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अद्भुत है भियादान्त, जानिए इस तीर्थ की सुंदरता के बारे में: अनजाने जैन तीर्थ स्थलों के विकास के लिए आगे आएं समाजजन


चंदेरी में चौबीसी मंदिर में स्थित एक बोर्ड पर निकटवर्ती जैन तीर्थ के नाम लिखे गए हैं, जिनकी कोई विशेष पहचान नही है। यह क्षेत्र वीरान हैं, घने वन में हैं, जाने के कोई मार्ग नहीं है। वहां कोई नहीं जाता है। आज हम इन्ही में से एक जैन गुफा मंदिर, भियादान्त (भीमसेन केव जैन मंदिर) के बारे में जानेंगे। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…


चंदेरी। मध्यप्रदेश में चंदेरी से केवल 24 किमी दूर उर्वशी नदी के तट पर एक जैन गुफा है, जहां भगवान आदिनाथ जी की विशालकाय प्रतिमा पहाड़ पर ही उकेरी गई है। चंदेरी में चौबीसी मंदिर में स्थित एक बोर्ड पर निकटवर्ती जैन तीर्थ के नाम लिखे गए हैं, जिनकी कोई विशेष पहचान नही है, जैसे की ममोन, भियादान्त, आमनचार, गुरिल्ला पहाड़, बिठला बूढ़ी चंदेरी आदि । इन तीर्थ के बारे में पता करने पर जानकारी मिली कि यह क्षेत्र वीरान हैं, घने वन में हैं, जाने के कोई मार्ग नहीं है। इन स्थानों पर कुछ प्राचीन जैन अवशेष हैं लेकिन उनके बारे में अधिक जानकारी नहीं है। वहां कोई नहीं जाता है। आज हम इन्ही में से एक जैन गुफा मंदिर, भियादान्त (भीमसेन केव जैन मंदिर) के बारे में जानेंगे ।


इस क्षेत्र के बारे में सरकारी पुरातत्व विभाग के पास पर्याप्त जानकारी है। यहां के आसपास जितनी भी जैन प्रतिमाएं प्राप्त होती हैं, वह चंदेरी संग्रहालय में लाई जाती रही हैं जिनमे लगभग सभी प्रतिमाएं हजारों वर्ष पुरानी हैं। आज से लगभग 163 वर्ष पूर्व कुछ अंग्रेज यहां पहुंचे थे, जिसका जिक्र व फोटो इत्यादि 1860 ईसवी में उनकी लिखी एक पुस्तक में मिलता है, जिनसे एक दो स्थानो के बारे में ये पता चलता था कि वहां सबसे खास क्या है – जैसे कि भीमकाय जैन तीर्थंकर प्रतिमा इत्यादि । इसके कारण ही इन गुफाओं को भीमसेन गुफा कहा जाने लगा ।

मध्यप्रदेश की सरकारी वेबसाइट पर इस जगह का नाम भीमसेन से संबोधित किया गया है। तथ्यों से पता चलता है कि भीमसेन गुफा और भियादान्त दोनों एक ही स्थान है । इस लेख के साथ आप यहां की अद्भुत प्रतिमा जी के दर्शन व इस स्थान की सुंदरता और अद्वितीयता को महसूस कर सकते हैं। चूंकि यह स्थान तीर्थ क्षेत्र थूबोन जी, चंदेरी और, खंदारगिरी से बिल्कुल नजदीक है, अतः इन तीर्थ कमेटियों को भियादान्त स्थान के विकास के लिए अवश्य आगे आना चाहिए। यहां पहुंचने के लिए 8 किमी कच्चा मार्ग है, जिसे व्यवस्थित करके जैन समाज व तीर्थ यात्रियों को इस तीर्थ से जोड़ा जा सकता है। अभी इस स्थान पर ठहरने व भोजन आदि, किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था नही है । यहां सिर्फ अपने वाहन से पहुंचा जा सकता है । एक बार इस पावन अतिशय तीर्थक्षेत्र के दर्शन अवश्य करें।

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