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22 वर्षीय युवा बने श्रवणबेलगोला के नए भट्टारक : पट्टाभिषेक के बाद चारुकीर्ति भट्टारक की जयकार के साथ निकली पालकी यात्रा


कर्नाटक राज्य के शिमोगा जिला की सागर तहसील में श्रावक श्रेष्ठी अशोक इन्द्र व अनिता अशोक इन्द्र के घर 26 फरवरी, 2001 को जन्मे ‘आगम इन्द्र’ को पट्टाभिषेक के बाद श्रवणबेलगोला मठ का नया भट्टारक बनाया गया है। इन्हीं के बारे में पढ़िए श्रवणबेलगोला से हाल में लौटे राजेन्द्र जैन ‘महावीर’ की विशेष रिपोर्ट…


श्रवणबेलगोला / सनावद। दिगम्बर जैन धर्म की यश कीर्ति के साथ 1040 वर्ष से विश्व को दिगम्बत्व के साथ अहिंसा से सुख, त्याग से शांति, मैत्री से प्रगति, ध्यान से सिद्धि का संदेश दे रहे गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली स्वामी के श्री क्षेत्र श्रवणबेलगोला को शून्य से शिखर व विश्व तीर्थ के रूप में स्थापित करने वाले ज्ञान सूर्य, जैन एकता के महानायक, अपूर्व वात्सल्य-प्रेम-स्नेह की त्रिवेणी, रत्नत्रय के मार्ग स्नेही, प्राणी मात्र के प्रति सद्भाव रखने वाले अनुपम व्यक्तित्व जन-जन में आस्था-श्रद्धा-विश्वास के उन्नयक परम पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्ति श्री चारुकीर्तिजी महास्वामी के बीते 23 मार्च को हुए महाप्रयाण के बाद हुई शून्यता को कोई नहीं भर सकता, लेकिन उन्हीं की दूरदर्शिता व भविष्य की संभावनाओं के साथ उनकी पारखी नजर से निकले ‘आगम इन्द्र’ को उन्होंने 2 दिसम्बर 2022 के शुभ मुहूर्त में विचार पट्ट क्षुल्लक आगमकीर्ति बनाकर अव्यक्त संदेश दे दिया था कि ये आगमकीर्ति ही भविष्य के चारुकीर्ति होंगे।

 

महाप्रयाण के बाद पट्टाभिषेक

जैन दर्शन में शरीर की असारता से ग्रंथ भरे पड़े है लेकिन ‘शरीर माध्यं खलु धर्म साधनम्’ की बात भी हमने सुनी है। पूज्य स्वामीजी इतनी जल्दी महाप्रयाण कर जाएंगे, यह घटना सभी को स्तब्ध करने वाली थी। उनके महाप्रयाण के बाद 27 मार्च, 2023 को पट्टाभिषेक कार्यक्रम संपन्न हुआ।

 

स्वर्ण पिच्छिका, स्वर्ण पादुका की गई भेंट

27 मार्च को प्रातः 5 बजे विचार पट्ट क्षुल्लकजी के मंगल स्नान के बाद भगवान श्री चंद्रप्रभजी की नव कलशाभिषेक पूजा, समस्त मंदिरों में विशेष पूजा के साथ क्षेत्र की अधिष्ठाता देवी माता कुष्मांडिनी की षोढशोपचार पूजा के बाद पट्टाभिषेक विधि, सिहांसन पूजा हुई। प्रातः 9.21 बजे से वृषभ लग्न में सिंहासनारोहण के साथ पट्टाभिषेक महोत्सव प्रारंभ हुआ। शुभ मुहूर्त में ठीक 9.33 मिनिट पर विचार पट्ट क्षुल्लक श्री आगमकीर्तिजी को उस पट्ट पर विराजित कराया गया, जिस पट्ट पर विगत 54 वर्षों से परम् पूज्य कर्मयोगी जगद्गुरु स्वस्तिश्री चारुकीर्तिजी महास्वामी विराजमान थे। पट्ट पर विराजमान होने के बाद उन्हें परम्परागत मुद्रा (अंगूठी) पहनाई गई। फिर स्वर्ण पिच्छिका, स्वर्ण पादुका आदि भेंट के बाद उनकी पाद पूजा की गई। इसके बाद जय-जयकार के साथ उनकी पालकी यात्रा निकाली गई।

 

12 भट्टारक स्वामी बने पट्टाभिषेक के साक्षी

परम पूज्य जगद्गुरु कर्मयोगी स्वस्तिश्री चारुकीर्तिजी भट्टारक महास्वामी के शिष्यों की एक लंबी परंपरा है। उसी परम्परा के योग्य शिष्य अपने-अपने तीर्थों का समुन्नत विकास कर रहे हैं। पट्टाभिषेक समारोह में स्वस्तिश्री भुवनकीर्तिजी (कनकगिरी), स्वस्तिश्री धवलकीर्तिजी (अरिहंतगिरि), स्वस्तिश्री भानुकीर्तिजी (कम्बदहल्ली), स्वस्तिश्री चारुकीर्ति पंडिताचार्यवर्य (मूडबद्री), स्वस्तिश्री लक्ष्मीसेन (जिनकांची), स्वस्तिश्री धर्मसेनजी (वरुर), स्वस्तिश्री देवेन्द्रकीर्तिजी (हुमचा), स्वस्तिश्री भट्टाकंलकजी (सौन्दा), स्वस्तिश्री लक्ष्मीसेनजी (नरसिंह राजपुर), स्वस्तिश्री वृषभसेनजी (लक्कवल्ली), स्वस्तिश्री जिनसेनजी (नांदिणी), स्वस्तिश्री सिद्धांतकीर्तिजी (आरतीपुरम्), स्वस्तिश्री लक्ष्मीसेनजी (कोल्हापुर) इस भव्य आयोजन के साक्षी बने।

इन्होंने संपूर्ण क्रियाएं संपन्न कराईं। क्षेत्र परिवार के श्री एस.ए.सुदर्शन, पं.नंदकुमारजी शास्त्री भी सहयोगी बने। इस अवसर पर विशेष रूप से मुनिश्री आदिसागरजी महाराज, आर्यिका माताजी, क्षुल्लक प्रमेयसागरजी (तपोभूमि उज्जैन), क्षुल्लक दर्शनकीर्तिजी भी उपस्थित थे।

 

गौरव अभिनंदन सभा में हुआ गुणगान

इस अवसर पर हुए नामकरण में पट्टाभिषेक के बाद विचार पट्ट क्षुल्लक आगमकीर्ति को ‘‘पूज्य जगद्गुरु स्वस्तिश्री चारुकीर्तिजी भट्टारक स्वामी’’ नाम दिया गया। पट्टाभिषेक के बाद चामुण्डराय मण्डप में हुई गौरव अभिनंदन सभा में देशभर से आए श्रावक, श्राविकाओं व अनेकों संस्थाओं के प्रमुखों ने पट्ट पर विराजित स्वामीजी का अभूतपूर्व सम्मान किया। उन्होंने सभी को आशीर्वाद स्वरूप मंत्राक्षत फल भेंट किए।

 

इस अवसर पर धर्मस्थल तीर्थ के जैन गौरव पद्म विभूषण डाॅ.डी.धर्माधिकारी वीरेन्द्र हेगडे़जी का संदेश लेकर आए उनके अनुज सुरेन्द्र हेगड़े, श्रवणबेलगोला विधायक बालकृष्णा, कर्नाटक जैन एसोसिएशन के प्रसन्नैया, पूर्व मंत्री अभयचंद्र (मूडबिद्री), राष्ट्रीय प्राकृत संस्थान के निदेशक प्रो.जयकुमार उपाध्ये, तीर्थक्षेत्र कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सुधीर सिंघई, कटनी, पूर्व महापौर सुरेश पाटील सांगली, विनोद दोडडनवार बेलगांवी, सोशल ग्रुप फेडरेशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष हसमुख जैन गांधी, कर्नाटक तीर्थ क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष विनोद बाकलीवाल मैसूर, भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष अशोक सेठी बेंगलुरु, निहालचंद ठोल्या, विमुक्त जैन, वाय.के.जैन, सोनिया-अजय जैन, आशा जैन, विकास-शालू जैन, अजय पाटनी, जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व जैन गजट के सह संपादक राजेन्द्र जैन महावीर, प्रमुख ट्रस्टी अशोककुमार एच.पी. व शांतिसागर फाउण्डेशन के पदाधिकारी, गोम्मटवाणी के संपादक अशोक कुमार श्रवणबेलगोला, बाहुबली विद्यापीठ के पूर्व निदेशक जीवंधर होतपेटे, प्रो.शुभचंद्र मैसूर, श्रवणबेलगोला समाज अध्यक्ष पद्मकुमार, जिनेन्द्रवाणी के संपादक शांतिनाथ होतपेटे उपस्थित थे। संचालन वृषभदास शास्त्री व राजेश शास्त्री श्रवणबेलगोला ने किया।

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