भगवान महावीर धर्म स्थल में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से रोजाना ‘धर्म और ज्ञान’ की गंगा बह रही है। इस अवसर पर आचार्य श्री ने धर्मसभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिनको आप अपना मानते हैं वह कोई भी अपना नहीं है। पढ़िए सुनील कुमार सेठी की रिपोर्ट…
गुवाहाटी। स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्म स्थल में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से रोजाना ‘धर्म और ज्ञान’ की गंगा बह रही है। इस अवसर पर आचार्य श्री ने धर्मसभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिनको आप अपना मानते हैं वह कोई भी अपना नहीं है। जैसे शरीर, घर, धन, स्त्री, पुत्र, मित्र और शत्रु इन सभी में हम बहुत आसत हैं। पर यह सभी अन्य तरह के समान वाले हैं, किंतु मोहि प्राणी इन्हें अपना समझता है।

आचार्य श्री कहते हैं आंख खुली तो सपना गया, आंख मीची तो अपना गया, और सांस रुकी तो दफना गया। जहां-जहां मोह है वहां संसार है, परंतु मोह ही सबसे ज्यादा खतरनाक है। इसलिए जीवन में अरमान, मोह, कम होने चाहिए तो जीवन का आनंद ही अलग होगा। क्योंकि मोह की संतान ही राग द्वेष है।इससे पूर्व आज महावीर धर्म स्थल मे अवस्थित चंद्रप्रभु चैत्यालय में श्री जी की शांतिधारा करने का परम सौभाग्य लाडा देवी, वीरेंद्र कुमार-बिना देवी बगड़ा परिवार को प्राप्त हुआ । यह जानकारी समाज के प्रचार प्रसार विभाग के मुख्य संयोजक ओम प्रकाश सेठी एवं सह संयोजक सुनील कुमार सेठी द्वारा दी गई है













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