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महोत्सव : पंचकल्याणक में मनाया गया बालक आदिकुमार के जन्म का उत्सव 


आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का 1008 श्रीमज्जिनेंद्र पंचकल्याणक महोत्सव में बालक आदिकुमार का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर विशाल जुलूस निकाला गया और कई कार्यक्रम हुए। पढ़िए राजीव सिघई की एक रिपोर्ट… 


टीकमगढ़। शहर की नंदीश्वर कॉलोनी स्थित आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का 1008 श्रीमज्जिनेंद्र पंचकल्याणक महोत्सव शहर के सबसे बड़े ढोगा मैदान में चल रहा है। तीसरे दिन सोमवार को प्रातः 6:00 मंगलाष्टक श्रीजी का अभिषेक, पूजन एवं शांति धारा संपन्न हुई। पांचवें चरण का सौभाग्य गुलाब दाऊ एवं बालचंद अनुपम जैन को प्राप्त हुआ। आहार दान का सौभाग्य राजेश जैन, संजीव बड़कुल परिवार को प्राप्त हुआ । इसके बाद सुबह 7:48 बजे बालक आदिकुमार का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। अनेक प्रकार के वाद्य यंत्र बजाए गए। माता मरु देवी की कोख से बालक आदिकुमार का जन्म हुआ तो अयोध्या नगरी को सजाया गया। घर-घर दीप जलाए गए और मिठाइयां बांटी गईं। कार्यक्रम के मीडिया संयोजक प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि बालक आदिकुमार को सर्वप्रथम सौधर्म की पत्नी शचि इंद्राणी माता मरूदेवी के पास से उठा ले आती हैं और उस बालक की जगह मायावी बालक को माता के पास लिटा आती हैं। शचि इंद्राणी सर्वप्रथम बालक आदिकुमार के दर्शन करती हैं। इसके उपरांत सौधर्म बालक आदिकुमार को 1008 नेत्रों से निहारते हैं। इसके बाद सौधर्म इंद्र बालक आदिकुमार को सुमेरु पर्वत पर ले जाकर छीर सागर से 1008 कलश भर के प्रथम जन्म अभिषेक करते हैं। सभी इंद्र बालक आदिकुमार का अभिषेक करते हैं। रत्नों की बारिश होती है और कुबेर अपना खजाना खोल देते हैं।

भगवान में नहीं है कोई अंतर

इस अवसर पर मुनि श्री निर्यापक सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान को सभी लोग मानते हैं। संसार में ऐसा कोई देश नहीं है, ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जो भगवान को ना मानता हो। भगवान में अंतर नहीं आ रहा है, भगवान के स्वरूप में अंतर आ रहा है। मुनिश्री ने कहा कि गुरु को सभी मानते हैं। किसी भी धर्म का हो, किसी भी संप्रदाय का हो, किसी भी जाति का हो, सभी लोग अपने अपने गुरुओं को मानते हैं। लेकिन गुरु के स्वरूप में अंतर आ जाता है। सुबह 10:00 बजे बालक आदिकुमार के जन्म की खुशी में संपूर्ण अयोध्या ढोगा नगरी से शहर के प्रमुख मार्गों से जन्म अभिषेक का जुलूस निकाला गया। सबसे आगे डीजे, उसके बाद जबलपुर महिला मंडल, इसके बाद नंदीश्वर महिला मंडल, त्रिशला महिला मंडल, आदिनाथ महिला मंडल, विमर्श महिला मंडल, महावीर जिनालय महिला मंडल, इसके पीछे कुबेर महाराजा अपने हाथी पर सवार होकर जुलूस में चल रहे थे। इनके पीछे सौधर्म इंद्र एवं शचि इंद्राणी हाथी पर सवार होकर चल रहे थे। इनके हाथ में बालक आदिकुमार थे। दोपहर 1:00 जुलूस वापस कार्यक्रम स्थल पहुंचा, जहां बालक आदिकुमार का हजारों लोगों के द्वारा जन्म अभिषेक किया गया।

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