जैन धर्मवालंबियों ने पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया। प्रातः भक्त जनों पुरुष युवाओं ने केसरिया वस्त्र धोती दुपट्टा पहनकर मंदिर में भगवान के मस्तक पर अभिषेक शांति धारा की। महिलाओं ने विधि विधान से लाल पीले वस्त्र साड़ी में विधान पूजा पाठ किया। ब्रह्मचारिणी गुणमाला दीदी ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य का जन्म संसार में छल कपट धोखा देने को नहीं हुआ है अपितु अपने जन्म को सार्थक बनाते हुए दूसरों का कल्याण करने के लिए हुआ है। पढ़िए राज कुमार अजमेरा और नविन जैन की रिपोर्ट…
झुमरी तिलैया। जैन धर्मवालंबियों ने पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व का तीसरा दिन उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया। प्रातः भक्त जनों पुरुष युवाओं ने केसरिया वस्त्र धोती दुपट्टा पहनकर मंदिर में भगवान के मस्तक पर अभिषेक शांति धारा की। महिलाओं ने विधि विधान से लाल पीले वस्त्र साड़ी में विधान पूजा पाठ किया। ब्रह्मचारिणी गुणमाला दीदी ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य का जन्म संसार में छल कपट धोखा देने को नहीं हुआ है अपितु अपने जन्म को सार्थक बनाते हुए दूसरों का कल्याण करने के लिए हुआ है।
पर्युषण पर्व का तीसरा धर्म उत्तम आर्जव हमको यही सिखाता है कि सरल बनो और प्रभु की शरण में चलो। आज प्रातः नया जैन मंदिर में प्रथम अभिषेक ओर शांतिधारा का सौभाग्य हनुमान-नविन जैन पाटनी के परिवार को और बड़ा जैन मंदिर के मुलवेदी पर नंद किशोर-हेमंत जैन बड़जात्या ,पांडुकशीला पर जदु लाल-सुनील जैन सेठी और दूसरी तरफ से गुलाब चंद-संजय जैन ठोल्या परिवार और 1008 आदिनाथ भगवान की वेदी पर्व1008 श्री बासपूज्य भगवान का श्री प्रकाश जैन गंगगवाल के परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद दस की पूजन में आज आर्जव धर्म की विशेष पूजन हुई। संध्या में आरती के साथ णमोकार चालीसा का पाठ हुआ।
इसके पश्चात स्थानीय पंडित अभिषेक शास्त्री ने बताया कि जैन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो अपने अनुयायियों को पापों को धोने का समय प्रदान करता है। इस पर्व दश धर्म को जीवन में उतार कर मोक्ष मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। जिसमें महिलाओं युवकों ने भाग लिया। विजेताओं को समाज के पदाधिकारी राज छाबड़ा, सुरेंद्र काला, सुनील सेठी, ललित सेठी, सुशील छाबड़ा ने पुरस्कृत किया।













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