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धर्मसभा में दिए प्रवचन : पंचम काल में योगी बनने से बड़ा है सहयोगी बनना- मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज


योगी बनने वाले वे स्वार्थी योगी इस संसार में कभी मुक्ति के पात्र नहीं बनेंगे । केवल अपना धर्म ध्यान नहीं करो । जैन शासन में सहयोगी की बहुत कीमत है , योगी बहुत निजी व्यक्तित्व का जीवन है । स्वार्थी योगी का संसार बहुत छोटा है। इस पंचम काल में योगी बनने से बड़ी बात है सहयोगी बनना। सहयोग से ही पूरी दुनिया चल रही है। उक्त विचार छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में व्यक्त किये। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। दीक्षा लेना साधु मार्ग का अंतिम चरण नहीं है । अगर आपको लगता है कि मुनि पद बड़ा है तो विश्वास करिए मुझसे बड़े तो आप हैं, हमें तो सब्सिडी चाहिए, फिर पूछते हैं किस बात की ? साधुओं को साधु नहीं संभालते, ग्रहस्थ ही संभालते हैं । योगी बनने वाले वे स्वार्थी योगी इस संसार में कभी मुक्ति के पात्र नहीं बनेंगे । केवल अपना धर्म ध्यान नहीं करो । जैन शासन में सहयोगी की बहुत कीमत है , योगी बहुत निजी व्यक्तित्व का जीवन है । स्वार्थी योगी का संसार बहुत छोटा है। इस पंचम काल में योगी बनने से बड़ी बात है सहयोगी बनना। सहयोग से ही पूरी दुनिया चल रही है। उक्त विचार छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि गुरु दीक्षा से ऊपर है गुरु दक्षिणा।

फिर कहते हैं मेरे रोम रोम में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज बसे हैं मुझे अपने निजी व्यक्तित्व के विकास से मतलब नहीं, मुझे तो अब आचार्य श्री जी के स्थापित प्रकल्पों के लिए आपको जागना है। मैं अंतिम सांसों तक उन्हें पूरा करवाने की कोशिश करूंगा। आप सब इसमें कृपया मेरा सहयोग करें। अपने दीक्षा दिवस पर मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि आज का दिन मेरे लिए बहुत खास है। गुरुदेव ने कृपा कर रामटेक में हम 24 ब्रह्मचारी भाइयों को मुनि दीक्षा दी थी ।यहां विराजित मेरी व निसर्ग सागर जी महाराज की दीक्षा भी वही हुई थी। हम सभी का पुण्य बहुत तेज था कि हमने वर्तमान के वर्धमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षा ली। में गुरु चरणों को नमन करता हूं । फिर कहा कि दीक्षा दी नहीं जाती दीक्षा ली जाती है और शिक्षा दी जाती है । साथ ही कहा कि साधक कभी अपना दीक्षा दिवस नहीं मनाता ।

गुरु स्वयं तो तैरते ही हैं और औरों को भी तैरना सीखते हैं। मैं उन सभी साधुओं को हार्दिक शुभकामना प्रेषित करता हूं। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि आज प्रातः गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन भोपाल व विदिशा से आए श्रावकों ने किया किया । उसके बाद गुरुदेव की आठ द्रव्यों से सभी श्रावक- श्राविकाओं ने पूजन की। मंगलाचरण नृत्य अंजलि जैन ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मनोज बाकलीवाल, मनीष नायक, सतीश डबडेरा, सचिन जैन , विपुल बांझल, सतीश जैन, आनंद जैन, प्रकाशचंद जैन स्टील, आलोक बंडा, रितेश जैन, ‘ कैलाश चंद जी जैन नेताजी’ आदि विशेष रूप से मौजूद थे। सतीश जैन ने बताया कि 10 और 11 अगस्त को एक विशेष विरोदय कार्यक्रम इसी दलाल बाग में होगा। साथ ही मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज जी का दीक्षा दिवस भी मनाया जाएगा ।

दोपहर में 1:00 बजे से सैनिक सम्मान समारोह होगा, मुख्य अतिथि होंगे परमवीर चक्र विजेता श्री योगेंद्र सिंह जी यादव, जिनके सीने पर कारगिल युद्ध में 19 गोलियां लगी थी। 10 अगस्त रात्रि 8:30 बजे से एक शाम भक्ति और देशभक्ति के नाम कार्यक्रम भी रखा गया है।प्रतिदिन सुबह 8.30 बजे से आचार्य श्री जी की पूजन, 9:00 बजे से प्रवचन, दलाल बाग में होते हैं,तत्पश्चात आहार चर्या होती है। धर्म सभा का संचालन भूपेंद्र जैन ने किया।

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