इंदौर नगर के विभिन्न जैन मंदिरों में भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर चंदन षष्ठी व्रत का आयोजन आचार्य विशद सागर जी के सानिध्य में हुआ, जिसमें अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने चंद्रप्रभु भगवान का अभिषेक, पूजन एवं मंडल विधान किया। पढ़िए राजेश पंचोलिया की खास रिपोर्ट…
इंदौर नगर के विभिन्न जैन मंदिरों में भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर चंदन षष्ठी व्रत का आयोजन आचार्य विशद सागर जी के सानिध्य में बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। श्री आदिनाथ चेत्यालय में महेंद्र टी. विशाल जैन के अनुसार सनत, राजेश पंचोलिया, संगीता, आरती, आशा, चेतना सहित अनेक श्रद्धालुओं ने उपवास कर श्री जी का अभिषेक और पूजन किया।
अजय जैन के अनुसार सुदामानगर जैन मंदिर में भी यह विधान आचार्य विशद सागर जी के सानिध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री विशाल सागर जी, मुनि श्री विश्वाक्षर सागर जी, मुनि श्री विभोर सागर जी, मुनि श्री विलक्ष्य सागर जी, मुनि श्री विपिन सागर जी, आर्यिका भक्ति भारती जी और क्षुल्लिका वात्सल्य भारती जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। आचार्य संघ वर्तमान में इंदौर में वर्ष 2025 का वर्षायोग कर रहा है और प्रतिदिन प्रवचन व धार्मिक गतिविधियां हो रही हैं।
प्रवचन में पौराणिक कथा का उल्लेख
आचार्य विशद सागर जी ने प्रवचन में चंदन षष्ठी व्रत का महत्व बताते हुए एक पौराणिक कथा का उल्लेख किया। कथा में बताया गया कि रजस्वला अवस्था में एक श्राविका ने झूठ बोलकर दिगंबर साधु को आहार दिया, जिससे वह और उसका पति कुष्ठ रोग से ग्रस्त हो गए। मुनिराज ने रोग का कारण और उपचार बताया तथा आगम अनुसार छह वर्षों तक व्रत पालन करने से दोनों स्वस्थ हुए। पति ने मुनि दीक्षा और पत्नी ने आर्यिका दीक्षा लेकर अपनी आयु पूर्ण की और पुनः मानव जन्म में मोक्ष मार्ग पर अग्रसर हुए। इस कारण यह व्रत देशभर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।













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