भारत के संक्रमण काल में राजस्थान के जैन संतों ने देश के जीवन को सदा उच्च बनाए रख। यहां की संस्कृति और साहित्य को विनाश होने से बचाया। ऐसे ही संतों की श्रेणी...
Category - राजस्थान के संत
राजस्थान में आलोच्य समय में 1450 से 1750 तक सैकड़ों जैन संत हुए। जिन्होंने अपने महान व्यक्तित्व से देश, समाज और साहित्य की सेवा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। यहां...
राजस्थान की धरती पर जैन संतों ने अपनी विद्वता, साहित्य धर्मिता निभाकर जन-जन को आंदोलित किया। धर्म और साहित्य के दम पर जैन धर्म की नींव को मजबूत करने के लिए...
राजस्थान के जैन संतों में भट्टारक नरेंद्रकीर्ति जी का अलग ही स्थान है। इन्होंने अमूल्य साहित्य का सृजन किया और हिन्दी साहित्य का ग्रंथ संग्रहालय में संरक्षित...
राजस्थान के जैन संत व्यक्तित्व एवं कृतिव के क्रम में भट्टारक शुभचंद्र (द्वितीय) के बारे में अद्भुत जानकारी संकलित हैं। इनका समय 1723 से 1749 तक माना गया है। ये...
राजस्थान की धरती पर जैन संतों ने तत्समय जो हिन्दी साहित्य के माध्यम से धर्म प्रभावना, प्रभु भक्ति के साथ गुरु भक्ति का संदेश दिया है। उनमें से एक संत...
राजस्थान के जैन संतों की श्रंखला में अनेकोनेक संत हुए, लेकिन अपने गुरु के प्रति निष्ठावान शिष्य बिरले ही नजर आए। जिन्होंने जन साधारण के लिए साहित्य तो...
राजस्थान के जैन संतों ने जहां अपनी साधुता से जन-जन में आध्यात्मिक चेतना से जनजागरण किया। वहीं उनकी साहित्य साधना ने हिन्दी साहित्य को उस समय खूब समृद्ध किया।...
राजस्थान को जैन संतों की भूमि के रूप में ख्याति अर्जित है। प्राचीन काल में भी यहां कई दिव्य संतों का जन्म और भ्रमण हुआ है। संत श्री कुमुदचंद्र जी ऐसे ही संत...
राजस्थान के जैन संतों ने जहां अपनी साधना से जनमानस को धर्म और आध्यात्म की ओर प्रेरित किया। वहीं मुनियों, साधुओं ने हिन्दी साहित्य में काव्य और भक्ति पदों के...








