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अंतर्मुखी श्री मुनि पूज्य सागर महाराज का रहेगा सानिध्य : भक्तामर महामंडल विधान और ज्योतिष आधारित सर्वतोभद्र विधान का होगा आयोजन


दिगंबर जैन समाज पारसोला की ओर से अंतर्मुखी श्री मुनि पूज्य सागर महाराज, आर्यिका प्रसन्न मति माता जी और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में भक्तामर महामंडल विधान और ज्योतिष आधारित सर्वतोभद्र विधान का आयोजन किया जा रहा है। यह विधान 15 अप्रैल से 21 अप्रैल तक चलेगी। विधान में 51 जोड़े पूजन करेंगे। पढ़िए यह विस्तृत रिपोर्ट…


पारसोला। दिगंबर जैन समाज पारसोला की ओर से अंतर्मुखी श्री मुनि पूज्य सागर महाराज, आर्यिका प्रसन्न मति माता जी और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में भक्तामर महामंडल विधान और ज्योतिष आधारित सर्वतोभद्र विधान का आयोजन किया जा रहा है। यह विधान 15 अप्रैल से 21 अप्रैल तक चलेगी। विधान में 51 जोड़े पूजन करेंगे। इन सात दिनों 2688 अर्घ्य मंडप पर चढ़ाए जाएंगे। भक्तामर विधान में भगवान आदिनाथ की आराधना की गई है। आचार्य मानतुंग द्वारा रचित भक्तामर में कुल 48 काव्य हैं। विधान के दौरान प्रत्येक काव्य के 56 -56 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। विधान में प्रत्येक दिन सौधर्म बनाए जाएंगे। शाम को दीपक से भक्तामर आराधना और आरती कार्यक्रम होंगे। इसके अलावा प्रतिदिन मुनि श्री के प्रवचन भी होंगे।

15 तारीख को होंगे ये कार्यक्रम

नांदी मंगल स्नान, जिन आज्ञा, शास्त्र आज्ञा, गुरु आज्ञा. आचार्य निमंत्रण विधि, घटयात्रा, कलश यात्रा, अंकुरारोपण के लिए मिट्टी लाना, झंडारोहण और मंडप उद्घाटन, कलश स्थापना, दीप प्रज्वलन, चित्र अनावरण-पट्ट खोलना, दिगबंधन-पद्मवती क्षेत्रपाल पूजा, सकलीकरण, जिन बिम्ब एवं यंत्र जी लाना, अभिषेक विधि, नित्य पूजा विधान प्रारंभ कार्यक्रम होंगे।

प्रतिदिन होगा विधान का पूजन

15 अप्रैल से 21 अप्रैल तक प्रतिदिन सुबह 5 बजे से विधान की पूजन, अभिषेक आदि कार्यक्रम होंगे।

21 अप्रैल को होगा विशेष अनुष्ठान 

अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज के सानिध्य में 21 अप्रैल, 2023 को अनुष्ठान किया जा रहा है। यह अनुष्ठान ज्योतिष के आधार पर 12 राशि, 27 नक्षत्र, 9 ग्रहों के आधार पर होगा। इस अवसर पर विशेष हवन और पूजन भी होगा।

-आप की कुंडली में यह दोष हो तो?

– जिन धर्मावलंबी श्रावकों का विवाह नहीं हो रहा।

– संतान होने में परेशानी हो रही है।

– शिक्षा में रुकावट आ रही हो।

– कोर्ट-कचहरी के मामलों से परेशान हों।

– काल सर्प दोष या पितृ दोष हो।

– व्यापार में हानि हो रही हो।

अगर आप भी इन्हीं समस्याओं से परेशान हैं, तो आप भी इस अनुष्ठान में बैठ सकते हैं। अगर आप किसी कारणवश इस अनुष्ठान में नहीं बैठ सकते हों तो अपने नाम से अनुष्ठान में महाशांतिधारा करवा सकते हैं।

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