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मुनिश्री साध्य सागर जी का 8 वां संयम दीक्षा महोत्सव मनाया: श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा की 


जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उभर सकता है। इन पंक्तियों को जीवन में धारण कर अपने मोक्ष के पथ को प्रशस्त कर ज्ञान रूपी प्रकाश को फैलाने का का कार्य मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज कर रहे हैं। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…


सनावद। जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उभर सकता है। इन पंक्तियों को जीवन में धारण कर अपने मोक्ष के पथ को प्रशस्त कर ज्ञान रूपी प्रकाश को फैलाने का का कार्य मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज कर रहे हैं। समाज प्रवक्ता सन्मति जैन काका ने बताया कि तप एवं त्याग की नगरी कहे जाने वाले नगर में चातुर्मासरत मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज का आठवां संयम दीक्षा महोत्सव समाजजनों ने बड़े भक्ति भाव एवं हर्षाेल्लास से मनाया। कार्यक्रम की इस मंगल बेला में सर्व प्रथम श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा की गई। मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के मुखारबिंद से उच्चारित शांतिधारा करने का शौभाग्य अशोक परीन कुमार विभव पंचोलिया परिवार को प्राप्त हुआ। शांति सागर वर्धमान देशना निलय में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत त्रय आचार्यों के चित्र के समक्ष बाहर से पधारे सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर की। मंगलाचरण संगीता पाटोदी ने किया। अगली कड़ी में मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के गृहस्थ अवस्था की माता राजुल बाई एवं भाई गौरव भैया का समाजजनों ने शॉल श्रीफल एवं वस्त्र भेंटकर सम्मान किया। युगल मुनिराज के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेट करने का शौभाग्य बाहर से पधारे अतिथियों एवं सभी समाजजनों को प्राप्त हुआ। इसी कड़ी में मुनि श्री के गृहस्थ अवस्था के भाई गौरव भैया ने मुनि श्री के प्रति अपनी विनयांजलि दी एवं मुनि श्री के बचपन से दीक्षा तक के संस्मरण सुनाए। अगले क्रम में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का पूजन सभी समाजजनांे ने अर्घ्य चढ़ाकर बड़े भक्ति भाव से किया। यह प्रक्रिया संगीता पाटोदी एवं प्रशांत चौधरी ने संपन्न करवाई।

आचार्यश्री विशुद्धसागर जी से 2017 में प्राप्त की दीक्षा 

इस अवसर पर मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने गुरु के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हुए कहा कि ऐसे गुरुवर जिन्होंने हमें मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ाया, जो युवा पीढ़ी भटक रही थी जिन्हें रास्ता नहीं मिल रहा था। ऐसे आचार्य विशुद्ध सागर जी की छत्रछाया पाकर कई युवाओं ने जैनेश्वरी दीक्षा ली और 6 अक्टूबर 2017 के दिन इंदौर में मुझे भी जैनेश्वरी दीक्षा प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि आचार्य भगवंत कहते है जिसके अंदर का गुरु जाग जाता है ना उसे परिवार वालों को डराना पड़ता है और ना समाज वालों को वो दीक्षा लेकर निकल जाता है। आज आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की जन्म नगरी में हमारा आठवां दीक्षा दिवस मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने भी संबोधित 

मुनि श्री ने कहा कि जब भी हमारा समाधि काल हो, बस जीवन का अंत हो मेरे समाने निर्गनत हो। इसी भावना के लिए मुनि दीक्षा मनाते हैं। यही दीक्षा दिवस है, जो संयम की अनुमोदना कर रहे, वीतरागियों की निर्ग्रंथोंकी अनुमोदना कर रहे हैं कि हम भी ऐसे तप के धारी बनें। हम भी ऐसे चरित्र के धारी बनंे और हम भी ऐसे विशेष व्यक्तित्व के धारी बने कि हममें नगर नहीं पूरा तीन लोक अनुमोदना करें। इसी अवसर पर मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने भी अपनी वाणी से सभी को संबोधित किया। इस पावन मंगलमय अवसर पर भोपाल, सीहोर, आष्टा, इंदौर, उज्जैन, बुरहानपुर, बड़वाह, सनावद सहित अनेक शहरों से पधारे भक्त और समाजजन उपस्थित थे। प्रभावना वितरण की गई। संचालन अनुभव सराफ ने किया।

जीवन परिचय 

जैसा कि ज्ञात है की मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज का दीक्षा के पूर्व का नाम शिवम् था। आप के पिता का नाम जयकुमार जैन, माताजी का नाम राजुल बाई जैन। आप का जन्म 3 दिसंबर 1987 को उज्जैन नगर में हुआ था। आपकी लौकिक शिक्षा 12 वीं तक हुई है। आप ने ब्रह्मचर्य व्रत 2010 में उज्जैन में लिया था। आप की मुनि दीक्षा 6 अक्टूबर 2017को आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के कर कमलों से इंदौर में हुई थी।

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