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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरामय्या, पूर्व प्रधान मंत्री एच डी देवगौड़ा सभी कई मंत्री और पूर्व मंत्री उपस्थित रहेंगे : चारुश्री भट्टारक निषिध पर्वत समाधि मंडप का लोकार्पण 6 दिसंबर को


 परमपूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति पंडिताचार्यवर्य भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी का समाधि मण्डप लोकार्पण समारोह आगामी 6 दिसंबर को श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला में चंद्रगिरि के पास चारुश्री भट्टारक निषिध पर्वत पर होगा। आपके नेतृत्व में 1981, 1993, 2006, 2018 में महामस्तकाभिषेक संपन्न हुए। समाधि मण्डप लोकार्पण समारोह में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरामय्या, पूर्व प्रधान मंत्री एच डी देवगौड़ा सभी कई मंत्री और पूर्व मंत्री उपस्थित रहेंगे। इनके साथ ही श्री दिगम्बर जैन मठ के सभी भट्टारक स्वामी जी , आदिचुंचनगिरी महासंस्थान मठ, श्री पेजावर मठ, श्री सिद्धगंगा मठ और धर्माधिकारी श्री क्षेत्र धर्मस्थल के डॉ डी वीरेन्द्र हेगडे जी का सानिध्य रहेगा। पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा संजय जैन की विशेष रिपोर्ट…


 श्रवणबेलगोला। श्री क्षेत्र श्रवणबेलगोला का दक्षिणाचार्य पीठ के पीठाधीश, चैतन्य चूडामणि, भट्टारक शिरोमणि, स्याद्वाद केसरी, स्वाध्याय सिद्धांत चक्रवर्ति, भट्टारक चिंतामणि, परम जिनधर्मप्रभावक, ध्यान चिंतामणि, विश्वविद्यापुरुष, सर्वविद्वज्जनप्रिय, कल्याण भारती, आध्यात्म चिंतक, धवलत्रय महाग्रंथ कन्नड भाषानुवाद प्रवर्तक, प्राकृत भाषा संरक्षक-प्रसारक, सर्वधर्म समन्वयी, बेलगोला का रोशनी, धर्मतीर्थ संरक्षक, भगवान श्री महावीर शान्ति प्रशस्ति पुरस्कृत प्रातःस्मरणीय परमपूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्ति पंडिताचार्यवर्य भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी का समाधि मण्डप लोकार्पण समारोह आगामी 6 दिसंबर को श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला में चंद्रगिरि के पास चारुश्री भट्टारक निषिध पर्वत पर होगा।

पवित्रतम स्थान है श्रवणबेलगोला

गौरतलब है कि स्वस्तिश्री चारुकीर्ति पंडिताचार्यवर्य भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी श्री क्षेत्र श्रवणबेलागोला त्याग, मैत्री तथा अहिंसा का क्षेत्र है। इस क्षेत्र में लगबग 2300 साल पूर्व से जैन साधु आत्म कल्याणार्थ आकर संल्लेखना पूर्वक समाधि प्राप्त करते आये हैं। अन्तिम श्रुतकेवली श्री भद्रबाहु स्वामी से लेकर प्रातःस्मरणीय प.पू. जगद्गुरु कर्मयोगी स्वतिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी तक समस्त साधुओं से यह क्षेत्र परमपवित्र बना है। गंग वंश के सेनाधिपति चावुण्डराय द्वारा स्थापित भगवान श्री बाहुबली स्वामी की प्रतिमा विश्व शान्ति का संकेत बना हुआ है। गंग वंश से लेकर मैसूरु ओडेयर वंश तक उनके राजाओं की मान्यता प्राप्त कर यह क्षेत्र अभिवृद्धि पाया है। श्री मठ की परंपरानुसार धर्मपीठ में अलंकृत होकर, यहां के धार्मिक, आध्यात्मिक कार्यों को निभाते हुए, आत्मकल्याण के मार्ग पर चलते हुए समाधि प्राप्त भट्टारकों के लिए चारुश्री निषिधि पर्वत पर समाधि मण्डप एवं चरण चिन्ह स्थापित कर संस्मरण किया जाता है ।

उसी परम्परा में 1970 से 2023 तक श्रवणबेलगोला दक्षिणाचार्य पीठ के पीठाधीश पदपर अलंकृत, समस्त भक्तजनों के गुरु, क्षेत्र श्रवणबेलगोला की अभिवृद्धि कर्ता, धवलत्रय महाग्रंथों का अनुवाद, प्रकाशन कर्ता, प्राकृत भाषा के उन्नायक, जनकल्याण चिंतक, गिरि महोत्सव प्रवर्थक, 40 मन्दिरों के जीर्णोद्धार कर्ता, तीर्थ संरक्षक, पंथ रहित सन्त, परमश्रुतभक्त, शिक्षा प्रेमी, उत्तर-दक्षिण भारत जैन समाज के सेतु स्वरूपी, धर्मप्रभावना करते हुए समधि मरण प्राप्त प्रातःस्मरणीय प.पू. जगद्गुरु कर्मयोगी चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी अन्तिम क्रिया विधि को चारुश्री भट्टारक समधि पर्वत पर किया गया है। उसी स्थान पर शिलामय निषिधि मण्डप एवं श्री चरण कमल प्रतिष्ठापित एवं संस्मरण शिलालेख लोकार्पण 6 दिसंबर को प्रातः 9.00 बजे समस्त जैन मठों के भट्टारक वृंद तथा अन्य विभिन्न मठों के स्वामीजीयों के सानिध्य में राजनैतिक गण्यव्यक्ति समस्त भक्त जनों की उपस्थिति में सम्पन्न होने जा रहा हैं।

सभी जैन मठों के भट्टारक रहेंगे मौजूद

इस अवसर पर प.पू. स्वस्तिश्री ललितकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, कार्कळ. प. पू. स्वस्तिश्री भुवनकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, कनकगिरि प.पू. स्वस्तिश्री धवलकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, अरिहंतगिरि प. पू. स्वस्तिश्री भानुकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, कम्बदहल्ली प. पू. स्वस्तिश्री भट्टारक चारुकीर्ति पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, मूडबिद्री प. पू. स्वस्तिश्री लक्ष्मिसेन भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, मेल चित्ताम्बूर प. पू. स्वस्तिश्री धर्मसेन भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, वरूर प.पू. जगद्गुरु स्वस्तिश्री देवेन्द्रकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, होम्बुज प.पू. स्वस्तिश्री भट्टाकलंक भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, सोंदा प. पू. स्वस्तिश्री लक्ष्मिसेन भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, नरसिंहराजपुर प.पू. स्वस्तिश्री वृषभसेन भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, लक्कवल्ली प. पू. स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, नांदणी प.पू. स्वस्तिश्री सिद्धान्तकीर्ति भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, आरतिपुर प. पू. स्वस्तिश्री लक्ष्मिसेन भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, जैन मठ, कोल्हापुर मौजूद रहेंगे। मार्गदर्शन प.पू. जगद्गुरु स्वस्तिश्री अभिनव चारुकीर्ति पंडिताचार्यवर्य भट्टारक पट्टाचार्यवर्य महास्वामीजी, श्री क्षेत्र श्रवणबेलगोला दिगम्बर जैन महासंस्थान मठ का रहेगा।

ये करेंगे लोकार्पण

समस्त जैन मठों के स्वस्तिश्री भट्टारक स्वामीजी तथा विभिन्न मठों के स्वामीजीयों के दिव्य सानिध्य में एवं राजनैतिक गण्यव्यक्तियों के, समस्त भक्तवृंद के उपस्थिति में 6 दिसंबर शुक्रवार प्रातः 9.00 बजे निषिधि मण्डप लोकार्पण, श्री चरण चिन्ह स्थापना, चरणाभिषेक, पुष्पवृष्ठी तथा विनयांजली सभा कार्यक्रम आयोजित है । इस अवसर पर परमपूज्य जगद्गुरु श्री श्री श्री डा. निर्मलानंदनाथ महास्वामीजी, श्री आदिचुंचनगिरि महासंस्थान मठ, परमपूज्य श्री श्री शंभुनाथ स्वामीजी श्री आदिचुंचनगिरि महासंस्थान शाखा मठ, हासन मौजूद रहेंगे। दिव्यसानिध्य परमपूज्य श्री श्री श्री विश्व प्रसन्न तीर्थ श्री पादंगल जी श्रीपेजावर मठ, उडुपी

परमपूज्य श्री श्री श्री सिद्धलिंग महास्वामीजी श्री सिद्धगंगा मठ, तुमकूरु का रहेगा। कार्यक्रम में राजर्षि डा. डी. वीरेन्द्र हेग्गडे जी धर्माधिकारी, श्री क्षेत्र धर्मस्थल उपस्थित रहेंगे। मंडप लोकार्पण सिद्दरामय्या मुख्यमंत्री, कर्नाटक सरकार, एच.डी. देवेगौडा पूर्व प्रधान मंत्री, भारत सरकार, एच. डी. कुमारस्वामी भारी उद्योग और इस्पात मंत्री, भारत सरकार, एम. वीरप्पा मोईली पूर्व मुख्यमंत्री, बेंगलूरु, डी. सुधाकर, योजना एवं सांख्यिक मंत्री, कर्नाटक सरकार, के. एन. राजण्णा सहकार एवं हासन जिला प्रभारी मंत्री, कर्नाटक सरकार, श्रेयस पटेल , लोकसभा के सदस्य, हासन जिला, सि. एन. बालकृष्ण, विधायक, श्रवणबेलगोला करेंगे।

ये होंगे विशेष आमंत्रित

कार्यक्रम में विशेष आमंत्रित सदस्य एच. डी. रेवण्णा जी पूर्व मंत्री एवं विधायक, होलेनरसीपुर, वीरकुमार पाटील पूर्व मंत्री, बेळगांव, संजय पाटील पूर्व विधायक, बेळगांव, अभय पाटील विधायक, बेळगांव, भय चन्द्र जैन पूर्व मंत्री, मूड बद्री, एम. ए. गोपालस्वामी पूर्व विधान परिषद सदस्य, अफ्ताब पाषा अध्यक्ष, ग्राम पंचायत, श्रवणबेलगोला रहेंगे।

स्वामी जी का संक्षिप्त परिचय

हिंदी और संस्कृत साहित्य विशारद, कई भाषाओं के ज्ञाता परम पूज्य स्वामीजी की जीवनयात्रा की ओर दृष्टिनिक्षेप करें तो पाएंगे कि संन्यास से पूर्व उनका नाम रत्नवर्मा था। सही मायने में वह कर्नाटक ही नहीं, समस्त जैन समाज के अनमोल रत्न हैं। जिनके मार्गदर्शन में आज कई संगठन और तीर्थक्षेत्रों का कार्य सुचारु रूप से चला। उनका जन्म 3 मई, 1949 को हुआ और 20 साल बाद 12 दिसंबर, 1969 को उन्होंने संन्यास दीक्षा ग्रहण की। तभी से वह 23 मार्च, 2023 में समाधिमरण तक सतत क्रियाशील रहे। दीक्षा के चार माह बाद ही उन्होंने 19 अप्रैल 1970 को श्रवणबेलगोला मठ की बागडोर संभाल ली। उन्होंने मैसूर से इतिहास में एम.ए., बैंगलोर विद्यापीठ से तत्वज्ञान में एम.ए. जैनागम का विशेष अध्ययन किया। उन्होंने हिंदी साहित्य विशारद और संस्कृत साहित्य विशारद किया। वे कन्नड़, मराठी, संस्कृत, प्राकृत, हिंदी, अंग्रेजी आदि भाषाओं के ज्ञाता थे।

कर दिया श्रीक्षेत्र का कायापलट

परम पूज्य स्वामीजी के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी विकास योजना के कारण ही श्री क्षेत्र का व्यवस्थित ढंग से विकास संभव हो सका है। एक समय यहां के मंदिरों में सुचारू पूजन व्यवस्था तक नहीं थी, साधन कम थे और यात्रियों के ठहरने हेतु सुव्यवस्था भी नहीं थी। स्वामी जी के मठाधिपति बनने के बाद से यहां के विकास ने गति पकड़ी। सबसे पहले उन्होंने मंदिरों में पूजा व्यवस्था बनाई और श्रीक्षेत्र के करीब 40 मंदिरों व आस-पास के कई मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया। जैन मठ के ऊपर 100 वर्ष पुराने त्रिभुवन तिलक पार्श्वनाथ जिनमंदिर का जीर्णोद्धार देखने लायक है। मंदिर में तोड़-फोड़ किए बिना उसके स्वरूप को और पुरातात्विक महत्व को बदले बगैर इतना सुंदर कार्य हुआ है कि देखते ही बनता है। यह कार्य सभी के लिए एक मिसाल है। स्वामीजी के प्रयासों से यहां के सभी मंदिरों में नित्यपूजा की उत्तम व्यवस्था की गई है। यात्रियों को ठहरने, भोजन आदि की भी अब यहां उत्तम व्यवस्था है। साधु-संतों के हेतु अलग से रहने की व्यवस्था है। त्यागी भवन, राजा श्रेयांस भवन आदि में साधुओं के चौके लगाने हेतु भी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसा किसी अन्य तीर्थक्षेत्र में देखने को नहीं मिलता। स्वामी जी देश में ही नहीं, विदेशों में भी जैनधर्म की प्रभावना करते रहे। वे वहां भी धर्मप्रचार हेतु प्रवास कर चुके हैं। अमेरिका, अफ्रीका, इंग्लैंड, बर्मा, थाईलैंड आदि देश जा चुके हैं। वर्ष 1988 में इंग्लैंड के लेस्टर शहर में भगवान बाहुबली की 7 फुट ऊंची प्रतिमा की प्रतिष्ठापना उन्हीं के मार्गदर्शन में हुई थी। फरवरी 2011 में उन्होंने श्री क्षेत्र में एक रत्नत्रय जिन मंदिर बनवाया।

विराट महोत्सवों का सहज आयोजन

गौरतलब है कि वर्ष 1981 के महामस्तकाभिषेक में तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी शामिल हुई थीं, उन्होंने ही स्वामी जी को कर्मयोगी उपाधि प्रदान की थी। यह स्वामी जी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व का ही परिणाम था कि 12 वर्ष के अंतराल पर नियमित रूप से महामस्तकाभिषेक जैसे तीन विराट आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुए हैं। वर्ष 1981, 1993, 2006, 2018 के महामस्तकाभिषेक के बाद स्वामी जी ने क्षेत्र में विकास हेतु नई पहल की। वर्ष 1981 में पहले महामस्तकाभिषेक के पूर्व जनमंगल कलश इसी आयोजन के निमित्त दिल्ली से प्रस्थान कर पूरे देश में घूमता हुआ यहां पहुंचा था, जो आज भी स्मारक स्वरूप स्थापित है। महामस्तकाभिषेक के बाद जैन ज्ञान प्रचारक संघ की स्थापना हुई, जिसके तहत स्कूल-कॉलेज खोले गए। गोम्मटेश्वर जनकल्याण ट्रस्ट की स्थापना हुई और इसमें विभिन्न जनकल्याण के कार्य किए जाते हैं। फिर 1993 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्राकृत एवं रिसर्च सेंटर खुला, जहां पांडुलिपियों ताड़पत्रों के संरक्षण, ग्रंथों के अनुवाद और प्रकाशन आदि कार्यों के लिए कार्य प्रारंभ हुए। इसके बाद चन्द्रगिरि और विंध्यगिरि पर्वतों के महाद्वारों का निर्माण करवाया गया। तीसरे महामस्तकाभिषेक, 2006 के बाद बाहुबली बाल चिकित्सालय खुला। वर्ष 2018 के महामस्तकाभिषेक के अवसर पर समाज को 100 बिस्तर का जनरल अस्पताल और प्राकृत विश्वविद्यालय की सौगात मिली। इस प्रकार क्षेत्र को हर महामस्तकाभिषेक के बाद एक अमूल्य सौगात मिली, जो यहां की विकास यात्रा के मील के पत्थर हैं।

समाज सेवा में सतत् संलग्न रहे कर्मठ स्वामी जी

श्रीक्षेत्र पर जो भी विकास और समाज सेवा के कार्य चल रहे हैं, वे सब स्वामी जी की ही लगन और कर्मठता का प्रतीक हैं। यहां के विभक्त हुए समाज को एकजुट कर उन्होंने जरूरतमंदों के लिए नि:शुल्क चिकित्सालय की भी स्थापना कराई। आस-पास के ग्रामीणों को भी स्वास्थ्य लाभ देने हेतु कई योजनाएं चलाई गई हैं। जिनमें से एक है, मोबाइल चिकित्सालय। यह आस-पास के दस गांवों में नियमित रूप से क्रमवार पहुंचता है और लोगों का उपचार करता है। समय-समय पर नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, नेत्र परीक्षण और दंत चिकित्सा के शिविर लगाए जाते हैं, जिसमें लोगों का नि:शुल्क उपचार होता है। यहां स्वामी जी कई जनकल्याणकारी योजनाएं भी चलाते हैं, जिनमें जैन-जैनेत्तर सभी वर्गों को सहायता दी जाती है। विकलांगों को ट्राइसाइिकल, कैलीपर्स, जयपुर पैर(कृत्रिम पैर) व गृहिणियों को सिलाई मशीन भी नि:शुल्क वितरित की जाती है। यहां आने वाला जरूरतमंद कभी खाली हाथ नहीं लौटता। स्वामीजी समाज कल्याण में भी क्षेत्र को अग्रणी बनाए हुए हैं। लोगों को संगठित करने के लिए विभिन्न आयोजन भी यहां कराए जाते हैं। श्रीक्षेत्र से कन्नड़ गोम्मटवाणी नाम से पाक्षिक समाचार पत्र का प्रकाशन भी हो रहा है।

किया जैन साहित्य को संरक्षित

परम पूज्य स्वामीजी ने जैन साहित्य के प्रचार-प्रसार और उनके संरक्षण के प्रयासों को भी बड़ी रुचि के साथ किया। जैन साहित्य उनकी विद्वत्ता और समर्पित प्रयासों के कारण यहां फल-फूल रहा है। स्वामी जी यहां प्राकृत विश्वविद्यालय खोलने के इच्छुक थे और इसके लिए प्रस्ताव विचाराधीन है। यदि विश्वविद्यालय को मंजूरी मिल जाती है तो यह जैन साहित्य और उसके संवर्धन के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

भट्टारकों का किया मार्गदर्शन

परम पूज्य स्वामी जी से ही दीक्षित करीब 9 भट्टारक अलग-अलग मठों की बागडोर संभाले हुए समाज का मार्गदर्शन कर उन क्षेत्रों के विकास हेतु प्रतिबद्ध हैं।

स्वामीजी के शिष्य…

परम पूज्य कारकल मठ के स्वस्तिश्री ललितकीर्ति भट्टारक स्वामी

परम पूज्य कनकगिरी जैन मठ के स्वस्तिश्री भुवनकीर्ति भट्टारक स्वामी

कम्ब्दहल्ली जैन मठ के परम पूज्य स्वस्तिश्री भानुकीर्ति भट्टारक स्वामी

अर्हतगिरि जैन मठ के परम पूज्य स्वस्तिश्री धवलकीर्ति भट्टारक स्वामी

मूडबद्री जैन मठ के वर्तमान परम पूज्य स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी

हुमचा पद्मावती जैन मठ के परम पूज्य स्वस्तिश्री देवेन्द्रकीर्ति भट्टारक (धर्मकीर्ति) स्वामी

नरसिंहराजपुर (ज्वालामालिणी) मठ के परम पूज्य लक्ष्मीसेन भट्टारक स्वामी जी

सौन्दा मठ के परम पूज्य स्वस्तिश्री भट्टाकलंक भट्टारक स्वामी जी

अरतिपुर के पट्टविचारक क्षुल्लक सिद्धांतकीर्ति स्वामी जी

परम पूज्य स्वस्तिश्री अभिनव चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी श्रवणबेलगोला

साधना, ध्यान, अध्ययन को बनाया जीवन का लक्ष्य

 

दिगंबर जैन समाज की लगभग सभी संस्थाएं स्वामी जी के पास मार्गदर्शन हेतु आती थीं और उन्हीं के अनुसार कार्य करती थीं। बीजापुर सहस्त्रफणी पार्श्वनाथ मंदिर, नल्लुर समवशरण मंदिर, मकुर्ल आदिनाथ मंदिर, शालीग्राम भक्तामर मंदिर, आर्सिकेरी सहस्त्रकूट जिनालय व मायसंद्रा मंदिर के वे गौरव अध्यक्ष थे, जहां के सभी कार्य उन्हीं के मार्गदर्शन में होते रहे। परम पूज्य स्वामी ने 1997 से अपनी चर्या में चातुर्मास चर्या को शामिल किया। सामाजिक कार्यों व मठ के दायित्वों को निभाते हुए आप आध्यात्मिक और आत्मिक साधना को भी पूरा समय देते रहे। प्रतिवर्ष मौन साधना, ध्यान, अध्ययन, स्वाध्याय नियमित तौर पर करते थे। तप और त्याग भी साथ-साथ चलता रहता था। वर्ष 1997 के बाद से उन्होंने गाड़ी का प्रयोग कम किया और 2002 से 2009 तक तो उन्होंने पद विहार ही किया। स्वामी जी के गाड़ी त्याग के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण था। इस दौरान उनके मार्गदर्शन में विद्वानों ने धवला, जयधवला और महाधवला के 40 भागों का कन्नड़ में अनुवाद किया। स्वामी जी ने इन सभी का संपादन किया है। इसमें से 21 का प्रकाशन हो चुका है और बाकी प्रकाशन की प्रक्रिया में है। कार्य पूर्ण होने के बाद भी वह केवल अत्यावश्यक कार्यों के लिए बाहर जाने पर ही गाड़ी का प्रयोग करते थे। अन्यथा यहां तो पदविहार ही करते थे। वर्ष 2001 से फोन पर बात करने का उन्होंने त्याग किया है। इतने व्यस्त कार्यक्रमों और इतनी बड़ी जिम्मेदारियों को निभाने के बावजूद फोन के बिना सभी कार्य सुचारू रूप से चलाना अपने आप में एक विलक्षण गुण है। ऐसे बहुमुखी प्रतिभावान, गुणी और विनम्र भट्टारक जी के ही कारण श्रीक्षेत्र की पहचान आज चहुंओर है। यहां आने वाले अतिथि, यात्री, त्यागी व संत उनकी की गई उत्तम व्यवस्थाओं से अभिभूत होकर प्रसन्नचित्त लौटते हैं। मठाधिपति के पद पर आसीन होकर विनम्रता का भाव लिए यह सहज व्यक्तित्व हर आम और खास के लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहा। विश्व शांति के लिए कार्य करने पर 2017 में कर्नाटक सरकार ने स्वामी जी को महावीर शांति पुरस्कार से नवाजा था। इसके तहत 10 लाख रुपए, प्रशस्ति, शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।

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