हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के आचार्य शांतिसागर सभागार में आगरा दिगम्बर जैन परिषद के तत्वावधान में संस्कार प्रणेता आचार्य श्री सौरभसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में सात दिवसीय आध्यात्मिक ज्ञान शिक्षण शिविर का आयोजन चल रहा है। आचार्य श्री ने 300 शिविरार्थियों को छहढाला ग्रन्थ के 3 काव्य का स्वाध्याय कराया। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट…
आगरा। हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के आचार्य शांतिसागर सभागार में आगरा दिगम्बर जैन परिषद के तत्वावधान में संस्कार प्रणेता आचार्य श्री सौरभसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में सात दिवसीय आध्यात्मिक ज्ञान शिक्षण शिविर का आयोजन चल रहा है। इसमें दूसरे दिन का शुभारंभ मंगलाचरण शशि सेठी के निर्देशन में मोतीकटरा पाठशाला के बच्चों ने किया एवं दीपप्रज्वलन विमलेश मारसन्स, जगदीश जैन, सुनील जैन ने किया।

इसके बाद आचार्य श्री ने 300 शिविरार्थियों को छहढाला ग्रन्थ के 3 काव्य का स्वाध्याय कराया। छहढाला शिविर में आचार्य श्री ने कहा कि जैन होना सरल है लेकिन जैनी होना कठिन, जैन तो जन्म से हो सकते हैं, लेकिन जैनी होने के लिए जीवन में कुछ परिवर्तन जैसे समस्त व्यसनों का त्याग, नित्य देव दर्शन आदि आवश्यक है। आज इन्सान अनादि काल से मोह रूपी शराब के नशे मे डूब अपने निज स्वरूप को भूला हुआ है। उन्होंने मर्यादित जीवन जीने की सलाह देते हुए कहा कि जो प्रसंग वर्तमान को आनन्दित करे और भविष्य को निन्दित करे, वह कभी न करें, जैसे हो सकता है कि शराब और जूआ लेते वक्त तो आनन्द आ रहा हो परन्तु इतिहास गवाह है कि जब फल भोगने की बारी आती है तो भारी लोक निन्दा होती है।

हर रविवार को संत डे मनाना चाहिए। इस अवसर पर सभी भक्तों ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल अर्पण किया। मंच का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया। इस मौके पर जगदीश प्रसाद जैन, अनंत जैन, सुनील जैन ठेकेदार, अनंत जैन, सुभाष जैन, सतीश जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, सन्तोष जैन, कान्ता जैन, सुशीला जैन सहित समस्त आगरा, दिल्ली, गाजियाबाद के सकल जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।













Add Comment