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सुंदरता आभूषणों से नहीं, वीतरागता से आती है : आचार्यश्री विमर्श सागर जी पहली बार 33 पिच्छी धारियों के साथ पधारे बहलना


आचार्य श्री विमर्श सागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (33 पिच्छी) के साथ पदविहार करते हुए उत्तरप्रदेश के अतिशय क्षेत्र ‘बहलना’ पहुंचे। अतिशय क्षेत्र बहलना के समीपस्य धर्मनगरी मुजफ़्फ़रनगर के संपूर्ण जैन समाज ने आचार्य संघ का उत्साह पूर्वक अतिशय क्षेत्र पर प्रवेश कराया। आचार्य श्री ने सर्वप्रथम क्षेत्र के मूलनायक श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान के संघ सहित दर्शन किए। बहलना से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…


बहलना (उप्र)। भारतीय वसुंधरा सदा से ही निर्गन्ध दिगंबर वीतरागी श्रमणों की पवित्र पदरज से पावन होती रही है। वर्तमान संत परंपरा के परम प्रवाहक ‘जीवन है पानी की बूंदे’ महाकाव्य के मूल रचनाकार, ‘जिनागम पंथ जयवंत हो’ के पवित्र नारे से जैन एकता का शंखनाद करने वाले आचार्य श्री विमर्श सागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (33 पिच्छी) के साथ पदविहार करते हुए उत्तरप्रदेश के अतिशय क्षेत्र ‘बहलना’ पहुंचे। अतिशय क्षेत्र बहलना के समीपस्य धर्मनगरी मुजफ़्फ़रनगर के संपूर्ण जैन समाज ने आचार्य संघ का उत्साह पूर्वक अतिशय क्षेत्र पर प्रवेश कराया। आचार्य श्री ने सर्वप्रथम क्षेत्र के मूलनायक श्री 1008 पार्श्वनाथ भगवान के संघ सहित दर्शन किए। अतिशयकारी भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का अभिषेक, शांतिधारा के बाद उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिनवर जैसा रूप नहीं, साधु समा स्वरूप नहीं। राग-द्वेष निन्ना चुगली, जैसा रूप कुरूप नहीं।

पारस क्षमा की हो-हो-2, हो मूरत कहलाए रे जीवन है पानी की बूंदे, कब मिट जाये रे….

उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में अनेक की अच्छाइयां और बुराइयों को देखता है। अब आप पर निर्भर है कि आप क्या-क्या देखना चाहते हैं? यदि आपके अंदर अच्छाइयां होंगी तो आपको हर तरफ अच्छाइयां ही अच्छाइयां दिखाई देंगी और यदि आप बुराइयों के संग्रहालय होंगे तो आपको चारों ओर बुराइयां ही दिखाई देंगी। बंधुओ ! आपकी दृष्टि ही यह निर्णय करेगी कि आप बुराइयों के संग्रहालय हैं या अच्छाइयों के। विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा- प्रिय धर्मप्रेमी बंधुआंे। यह बतलाओ आप सुंदर हो या भगवान पार्श्वनाथ स्वामी सुंदर हैं? आप तो अपने शरीर का हर पल साज-श्रृंगार करते रहते हैं, तेल फुलेल इत्र आदि से सुगंधित करते रहते हो, वस्त्र-आभूषणों से सदैव अपने को सुंदर दिखाने का प्रयास करते रहते हो, फिर भी सच-सच बताना- आप सुंदर हैं या भगवान ? आप सबका एक ही जबाव आ रहा है कि ‘भगवान ही सबसे अधिक सुंदर हैं’। बन्धुओं ! संसारी जीवों में राग-द्वेष-काम-क्रोध-लोभ-मोह-प्राणक्ति आदि दुर्गुण सदा हरे-भरे बने रहते हैं। इसलिए साज-श्रृंगार करते हुए भी आप सुंदर नहीं बन सकते, जबकि जिनेंद्र भगवान ने राग-द्वेष-क्रोध-लोभ आदि 18 दोषों का नाश कर दिया है, नारी-कर जिनेंद्र भगवान की सुंदरता वीतरागता की सुंदरता है, जो कभी फीकी नहीं पड़ती। सच तो ये है कि जिनेंद्र भगवान के सच्चे भक्त को भी वैसी ही वीतरागता की सुंदरता प्राप्त हो जाया करती है। आज मैं संघ सहित बहलना आया हूं। पहली बार आया हूं। पार्श्व प्रभु के दर्शन कर मन अत्यंत आनंदित है, प्रफुल्लित है। आचार्य गुरुवर विमर्श सागर जी का मंगल विहार 2025 के चातुर्मास के लिए धर्मनगरी सहारनपुर की ओर चल रहा है। आचार्य श्री के मंगल प्रवचन के बाद स्थानीय अतिशय क्षेत्र कमेटी ने गुरुवर के चरणों में अपने प्रवास को और आगे बढ़ाने का विनम्र निवेदन किया। फिलहाल 17-28 जून आचार्य संघ अतिशय क्षेत्र में प्रवासरत हैं। 19 जून की प्रातः बेला में आचार्य श्री ससंघ एवं आचार्य श्री भारतभूषण जी धर्मनगरी मुज़फ्फरनगर में भव्य मंगल प्रवेश करेंगे।

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