तीर्थंकरों की जयंती नहीं, जन्मकल्याणक मनाए जाते हैं। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के युवा प्रकोष्ठ प्रवक्ता राजेश जैन दद्दू ने आह्वान किया है कि इसी को ध्यान में रखते हुए महावीर स्वामी की भी जयंती नहीं, बल्कि जन्म कल्याणक मनाना चाहिए।
इंदौर। चैत्र शुक्ल त्रयोदशी यानी 3 अप्रैल को हम सब महावीर जयंती नहीं मनाएंगे, हम तो मनाएंगे महावीर जन्मकल्याणक और आप भी मनाएं। आप में से बहुत सोच सकते हैं कि कितनी अजीबोगरीब बात कर रहे हैं। वर्षों से चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को जैन समाज ही नहीं, अहिंसा और जियो और जीने दो को मानने वाला हर व्यक्ति महावीर जयंती मनाता रहा है। और साल के कैलेंडर में सरकार द्वारा महावीर जयंती का ही एक पर्व है जिस पर अवकाश दिया जाता है।
लेकिन क्या हम इसमें सही बदलाव नहीं कर सकते? यह बात मानते हैं कि महापुरुषों की जयंती मनाई जाती है, मनाई जाती थी और मनाई जाती रहेंगी लेकिन यह भी हमें ध्यान रखना होगा, विशेषकर जैन समुदाय को कि तीर्थंकरों की जयंती नहीं, कल्याणक मनाये जाते हैं। केवल तीर्थंकरों के ही कल्याणक होते हैं और प्रत्येक के पांच कल्याणक। गर्भ कल्याणक , जन्म कल्याणक, तप कल्याणक, ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक ।
इसलिए 2621वें जन्म कल्याणक पर, महावीर स्वामी की जयंती नहीं, जन्म कल्याणक कहिए और उसी रूप में मनाइए, जिससे जैन और जैनेतर, दोनों समुदाय को मालूम चल सके कि यह कोई साधारण दिवस नहीं, एक महापुरुष का नहीं, तीर्थंकर के जन्म का पर्व मनाने का अवसर है। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के युवा प्रकोष्ठ प्रवक्ता राजेश जैन दद्दू ने समाज से आह्वान किया है कि अपने अपने ट्रस्ट, संगठन, मंडल सभी अपने माध्यम से सरकार को पत्र लिखकर जयंती नहीं महावीर जन्मकल्याणक करवाएं।













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