Category - राजस्थान के संत

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 20 मुनिश्री महनंदी की रचनाओं में भाषा उच्चकोटि की और शुद्ध और सुपाठ्य भी: कवि ने छोटे-छोटे दोहों में सुंदर भावों को भरा है

भारत के संक्रमण काल में राजस्थान के जैन संतों ने देश के जीवन को सदा उच्च बनाए रख। यहां की संस्कृति और साहित्य को विनाश होने से बचाया। ऐसे ही संतों की श्रेणी...

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राजस्थान के जैन संत 19 भट्टारक जगतकीर्ति ने साहित्य और प्रतिष्ठाओं के माध्यम से अलख जगाई: इनकी विद्वत्ता के चलते कई श्रावक बने अनुयायी

राजस्थान में आलोच्य समय में 1450 से 1750 तक सैकड़ों जैन संत हुए। जिन्होंने अपने महान व्यक्तित्व से देश, समाज और साहित्य की सेवा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। यहां...

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राजस्थान के जैन संत 18 भट्टारक सुरेंद्रकीर्तिजी के काल में आमेर शास्त्र भंडार की प्रगति रही शानदार: पूरे राजस्थान पर अपना प्रभाव स्थापित किया

राजस्थान की धरती पर जैन संतों ने अपनी विद्वता, साहित्य धर्मिता निभाकर जन-जन को आंदोलित किया। धर्म और साहित्य के दम पर जैन धर्म की नींव को मजबूत करने के लिए...

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राजस्थान के जैन संत 17 भट्टारक नरेंद्रकीर्ति जी ने अमूल्य साहित्य का सृजन और संरक्षण किया: राजस्थान की धरती पर बड़ी तादाद में रचा गया हिन्दी साहित्य

राजस्थान के जैन संतों में भट्टारक नरेंद्रकीर्ति जी का अलग ही स्थान है। इन्होंने अमूल्य साहित्य का सृजन किया और हिन्दी साहित्य का ग्रंथ संग्रहालय में संरक्षित...

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राजस्थान के जैन संत 16 भट्टारक शुभचंद्र (द्वितीय) का जैन समाज के नैतिक, सामाजिक, राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान: इनकी कृतियां साहित्य रसिकता पर पर्याप्त रोशनी डालने वाली हैं

राजस्थान के जैन संत व्यक्तित्व एवं कृतिव के क्रम में भट्टारक शुभचंद्र (द्वितीय) के बारे में अद्भुत जानकारी संकलित हैं। इनका समय 1723 से 1749 तक माना गया है। ये...

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राजस्थान के जैन संत 15 आचार्य श्री चंद्रकीर्ति की रचनाओं में गुरु वंदना का प्रभाव: भट्टारक रत्नकीर्ति जी से दीक्षित थे आचार्य श्री चंद्रकीर्ति जी

राजस्थान की धरती पर जैन संतों ने तत्समय जो हिन्दी साहित्य के माध्यम से धर्म प्रभावना, प्रभु भक्ति के साथ गुरु भक्ति का संदेश दिया है। उनमें से एक संत...

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राजस्थान के जैन संत 14 ब्रह्म श्री जयसागर जी ने गुरु वंदना को साहित्य का आधार बनाया: राजस्थान के जैन संतों में है अनुपम स्थान

राजस्थान के जैन संतों की श्रंखला में अनेकोनेक संत हुए, लेकिन अपने गुरु के प्रति निष्ठावान शिष्य बिरले ही नजर आए। जिन्होंने जन साधारण के लिए साहित्य तो...

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राजस्थान के जैन संत 13 भट्टारक श्री अभयचंद्र आध्यात्मिक जादूगर बन गए: काव्य वैभव और सौष्ठव प्रयुक्त होने की अपेक्षा प्रचार का लक्ष्य अधिक था

राजस्थान के जैन संतों ने जहां अपनी साधुता से जन-जन में आध्यात्मिक चेतना से जनजागरण किया। वहीं उनकी साहित्य साधना ने हिन्दी साहित्य को उस समय खूब समृद्ध किया।...

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राजस्थान के जैन संत 12 बारडोली के संत श्री कुमुदचंद्र जी का साहित्य को अमूल्य योगदान: उनकी गुजरात और राजस्थान में अच्छी प्रतिष्ठा थी

राजस्थान को जैन संतों की भूमि के रूप में ख्याति अर्जित है। प्राचीन काल में भी यहां कई दिव्य संतों का जन्म और भ्रमण हुआ है। संत श्री कुमुदचंद्र जी ऐसे ही संत...

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राजस्थान के जैन संत 11 आध्यात्म और भक्तिपरक पदों के रचियता भट्टारक श्री रत्नकीर्ति जी: रचनाएं भाषा, भाव और शैली सभी दृष्टियों से श्रेष्ठ

राजस्थान के जैन संतों ने जहां अपनी साधना से जनमानस को धर्म और आध्यात्म की ओर प्रेरित किया। वहीं मुनियों, साधुओं ने हिन्दी साहित्य में काव्य और भक्ति पदों के...

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