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 क्रोध ना आना उत्तम क्षमा : भगवान का पंचामृत अभिषेक, पूजन, पाठ कर क्षमा धर्म मनाया


महापर्व पर्युषण के पहले दिन रविवार को उत्तम क्षमा धर्म मनाया गया। इस दौरान अनुयायियों ने पूरी श्रद्धा के साथ भूगर्भ से अवतरित चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक, पूजन, पाठ कर क्षमा धर्म मनाया। पढ़िए यह रिपोर्ट…


पलवल। महापर्व पर्युषण के पहले दिन रविवार को उत्तम क्षमा धर्म मनाया गया। इस दौरान अनुयायियों ने पूरी श्रद्धा के साथ भूगर्भ से अवतरित चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक, पूजन, पाठ कर क्षमा धर्म मनाया। इस अवसर पर शासन रक्षक देवी पद्मावती जी और क्षेत्रपाल बाबा का चोला भी चढ़ाया गया । श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पार्श्व पद्मावती धाम पलवल में दिव्य तपस्वी वात्सल्य सम्राट राष्ट्र संत, पलवल तीर्थ उपसर्ग निवारक आचार्य भगवंत श्री सुंदरसागर जी के आशीर्वाद से सभी धर्मप्रेमी बंधुओं बड़े ही धूमधाम के साथ प्रक्षाल व भक्ति के साथ पूजा आराधना की। इस मौके पर तीर्थ क्षेत्र के व्यस्थापक नितिन जैन ने कहा कि प्रतिकूल निमित्त मिलने पर प्रतिकार की सामर्थ्य होते हुए भी क्रोध ना आना उत्तम क्षमा है।

क्षमा वीरस्य भूषणन अर्थात् क्षमा धर्म वीर पुरुष का भूषण है, जिनके पास क्षमारूपी शास्त्र है, उनका शत्रु क्या कर सकता है। इससे दुश्मन को जीतने में देर नहीं लगती और क्षमावान् हमेशा सुखी रहता है। क्षमा वाले पुरुष का संसार में कोई भी शत्रु नहीं है। क्रोधी मनुष्य पर कोई भी विश्वास नहीं करता।

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