आचार्यश्री विहर्ष सागरजी का आचार्य पदारोहण दिवस आदिब्रह्मा आदिनाथ फाउंडेशन के तत्वावधान में सन्मति धाम में धूमधाम से मनाया गया। भींडर से पढ़िए, यह खबर…
भींडर। आचार्यश्री विहर्ष सागरजी का आचार्य पदारोहण दिवस आदिब्रह्मा आदिनाथ फाउंडेशन के तत्वावधान में
सन्मति धाम में धूमधाम से मनाया गया। आचार्यश्री विहर्ष सागर जी महाराज, मुनिश्री विजयेश सागरजी, ऐलकश्री नमनहर्ष सागरजी, आर्यिका विजेताश्री माताजी, आर्यिका मौलीहर्ष माताजी के सानिध्य में भींडर ब्लॉक के गैर सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों का सम्मेलन रखा गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में विकास जैन इंदौर और रमेश सोनी कूंथवास, महेंद्र स्वर्णकार ने दीप प्रज्वलित किया। मंगलाचरण वर्षारानी जैन और रेखा चौबीसा ने किया। आर्यिका मौलीहर्ष माताजी ने संगीतमय भक्ति आराधना के साथ अष्टद्रव्य से गुरु पूजन करवाया।
बच्चों को गलत और सही की सीख देने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका
आचार्यश्री विहर्ष सागर जी महाराज ने कहा कि भारत देश को आजाद करने के लिए जिन महापुरुषों ने अपना बलिदान दिया। आज भी उनको याद किया जाता है। वैसे ही शिक्षकगणों को चाहिए कि वह पूर्ण जिम्मेदारी के साथ बच्चों को लौकिक शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देते हुए सदैव लक्ष्य के प्रति प्रेरित करते रहें ताकि जैसे आज महापुरुषों को याद किया जाता है वैसे शिक्षा ग्रहण करने वाला बालक भी अपने शिक्षक को भविष्य में अपना आदर्श मानकर याद करे। इस मोबाइल युग में बच्चों को गलत और सही की सीख देने में शिक्षकों को महत्वपूर्ण भूमिका अदा करनी चाहिए। तभी बालक घर, परिवार और राष्ट्र के लिए एक अच्छा व्यक्तित्व बन पाएगा।
शिक्षकों को प्रतीक चिन्ह, डायरी पेन देकर सम्मानित किया
मुनि श्री विजयेश सागरजी महाराज ने दिगंबर जैन संतों की कठिन तपस्या के बारे में विस्तृत प्रवचन किया।
कार्यक्रम के दौरान भींडर एवं आसपास के गांवों में संचालित गैर सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों का तिलक, उपरणा, प्रतीक चिन्ह, डायरी पेन देकर सम्मानित किया गया। संस्था निदेशक अनिल स्वर्णकार ने कहा कि शिक्षक सम्मान समारोह न केवल शिक्षकों के लिए एक प्रोत्साहन है, बल्कि यह समाज में शिक्षा और शिक्षकों के महत्व को भी रेखांकित करता है।
पाद प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की
धर्मसभा में आचार्य विहर्षसागरजी महाराज का पाद प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। समारोह में स्कूल शिक्षा परिवार ब्लॉक भिंडर अध्यक्ष कुशाल सिंह शक्तावत मांगीलाल सालवी, इंद्रदास वैष्णव, कैलाश शर्मा सहित विभिन्न स्कूलों के शिक्षक गण मौजूद थे। संचालन अनिल स्वर्णकार ने किया।













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