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48 पुण्यार्जक परिवारों सहित समाजजनों ने की सहभागिता : 48 मांडनों से रचाया गया भक्तामर मंडल विधान 


ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए सनावद में विराजित परम पूज्य उच्चारणाचार्य श्री विनम्रसागर जी महामुनिराज के 23वें गुरु उपकार दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन आचार्य संघ के सान्निध्य में आचार्य शांतिसागर वर्धमान देशना निलय में भक्तामर मंडल विधान संपन्न हुआ। पढ़िए सन्मति जैन काका की विशेष रिपोर्ट…


सनावद। ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए सनावद में विराजित परम पूज्य उच्चारणाचार्य श्री विनम्रसागर जी महामुनिराज के 23वें गुरु उपकार दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के दूसरे दिन आचार्य संघ के सान्निध्य में आचार्य शांतिसागर वर्धमान देशना निलय में भक्तामर मंडल विधान संपन्न हुआ। इस अवसर पर 48 पुण्यार्जक परिवारों ने 48 मांडने सजाकर भक्तिभाव से सहभागिता की।

विशेष आयोजन की झलकियां:

कार्यक्रम की शुरुआत श्रीजी को बड़े मंदिर से लाकर पांडुशिला पर विराजमान कराने और जलाभिषेक से हुई। इस अवसर पर शांतिधारा का सौभाग्य इंदौर के श्रीमती सरिता सलभ कुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ।

 

विधान के पूर्व पात्र चयन:

सौधर्म इंद्र: संगीता-महेन्द्रकुमार पाटोदी परिवार

कुबेर इंद्र: नीतू-प्रशांत जैन परिवार

अन्य इंद्र पात्र: निकिता-वैभव सराफ, पूर्णिमा-तपन जैन, निधि-आशीष झांझरी और राजेश हीरो परिवार

भावविभोर कर देने वाली भक्ति

आचार्य श्री विनम्रसागर जी ने विधान के सभी अर्घों का अर्थ बताते हुए उनका महत्व समझाया। साथ ही संगीतकार सम्यक जैन (इंदौर) द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों ने सभी को भावविभोर कर दिया।

देशना और प्रेरणापुंज विचार

आचार्य श्री ने मंगलदेशना से पूर्व पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट का सौभाग्य रवीन्द्र कुमार-प्रवीण कुमार (विवेक जैन परिवार) और सलित कुमार-प्रफुल्ल कुमार परिवार को प्रदान किया। अपनी देशना में आचार्य श्री ने कहा कि आज जो बीज हम बो रहे हैं, उसका फल कल अवश्य मिलेगा। जिस प्रकार वृक्ष तत्काल फल नहीं देता, लेकिन समय पर मीठे फल देता है, वैसे ही भक्तामर विधान का फल निश्चित रूप से मिलेगा। भक्तामर स्तोत्र भावनाओं का अद्भुत संगम है, जब ये भाव जीवन में उतरेंगे तो जीवन सफल और सार्थक बन जाएगा। साधु-संतों का समागम जब भी मिले, उसे कभी गंवाना नहीं चाहिए। उन्होंने भक्तामर के प्रत्येक श्लोक की सूक्ष्म व्याख्या कर उसका गूढ़ अर्थ बताया।

रात्रिकालीन आराधना और सेवा

सभी समाजजनों द्वारा रात्रि में पार्श्वनाथ बढ़ाजे मंदिर में भक्तामर दीप आराधना सम्पन्न की गई।

आर्यिका तपस्विनी माताजी के 99वें जन्मदिवस पर विशेष आहारदान

इस पावन अवसर पर आर्यिका तपस्विनी माताजी के 99वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में सुरेशकुमार-खुशकवरबाई पंड्या (अमर ज्योति बस परिवार, सनावद) ने सम्पूर्ण आचार्य संघ को आहारदान कर पुण्य अर्जित किया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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