सागवाड़ा के श्री विमलनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में 93 वर्षीय भूरी देवी खोडनिया ने आर्यिका दीक्षा ग्रहण कर समाधिमरण प्राप्त किया। दीक्षा के बाद आर्यिका विचित्राश्री माताजी ने यम सल्लेखना स्वीकार की और दोपहर में समाधि पाई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सागवाड़ा, राजस्थान के पुनर्वास कॉलोनी स्थित श्री विमलनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में गुरुवार को एक अनूठा धार्मिक अवसर साक्षी बना। यहां 93 वर्षीय भूरी देवी खोडनिया, धर्मपत्नी श्री रतनलाल खोडनिया ने पूज्या आर्यिका विकाम्याश्री माताजी के करकमलों से आर्यिका दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा के साथ ही उन्हें आर्यिका विचित्राश्री माताजी नाम प्रदान किया गया।
समारोह में अनेक श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। दीक्षा के समय मंत्रोच्चारण के बीच केश लोचन की विधि सम्पन्न हुई। परिवारजनों में पुत्र बदामीलाल, नरेन्द्र, संतोष और दिनेश खोडनिया ने माता के करकमलों से पिच्छी-कमंडल अर्पित कर तपोमार्ग में प्रवेश की अनुमोदना की।
दीक्षा के तुरन्त बाद आर्यिका विचित्राश्री माताजी ने चारों प्रकार के आहार का त्याग कर यम सल्लेखना ग्रहण की और दोपहर 3:30 बजे समाधिमरण प्राप्त किया।
पालकी में विराजित कर शोभायात्रा निकाली
समाज के प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ने बताया कि समाधिस्थ आर्यिका माताजी की पार्थिव देह को पालकी में विराजित कर नगर शोभायात्रा के रूप में नर्सरी मोड, मसानिया तालाब होते हुए छोटी नसिया तक लाया गया। वहां शुद्धिकरण विधि के बाद विधिवत अग्नि संस्कार सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और जिन शासन की जयकारा लगाकर अनुमोदना की।













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