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धरियावद के भंवरलाल सरिया 9 मार्च को धारण करेंगे जैनेश्वरी दीक्षाः पिता ने भी ली थी मुनि दीक्षा


धरियावद निवासी भंवरलाल सरिया आगामी 9 मार्च, रविवार को श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभागार में श्री वर्धमान सागरजी के सिद्धहस्त करकमलों से भव्य जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर आत्म-कल्याण हेतु वैराग्य पथ पर अग्रसर होंगे। वैराग्य पथ पर अग्रसर होने की पुण्य प्रेरणा श्री पुण्य सागरजी एवं श्री हितेंद्र सागरजी से प्राप्त हुई और श्री वर्धमान सागरजी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। पढ़िए धरियावद से अशोक कुमार जेतावत की यह पूरी खबर…


धरियावद। धर्मनगरी धरियावद निवासी भंवरलाल सरिया उम्र 76 वर्ष आगामी 9 मार्च, रविवार को श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर सभागार में वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागरजी के सिद्धहस्त कर कमलों से भव्य जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर आत्म-कल्याण हेतु वैराग्य पथ पर अग्रसर होंगे। भंवरलालजी सरिया को वैराग्य पथ पर अग्रसर होने की पुण्य प्रेरणा प्रज्ञा श्रमण श्री पुण्य सागर जी एवं श्री हितेंद्र सागरजी से प्राप्त हुई और आचार्य श्री वर्धमान सागरजी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

जीवन परिचय, लौकिक शिक्षा एवं विवाह  

भंवरलाल 7 जुलाई 1949 को पिता झमकलालजी सरिया, माता साकर बाई की कुक्षि से जन्मे अपने माता-पिता की चौथी संतान हैं। कनकमलजी, प्रेम बाईजी, पारसमलजी, भंवरलालजी, गंभीरमलजी सहित कुल चार भाई और एक बहन परिवार में रहे हैं। आपने 10वीं कक्षा तक लौकिक शिक्षा ग्रहण की है। आपका सन 1969 में प्रतापगढ़ निवासी धर्म सहायिका शकुंतला देवी से विवाह हुआ। गृहस्थ जीवन में आपके एक पुत्र गजेंद्र तथा दो पुत्रियां नीलम और सोना हैं। पुत्र गजेंद्र, पुत्रवधु कैलाश देवी और चार पौत्रियां कोमल, दिव्या, खुशी एवं आस्था हैं।

पिता ने भी ली थी मुनि दीक्षा

भंवरलालजी सरिया के गृहस्थ पिता झमकलालजी ने दिगंबर जैन आचार्यश्री सुपार्श्व सागरजी महाराज से धरियावद में क्षुल्लक और फिर ऐलक दीक्षा धारण की थी। इसके बाद परसाद में मुनि दीक्षा ग्रहण करते हुए उदय सागर महाराज नाम धारण किया, 8 माह के अंतराल में ही उन्होंने चावंड में सन् 1980 में समाधिमरण प्राप्त किया था।

दिनचर्चा एवं व्यवसाय

नियमित देवदर्शन, अभिषेक-पूजन, नगर में दिगंबर जैन मुनि-आर्यिका संघ आने पर घर पर चौका लगाना, आहार दान देना, संघ की नियमित वैयावृति, नगर के सभी जिनालयों के नियमित दर्शन करना, आपकी नियमित दिनचर्या में शामिल है। उन्होंने व्यवसाय में कपड़ा कारोबार को अपनाया।

नियम, व्रत ग्रहण

आपने वैसे अभी तक कोई विशेष व्रत-नियम ग्रहण नहीं किया, लेकिन जब 10वीं कक्षा में अध्ययनरत थे, तभी से मुनि संघ की प्रेरणा से रात्रि भोजन का और 1977 से चाय पीने का आजीवन त्याग रहा है।

दीक्षा लेने वाले 14वें पुण्यात्मा होंगे

भंवरलालजी सरिया धर्म नगरी, धरियावद से जैनेश्वरी दीक्षा लेने वाले 14वें पुण्यात्मा होंगे। इनसे पहले अभी तक ज्ञात 13 नगर गौरव मुनि या आर्यिका दीक्षा ले चुके हैं। जो इस प्रकार है-श्री सुधर्म सागरजी (समाधिस्थ), श्री उदय सागरजी (समाधिस्थ), श्री समाधि सागरजी (समाधिस्थ), श्री प्रवेश सागरजी (समाधिस्थ), श्री श्रेयस सागरजी (समाधिस्थ), श्री वत्सलमति माताजी, आर्यिका श्री श्रेयमति माताजी (समाधिस्थ), श्री उदित सागरजी, आर्यिका श्री उत्साह मति माताजी, श्री पद्म कीर्ति सागरजी (समाधिस्थ), श्री मुमुक्षु सागरजी, आर्यिका श्री योगीमति माताजी (समाधिस्थ) और आर्यिका श्री प्रेक्षामति माताजी।

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