संपूर्ण दिगंबर जैन समाज के लिए एक सिरमौर संस्था बनकर तीर्थ क्षेत्र के प्रति समर्पित ‘भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी-मुंबई’ एक ऐसी संस्था है, जिसकी स्थापना 22 अक्टूबर सन् 1902 में हुई। तब से लेकर अब तक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए यह संस्था विभिन्न कार्यकालों में विभिन्न अध्यक्षों व पदाधिकारियों के नेतृत्व से होकर 125 वें वर्ष के पायदान पर कदम रख रही है। इस बारे में शिकोहपुर से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह रिपोर्ट…
सिद्धांत तीर्थ, शिकोहपुर (गुड़गांव)। संपूर्ण दिगंबर जैन समाज के लिए एक सिरमौर संस्था बनकर तीर्थ क्षेत्र के प्रति समर्पित ‘भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी-मुंबई’ एक ऐसी संस्था है, जिसकी स्थापना 22 अक्टूबर सन् 1902 में हुई। तब से लेकर अब तक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए यह संस्था विभिन्न कार्यकालों में विभिन्न अध्यक्षों व पदाधिकारियों के नेतृत्व से होकर 125 वें वर्ष के पायदान पर कदम रख रही है। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने बताया कि हम सब जानते हैं कि हमारे अस्तित्व का मूल आधार हमारी प्राचीन विरासत ही होती है। अब चाहे हम अपने परिवार, वंश, समाज, परम्परा, गुरु, तीर्थ या अन्य कोई भी विषय को दृष्टिगत करें, सभी पृष्ठभूमि में हमारी प्राचीनता ही मूल आधार के रूप में हमें नजर आती है। ठीक इसी प्रकार वर्तमान में यदि जैन समाज, धर्म या संस्कृति की बात करें, तो इनके पीछे भी हमारी प्राचीन विरासत ही हमारी ढाल बनकर हमारा संरक्षण करती है और हमें आगे बढ़ाती है। अब इस बात का चिंतन करें कि यदि हमारे पास हमारी प्राचीन धरोहर, परम्परा, मान्यताएं अथवा वंशावली आदि न हो तो क्या हम आज के अस्तित्व को प्राचीन सिद्ध कर पाएंगे? नहीं, ऐसा हम कदाचित नहीं कर पाएंगे तो इसके लिए हमें अपनी प्राचीनता को बचाए रखना और भविष्य के लिए वर्तमान को बचाए रखना जरूरी होता है।
तीर्थक्षेत्र कमेटी हमेशा बांध बनकर खड़ी है
अब यदि हमनें आज अपनी प्राचीनता को सहेज कर रखा है तो इसके पीछे अपने पूर्वजों के बड़े योगदान, समर्पण, बलिदान से सबकुछ संभव हुआ है। जिसके कारण आज हमें सिर उठाकर सीना तानकर गर्व से जैनत्व के प्रति गौरवान्वित होने का अवसर प्राप्त हुआ है। अब वो पूर्वज कौन हैं, जिन्होंने ये सब कार्य किए हैं। इस पर यदि हम वर्तमान परिवेश में विचार करें तो आज हम सबके लिए ‘भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी’ एक लोह स्तंभ बनकर विगत 125 वर्षों से खड़ी है। जिसके अहर्निश प्रयासों से कार्यकलापों से आज हम सब अपने तीर्थक्षेत्र के प्रति एक दायित्व निभाते हुए संरक्षण, संवर्धन और विकास का कार्य कर पा रहे हैं। आज भी जिन तीर्थक्षेत्र पर विवाद की स्थितियां हैं। उन सबके संरक्षण के लिए तीर्थक्षेत्र कमेटी सर्वप्रथम आकर देश व्यापी समर्पण के साथ कार्य करती है। सम्मेदशिखर जी का विवाद हो, गिरनार का हो, शिरपुर का हो अथवा अन्य कोई भी विवादों के घेरे में हमारे तीर्थ घिरे हों, तो उनके समक्ष तीर्थक्षेत्र कमेटी हमेशा से एक ऐसा बांध बनकर खड़ी रहती है कि जिसके अस्तित्व को कोई पराजित नहीं कर पाता है। ये ठीक उसी प्रकार है, जैसे भीषण आंधी और तूफान में एक नाव के लिए नाविक और पतवार उसको अडिग बनाये रखने में सफल होते हैं। आज भी अनेक ऐसी स्थितियां हैं, जब न्याय से नहीं अपितु साम-दाम-दड-भेद से हमें अथवा हमारे तीर्थों को पीछे करने के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन तीर्थक्षेत्र कमेटी हर संभव अपने दायित्वों को निभाकर किसी के गलत मंसूबों को कामयाब नहीं होने देती है।
समितियों के माध्यम से व्यापक दायरा बनाती है कमेटी
ऐसी तीर्थक्षेत्र कमेटी जहां तीर्थों के संरक्षण में अपना अहर्निश योगदान दे रही है, वहीं इस तीर्थक्षेत्र कमेटी के द्वारा सभी प्रांतीय तीर्थक्षेत्रों के लिए योग्य अनुदान भी दिए जा रहे हैं, जिससे कि हमारे तीर्थक्षेत्र पर होने वाले विकास कार्यों में पुष्प ना हो तो पत्ती के समान ही तीर्थक्षेत्र कमेटी हमेशा विकास को प्रोत्साहित करती रहे। वर्तमान में जहां केंद्रीय कमेटी का कार्यालय मुंबई में है, वहीं यह तीर्थक्षेत्र कमेटी सम्पूर्ण देश में 9 अंचलीय समितियों के माध्यम से अपने कार्य का व्यापक दायरा बनाती है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश-उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, पूर्वांचल, तमिलनाडु, कर्नाटक, दिल्ली-पंजाब-हरियाणा-जम्बू, ये 9 प्रादेशिक स्तर पर वर्तमान में तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा प्रत्येक प्रदेश को 20-20 लाख रुपए की राशि अनुदान स्वरूप देकर वहां के तीर्थक्षेत्र के रख-रखाव, संरक्षण, विकास अथवा अन्य व्यवस्थाओं के लिए अपना कदम आगे बढ़ाया है।
कमेटी की बैठक में देशभर से आए समाजजन
हाल ही में 22 जून को तीर्थक्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी परिषद की बैठक सिद्धांत तीर्थ, शिकोहपुर (गुड़गांव) में हुई, जिसमें यह निर्णय लेकर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पूर्वांचल, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु जैसे प्रदेशों के विभिन्न तीर्थों पर विकास कार्य किए जाने को मूर्तरूप दिया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष जंबू प्रसाद जैन गाजियाबाद की अध्यक्षता में संपन्न इस मीटिंग में वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप जैन पीएनसी आगरा, संजय पापड़ीवाल औरंगाबाद, महामंत्री संतोष जैन पेंढारी नागपुर, कोषाध्यक्ष अशोक जैन दोशी मुंबई, मंत्री हंसमुख जैन गांधी इंदौर, मंत्री डॉ. जीवनप्रकाश जैन हस्तिनापुर तथा प्रांतीय पदाधिकारियों में उत्तरप्रदेश उत्तराखंड अध्यक्ष जवाहरलाल जैन सिकंदराबाद, मध्यप्रदेश अध्यक्ष डीके जैन इंदौर, महामंत्री राजकुमार घाटे इंदौर, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष प्रद्युम्नकुमार जैन दिल्ली, तमिलनाडु अध्यक्ष संजय जैन ठोलिया व साथ में दनेश सेठी तथा कमेटी के मुख्य प्रबंधक उमानाथ दुबे आदि मौजूद रहे।
22 अक्टूबर 2026 से शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष मनाएंगे
इस प्रकार भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी अपने विकास एवं तीर्थ संरक्षण के एजेंडा के साथ आगामी 22 अक्टूबर 2026 से 21 अक्टूबर 2027 तक 125 वें स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर ‘शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष’ भी मना रही है। यह समारोह जम्बू स्वामी दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र, चौरासी (मथुरा) उप्र से शुभारंभ होगा। आशा है तीर्थक्षेत्र कमेटी अपने सवा सौ वर्षीय इस कार्यकाल का इतिहास समाज के समक्ष अनेक उपलब्धियों के साथ रखते हुए पुनः आगामी शतक के लिए पूर्ण जोश-उत्साह एवं सकारात्मक ऊर्जा लिए कदम दर कदम उन्नति के साथ जैन धर्म, समाज और संस्कृति के प्रति सदैव समर्पित रहेगी। शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष के आयोजन के लिए समाज के जवाहरलाल जैन-सिकंदराबाद को इस कमेटी का चेयरमेन बनाया गया है। हम सबका दायित्व है कि हम तन-मन-धन से उनका सहयोग कर इसको सफल बनाने में अपनी महती भूमिका निभाएं।













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