धर्म कहत सब कोई, धर्म न जाने कोई, मर्म जाने बिना धर्म कहां से होई इस उक्ति से आचार्य विहर्ष सागर महाराज ने आज बात प्रारंभ की। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। धर्म कहत सब कोई, धर्म न जाने कोई, मर्म जाने बिना धर्म कहां से होई इस उक्ति से आचार्य विहर्ष सागर महाराज ने आज बात प्रारंभ की। उन्होंने कहा कि हमें मनुष्य पर्याय अनेकों बार मिल चुकी है, मोक्ष मार्ग में भी हम अनंत बार होकर आ गए। हम मोक्ष भी गए किंतु वापस लौट आए। किंतु भगवान मनुष्य पर्याय में केवल ज्ञान प्राप्त कर मोक्ष गए और वही रह गए।
हम सिद्धों के बीच में भी रहे किंतु हमें सिद्धानुभूति नहीं हुई, इसलिए वापस मनुष्य पर्याय में आ गए। हमने अपने चेतन के बारे में कभी नहीं सोचा, चेतना के बारे में भी नहीं सोचा। मनुष्य को अपनी आत्मा की चिंता ही नहीं है, आत्मा का कल्याण कैसे होगा। यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हम कहां बैठे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि हम किस भाव दशा को लेकर बैठे हैं। भाव सहित मन नहीं होगा तो हम नर्क भी जा सकते हैं। जितनी श्रद्धा से आदमी पाप करता है उतनी श्रद्धा से पुण्य नहीं करता।
जानोगे नहीं तो अनुसरण कैसे करोगे
सम्यक दर्शन आपको मालूम ही नहीं है तो मुक्ति की राह पर कैसे चलोगे। अगर पढ़ोगे नहीं तो जानोगे कैसे और जानोगे नहीं तो अनुसरण कैसे करोगे। हित, मित, प्रिय वचन बोलना धर्म है। शब्द, पत्थर से भी ज्यादा घाव करते हैं, इसलिए कम बोलो मगर अच्छा बोलो। इसके पूर्व मुनि श्री विजयेश सागर जी महाराज ने भी धर्म सभा को संबोधित किया। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी एवं फैडरेशन के अध्यक्ष राकेश विनायका ने बताया कि यह चातुर्मास इंदौर में ऐतिहासिक होगा।
पूरे देश भर से गुरु भक्तों के आने की खबर है। फैडरेशन के मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद कीर्ति स्तम्भ एवं दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फैडरेशन, इंदौर रीजन के संयुक्त तत्वाधान में मोदी जी की नसिया, बड़ा गणपति इंदौर पर आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज ससंघ की चातुर्मास मंगल मय कलश स्थापना के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव भी उत्साह से मनाया जाएगा।
इस चातुर्मास का नाम अनिमेय पावन वर्षा योग होगा। इस चातुर्मास के सह आयोजक दिगंबर जैन पंच लश्करी गोठ, ट्रस्ट रामाशाह मंदिर, इंदौर के योगेन्द्र काला, नीरज मोदी, पारस पांड्या, मनोज काला हैं। आज की धर्म सभा में राजकुमार पाटोदी, राकेश विनायका, सुशील पांड्या, राजेश जैन दद्दू, राजेंद्र सोनी, ऋषभ पाटनी, देवेंद्र सोगानी, रितेश पाटनी के साथ ही सैकड़ों साधर्मी समाज जन उपस्थित थे। प्रारंभ में मंगलाचरण पंडित रमेश चंद बाझल जैन द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन कमल काला ने किया।













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