लाखों की संख्या में लगाये जाते हैं लेकिन उनका संरक्षण करना भूल जाते हैं। पढ़िए राजीव सिंघाई की रिपोर्ट…
ललितपुर। कहते हैं पेड़ धरा के आभूषण हैं। लेकिन आधुनिकता की चकाचौंध भरी जिंदगी में मनुष्य पर्यावरण का संरक्षण करना भूलता जा रहा है। वन महोत्सव या विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पेड-पौधे लाखों की संख्या में लगाये जाते हैं लेकिन उनका संरक्षण करना भूल जाते हैं। जब तक हम पेड-पौधों का संरक्षण नहीं करेंगे तो पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ता ही चला जाएगा। कोरोनाकाल में मानव ने पर्यावरण संरक्षण की अहमियत को समझा है। आक्सीजन की कमी के चलते लाखों लोगों ने जीवन को समाप्त भी किया है इसलिए वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने के लिए पेड-पौंधों को लगाने के साथ-साथ संरक्षण की भी महती आवश्यकता है। तभी हमें शुद्ध आक्सीजन मिल सकेगी। आक्सीजन की कमी को दूर करने में पेड-पौधों की महती भूमिका होती है जिनमें वट वृक्ष सबसे अधिक आक्सीजन देते हैं। वट वृक्ष को ज्यादा संख्या में लगाकर उनका संरक्षण करें। संरक्षण करके ही प्रकृति की अनुपम धरोहरों को बचाया जा सकता है। परिचर्चा के माध्यम से नौनिहालों ने कहा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखना है तो पौधों को लगाकर हमें उनका संरक्षण करना होगा तभी हम पर्यावरण की सुरक्षा कर पाएंगे।
पौधों का करें संरक्षण – देवांश
देवांश जैन का कहना है कि हम पेड़- पौधे तो हजारों की संख्या में लगा देते हैं लेकिन उनका संरक्षण करना भूल जाते हैं। जब भी हम पेड़-पौधे लगाएं तो उनका संरक्षण करने का संकल्प अवश्य लें। इस भीषण गर्मी में पेड-पौधों के संरक्षण के लिए उन्हें पानी अवश्य दें जिससे धरती खुशहाल बनी रहे। हम मिलजुलकर पौधारोपण करके वर्तमान परिवेश को हरा-भरा रखें।
पौधों की करें सुरक्षा- अनिरुद्ध सोनी
अनिरूद्ध सोनी का कहना है कि आज वर्तमान समय में जंगलों की हो रही अंधाधुंध कटाई के कारण आज हमारा पर्यावरण संतुलन इतना बिगड़ गया है कि हमें शुद्ध हवा व पानी का मिल पाना बडा ही मुश्किल हो गया है। सरकार को जंगलों में हो रही पेड -पौधों की अंधाधुंध कटाई को रोकना होगा।तभी हम पर्यावरण का संरक्षण करने में सफल हो पायेंगे।

पेड-पौधों के संरक्षण का लें संकल्प- रानी
रानी का मानना है कि प्रतिवर्ष सरकार द्वारा वन महोत्सव एवं विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लाखों की संख्या में पेड- पौधों का रोपण किया जाता है। किंतु उन पेड़ पौधों का संरक्षण न हो पाने के कारण पेड़-पौधे समाप्त हो जाते हैं। हमें आवश्यकता है कि हम वन महोत्सव या विश्व पर्यावरण दिवस के दौरान जो भी पेड़-पौधे लगाएं उनके संरक्षण का संकल्प लें और सरकार द्वारा भी पेड़-पौधों का संरक्षण हो तभी हम प्रकृति को हरा-भरा रख पायेंगे।
जन्मदिन पर एक पौधा जरुर लगायें- गौरव तिवारी
गौरव तिवारी का मानना है कि हमारा जीवन पेड़ों पर आश्रित है। सुखी जीवन के लिए हमें वृक्षों की रक्षा करनी चाहिए। यदि हम ऐसा करेंगे तो बहुत सी समस्याओं से निजात पा सकते हैं। प्रदूषण के जहर से मुक्त होकर स्वच्छ जिन्दगी का आनन्द ले सकते हैं। इसलिए हमें पेड़ न काटकर हर साल नयें पौधों को लगाना चाहिए और उनका संरक्षण करना चाहिए।
घर-बाग-बगीचे में लगाएं स्वदेशी पौधे
मातृभूमि की गोद में विदेशी पेड़-पौधे को न रोपकर स्वदेशी पौधे पीपल, बरगद, नीम, तुलसी, घृतकुमारी, आम, शीशम, पलाश, जामुन, सागौन अशोक, अर्जुन, गूलर, शरीफा, वेर, वेल, कदंब, इमली, अमरूद आदि के पौधों को रोपकर इस धरती का श्रृंगार करना चाहिए ताकि हम ग्लोबल वार्मिंग,सूखा, बाढ़, अकाल से बच सकें।













Add Comment