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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का चार्तुमासिक प्रवचन : मोबाइल की लत से बच्चों को बचाइए. केवल भारत भूमि में ही धर्म, धर्मात्मा और तीर्थंकरों का जन्म हुआ


आप लोग रात में स्वप्न देखते हैं जैसा उद्देश्य होता है। उसी के अनुसार सामने दृश्य आ जाता है और जब जागते हैं तो सामने का दृश्य देखना नहीं चाहते फिर हम अपनी आंखों से ना देखकर के आंखों को बंद कर लेते हैं तब चिंतन की धारा होती है। पढ़िए राजीव सिंघाई ,डॉ सुनील जैन संचय की रिपोर्ट…                                              


डोंगरगढ़। आप लोग रात में स्वप्न देखते हैं जैसा उद्देश्य होता है। उसी के अनुसार सामने दृश्य आ जाता है और जब जागते हैं तो सामने का दृश्य देखना नहीं चाहते फिर हम अपनी आंखों से ना देखकर के आंखों को बंद कर लेते हैं तब चिंतन की धारा होती है। उस समय यदि चश्मा लगाया गया हो तो चश्मा को न देखकर के आँखों को बंद कर लेते हैं तो तत्काल आपको महसूस होगा कि किसमें हानि है और किसमें लाभ है। अब नीचे देखने या आँखे बंद करने से लाभ होना प्रारंभ हो जाता है। इन दिनों आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ससंघ चन्द्रगिरी डोंगरगढ़ में विराजमान है। उन्होने अपने प्रवचन में कहा कि प्रायः महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में एक तरफ शुभ और एक तरफ लाभ लिखा जाता है। यह प्रतीक है शुभ का। इसमें शुभ का क्या अर्थ होता है और लाभ का क्या अर्थ होता है ? सांसारिक प्राणी अपने लिए हमेशा शुभ की ओर देखता है, यहां शुभ से आशय अनुकूलता से है और हानि से बचना है और लाभ का अर्थ संसार की अपेक्षा से लक्ष्मी होती है। सरस्वती और लक्ष्मी के द्वारा यह युग (जगत) का संचालन होता है या करते हैं। स्वयं इन दोनों के कारण अनेक प्रकार के विचार और अनेक प्रकार की मांग हमारे दिमाग में पलती रहती है।

इच्छाएं हमारी दृष्टि के ऊपर निर्धारित हैं

इसी दुनिया में रहते हुए भी कई लोग इच्छा पूर्ति न होने से एक प्रकार से अभिशाप मानते हैं। इच्छा होना तो चाहिए किन्तु किस प्रकार की इच्छा होनी चाहिए ? आपको मालूम नहीं महाराज आपको बताना नहीं चाहते | गृहस्थ हो या कोई भी सभी को कोई न कोई इच्छा होती है। भीतर लड़का है घर में या कोई और सदस्य है। उनकी अपनी कोई इच्छा नहीं रहती यदि रहती भी है तो उसे गौण करते मिट जाती है। आप लोग की इच्छा बहुत आत्मीयता के कारण होने से उसकी पूर्ति की जाती है या तो उसकी पूर्ति के लिए और कोई विद्या सीखता है। इच्छायें या आकुलताएं ये सब हमारी दृष्टि के ऊपर निर्धारित है। जब आप अपनी इच्छा के बिना कुछ सोचना चाहे तो उस समय आपका मन नहीं लगता। आप अपनी इच्छा के अनुरूप ही मन को उसी ओर ले जाते हैं जहां आपकी इच्छा पूर्ति होती है।

मन को सरल कर लें तो टेंशन नहीं होगा

आपको जो टेंशन होता है उसका निमित्त मन होता है। यदि हम मन को सरल कर लें तो टेंशन नहीं होगा। आपको यदि टेंशन हो जाता है तो आपकी गोद से लड़का भी खिसक जाता है और दूध पीना बंद कर आपकी आंखों में देखने लग जाता है। बच्चा कहता है मैं तो दूध पी रहा था पर आपको टेंशन में देखा तो मुझे लगा मेरी वजह से तो टेंशन नहीं है इसलिए दूध पीना बंद कर दिया। इसलिए आचार्यों ने यह कहा है कि जिनको टेंशन होता है उनके इंटेंशन को थोडा सा बदलने का प्रयास किया जा सकता है। मेडिटेशन और कोई वस्तु नहीं है केवल इंटेंशन को सही दिशा की ओर ले जाना है।

मन किसी भी वस्तु से चिपके नहीं

आचार्यों ने कहा मन यदि नहीं भी लगता है तो कोई बात नहीं लेकिन मन किसी भी वस्तु से चिपके नहीं। जिस किसी का भी चिंतन करो न भी करो चल जाएगा, इधर – उधर देख भी लो चल जाएगा, इंटेंशन यदि अच्छा है तो सब अच्छा है। ये द्रव्य संग्रह (जैन ग्रन्थ) में लिखा है और आप भी रात -दिन द्रव्य संग्रह (पैसा कमाने) पढ़ते हो। पढ़ते हो का अर्थ है महाराज जिन्होंने द्रव्य संग्रह लिखा उसको पढ़कर हजारों-हजारों मुनि महाराज तिर गए और आपके द्रव्य संग्रह (पैसा कमाने) के कारण उसी में डूब जाते हो। आनंद में नहीं किन्तु दुःख और आकुलता में डूब जाते हो। यदि इंटेंशन ख़राब है तो टेंशन बढेगा। आप कितना भी ध्यान करना चाहो आपका ध्यान आर्त ध्यान और रौद्र ध्यान के अलावा और कुछ नहीं रहेगा। ऐसे आर्त ध्यान और रौद्र ध्यान को बदलना बहुत कठिन है।

बच्चों को मोबाइल ऐसे दिया जैसे महिलाएं कंगन पहनती हैं 

सुन रहे हैं कि विदेशों में कुछ सेंटर खोल रहे हैं जनता की सुविधा के लिए जनता की समस्या को दूर करने के लिए जो मोबाइल की लत पड़ी है। लत समझते हो मोबाइल ने ऐसा लत दे दिया जिससे बचना मुश्किल है। हमारे पास आ जाओगे तो उस सेंटर से भी जल्दी-जल्दी बिना दाम लिए आपको ठीक कर सकते हैं। उनका उद्देश्य है कि बच्चे मोबाइल के दुष्प्रभाव से (लत से ) बच जाएं। अग्नि को हाथ लगाकर देखता है कि हाथ जलता है कि नहीं ऐसा करना आपकी गलती है। बच्चों को इस ढंग से दे दिया जैसे कि सौभाग्यवती महिलाएं कंगन पहनती हैं ऐसे ही उन बच्चों के पास यह मोबाइल लटकता रहता है। सोते समय भी तकिया के नीचे रखकर सोता है। वहां से क्या संपर्क होता है क्या पता ? संभव है स्वप्न में भी मोबाइल चलाता हो। स्वप्न में भी यह आदत ख़राब है कब छुट जाए। अब बाहर (विदेश) के लोग घबरा गए हैं इस मोबाइल के दुष्परिणाम को देखकर। बड़ी – बड़ी कंपनी चलाने वाले सेठ साहूकार हैं उन्होंने मोबाइल का उपयोग आज तक नहीं किया ऐसे सेठ भारत में संभव नहीं हैं, वे विदेश में रहते हैं। उनकी कंपनी के प्रोडक्ट में यदि कोई कमी रहती है या उससे किसी को कोई नुकसान होने की सम्भावना होती है तो वे उसमे स्पष्ट लिखित उल्लेख देते हैं कि इसमें ये सामग्री का प्रयोग किया गया है जिससे ये समस्या हो सकती है एवं इसका उपयोग इस स्थान में प्रतिबंधित है | यदि कोई प्रोडक्ट ख़राब हो जाता है तो उनको कोई चिंता की बात नहीं होती उसे वे भारत में खपा देते हैं। यहां के लोग वहां के डैमेज, रिजेक्टेड और ख़राब प्रोडक्ट को भी इम्पोर्टेड (विलायती) विदेशी प्रोडक्ट के नाम से खरीद लेते हैं। यह भारत की दशा है। जो भी चीज ख़राब हो जाती है यहां पर भेजा जाता है।

मोबाइल गुम गया अब तो हमारा अंत हो जाएगा 

चाहे पढ़े लिखे हो, सेठ, साहूकार हो बैठ जाते हैं। यह सब उल्टा है इसे सुलटाये कैसे ? आगरा भी चले जाओ तो कोई इलाज नहीं है | सुनते हैं भारत में यदि इलाज न हो तो विदेश में हो जाता है | एक व्यक्ति दौड़ता हुआ आया कहता है बहुत बड़ा संकट है महाराज मोबाइल गुम गया। किसी को लत लग गई हो तो उसने सोचा मेरा गुम गया तो इसी को उठा लेता हूं। उससे पूछा क्या था उसमें बताओ तो कहता है सब कुछ उसी में था महाराज, जिन्दगी भी उसी में और अब तो हमारा अंत हो जाएगा। महाराज ऐसा आशीर्वाद दे दो जहां भी जाऊंगा ऊपर वहां मोबाइल न हो। यदि वहाँ पर भी चला जाए तो ध्यान रखना देव भी अवधि ज्ञान का प्रयोग हमेशा नहीं करता है बहुत आवश्यक होता है तभी उपयोग करता है। यदि आपको पाचन शक्ति बढ़ाना है तो पान खाइए लेकिन होशियारी के साथ उसमें चूना और कत्था ज्यादा न लगाइए नहीं तो वह पाचक नहीं आपको ही पका देगा।

बच्चे का विकास केवल हाइट बढ़ जाने से नहीं होता

मात्रा को देखना चाहिए। क्या आप सभी का हित चाहते हो ? बच्चे का विकास केवल हाइट बढ़ जाने से नहीं होता। कई को तो ये नहीं मालूम कि वेट (भार) और स्फूर्ति (एनर्जी) में क्या अंतर है ? मेरा वेट कम हो रहा है लेकिन एनर्जी कम नहीं हो रही है। एक ही में सभी को तौलते चले जा रहे हो सब गड़बड़ है | ऐसे कई लोग हैं जो कहते हैं वजन कम हो रहा है। यह बढ़ता और कम होता रहता है। दवाई खाकर इसे बढ़ाना या कम करना हानिकारक है। प्राकृतिक रूप से होना अलग है। मोटापा दो प्रकार का होता है एक शरीर से मोटा होना और एक पैसा से मोटा होना। अब इतने मोटे हो गए आप लोग कि प्रधानमंत्री को चिंता हो रही है आप लोगों की। ऐसे मोटे हो गए हो कि आठ व्यक्ति भी मिलकर उठा नहीं सकते। क्या करना बताओ ? यह ध्यान रखना आवश्यक है बच्चे जब बाहर पढने जाते हैं तो उन्हें बहुत पैसा देते हो तो वह इसका दुरुपयोग नशीले पदार्थों (ड्रग्स) के सेवन में करते हैं। जिसकी कीमत हज़ार नहीं, लाख नहीं बल्कि करोड़ों में होती है। रईस जो होगा वही इसका सेवन कर सकता है बाकी के तो बस का ही नहीं है। इनकी लत को छुड़ाने के लिये भी सेंटर खोल रहे हैं। सुनते हैं पंजाब स्वतंत्रता के बाद विकास की ओर था और विकसित होकर के गेहूं की अपेक्षा से उसकी उन्नति पूरे भारत में एक नंबर में थी। समृद्ध प्रदेश बन गया था और उनके लोग आबादी के अनुसार बहुत कुछ प्रायः देश की रक्षा के लिए सेना में भी भर्ती होते हैं। आज पंजाब के कुछ स्थान ऐसे है जहां लोग भयानक रोग से पीड़ित हैं। कैंसर जैसे रोग सबसे ज्यादा है। जिसका कारण है कि विदेशी चीजों का प्रयोग करने और खाने पीने से हो रहा है।

नशीले पदार्थों की लत 

बच्चों को विशेष रूप से नशीले पदार्थों के सेवन करने की लत लग चुकी है वे अब उस नशीले पदार्थ के बिना रह नहीं सकते हैं। पैसा भी खर्च नहीं कर सकते क्योंकि उसकी कोई दवाई ही नहीं है। कोई औषध ही नहीं है। वह पागल जैसे हो जाता है जैसे मछली पानी के बिना तड़पती है वैसे ही वो उस नशीले पदार्थ के बिना तड़पता है। इसमें कारण माता – पिता अवश्य है वो लड़का नहीं। अब प्रान्त से प्रांतर नहीं देश से देशांतर तक और अच्छे पढ़े लिखे और पैसे वाले भी अब चलो दुबई। दुबई का अर्थ हम डुबना समझते हैं कहां डुबोगे ? भारत अच्छा नहीं लग रहा अब वे खूब घूम आए। क्या घूम आये ? मन को घुमाओ। सिंगापुर, दुबई, हांगकांग ये क्यों अब अच्छे लग रहे हैं ? देश के प्रति निष्ठा, समर्पण भाव नहीं रहा। यहां पर अनुकूल जो वस्तु है वह किसी देश में नहीं है। यहाँ पर धर्म है, धर्मात्मा है। यहां पर तीर्थंकर का जन्म हुआ। अन्यत्र किसी देश में उत्पन्न नहीं हुए। हमारे तीर्थंकर अयोध्या में उत्पन्न हुए हैं। आज भी इतिहास देख लो लोग सेवा करने के लिए हाथ जोड़कर खड़े होते हैं और अपने आप को धन्य मानते हैं।

दुनिया की दवाएं और उपचार किस काम के हैं ऐसे रोग पैदा कर रहे हैं 

ऐसा यह पवित्र भूमि जहां आपने जन्म लिया है। विशेष विदेश होते हैं मैं मानता हूं ये उसी में होते हैं। लेकिन वहां के लोग भी गाडी में बैठकर आते हैं और गाडी में बैठकर चले जाते हैं। कौन थे कहाँ से आये थे किसी को मालूम नहीं झाड़ू लेकर आते हैं झाड़ू लगाकर पुनः झाड़ू को उसी में रखकर चले जाते हैं। क्या कर रहे हैं पहले घुमने जाते थे कि शुद्ध प्राण वायु मिल जाए, शुद्ध विचार हो जाए, शुद्ध शौच आदि क्रियांएँ हो जाए, स्नान आदि करके आ जाते थे। प्रतिदिन का यह कार्य गांधी जी करते थे और आप लोग क्या कर रहे हो ? माथा ठोक रहे है यहां महाराज आशीर्वाद मिल जाए हमें विश्वास है हमारा लड़का सुधर जाएगा। क्या हो गया ? आंखों में पानी है और वह लड़का भी कहता है महाराज कई बार प्रयास कर चूका हूँ कि यह नशे की लत छुट जाये पर लगता ऐसा है कि प्राण छुटने तक यह मुझसे नहीं छुटेगी। अब क्या करें बताओ ? दुनिया की ये दवाएं और उपचार किस काम के हैं ऐसे रोग पैदा कर रहे हैं। पंजाब में आज धरती जल रही है। विदेशी खाद, विदेशी बीज, विदेशी कीटनाशक दवा, मिटटी की उर्वरता समाप्त होकर जमीन बंजर हो रही है। बंजर समझते हैं न आप जिसको संतान न हो उसको बांझ बोलते हैं और जो धरती अनाज न पैदा करे उस धरती को बंजर धरती बोलते हैं। शासन यह सब जानकार, देखकर कुछ कर नहीं पा रहा है अभी तो वह चुनाव को देख रहा है। चुनाव आवश्यक है लेकिन पांच साल में जो इन कुरीतियों को समाप्त करें ऐसे संकल्प के धनी की आज आवश्यकता है। तब तो भारत का विकास संभव है। केवल स्वतंत्रता से गांधी जी मानते नहीं थे कि भारत स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता तो वह है कि स्वछंदता को समाप्त करके अपनी नीति नहीं, किन्तु नीति हमेशा-हमेशा तारने वाली होती है। आप लोगों ने आज बहुत कडवे शब्द सुने। यदि डायबिटीज है तो कड़वी दवाई आवश्यक है।

आज रविवार है तो सोचा इनका ट्रीटमेंट कर दें

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ के ट्रस्टी सिंघई निशांत जैन (निशु) ने बताया कि आज आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को नवधा भक्ति पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य मीनल दीदी परिवार को प्राप्त हुआ। जिसके लिये चंद्रगिरी ट्रस्ट के अध्यक्ष सेठ सिंघई किशोर जैन, कार्यकारी अध्यक्ष विनोद बडजात्या, सुभाष चन्द जैन, निर्मल जैन, चंद्रकांत जैन, मनोज जैन, सिंघई निखिल जैन (ट्रस्टी), निशांत जैन (सोनू), प्रतिभास्थली के अध्यक्ष प्रकाश जैन (पप्पू भैया), सप्रेम जैन (संयुक्त मंत्री) ने बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं दीं। श्री दिगम्बर जैन चंद्रगिरी अतिशय तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष सेठ सिंघई किशोर जैन ने बताया की क्षेत्र में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की विशेष कृपा एवं आशीर्वाद से अतिशय तीर्थ क्षेत्र चंद्रगिरी मंदिर निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। यहां प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ में कक्षा चौथी से बारहवीं तक सीबीएसई पाठ्यक्रम में विद्यालय संचालित है और इस वर्ष से कक्षा एक से पांचवी तक डे स्कूल भी संचालित हो चुका है। यहाँ गौशाला का भी संचालन किया जा रहा है।

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