बुंदेलखंड के हजारों वर्ष प्राचीन अतिशय क्षेत्र बंधा जी में बंधा जी महोत्सव का आयोजन शुरू हो गया है। महाराज बंधाजी की पावन धरा पर विराजित हैं उनके ही सानिध्य में यह महोत्सव चल रहा है। पढ़िए राजीव सिघाई विशेष रिपोर्ट
बुंदेलखंड के हजारों वर्ष प्राचीन अतिशय क्षेत्र बंधा जी में बंधा जी महोत्सव का आयोजन चल रहा है। महाराज बंधाजी की पावन धरा पर विराजित हैं उनके ही सानिध्य में यह महोत्सव चल रहा है। शनिवार को सुबह 7:30 बजे श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा नित्य पूजन संपन्न हुई। सुबह साढ़े आठ बजे मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज के प्रवचन शुरू हुए।
प्रतिमा तेजस्वी व अतिशयकारी
मुनि श्री ने अपने प्रवचनों में कहा कि बंधा जी में विराजमान अजितनाथ भगवान की प्रतिमा तेजस्वी एवं अतिशयकारी है। उन्होंने कहा कि इस सदी के महान आचार्य विद्यासागर जी महाराज का यहां पर दो बार आगमन हो चुका है। आचार्य श्री ने बंधा जी आगमन के दौरान अपने प्रवचन में कहा था कि जहां पर अजितनाथ भगवान विराजित हैं यह स्थान उनका नहीं है। अजितनाथ भगवान भौयरे से 40 फीट ऊपर बैठेंगे तब उनकी दृष्टि बाहर निकलेगी उससे गांव का क्षेत्र प्रदेश का नक्शा बदलेगा। दुनिया भर के लोग अजितनाथ नाथ की सेवा करने बंधा जी आएंगे।
बैठकर नहीं, लेटकर करें साष्टांग नमस्कार
मुनि श्री ने कहा कि भगवान की प्रतिमा में इतनी ऊर्जा है इतना अतिशय कि हमें उनको बैठकर नहीं लेट करके साष्टांग नमस्कार करना चाहिए। काल दोष के कारण जो परंपराएं हमसे छूट गई थी मैं आज उनको जागृत कर रहा हूं। जिस छोटी सी जगह में अजितनाथ भगवान विराजमान हैं यह स्थान उनका नहीं है।

इसलिए बनाया गया भौयरा
कालांतर में जब हमारे देश पर औरंगजेब का शासन था उस समय मंदिरों को तोड़ा गया मूर्तियों को भी नष्ट किया गया उसी काल में हमारे पूर्वजों ने अजितनाथ भगवान को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे इसी कारण जमीन के नीचे भौयरा बनाकर उन प्रतिमा जी को विराजमान कर दिया । आज उन्हीं भगवान को उच्चासन देने के लिए बंधा जी में विश्व के प्रथम रजत मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। मुनि संघ के आगमन से मंदिर का निर्माण तेज गति से होगा।
मूलनायक भगवान का मस्तकाभिषेक
मुनि श्री के सानिध्य में अनेक लोगों ने बंधा जी के ट्रस्टी एवं सदस्य बनने का सौभाग्य प्राप्त किया आज टीकमगढ़ पृथ्वीपुर मोहनगढ़, बम्होरी ललितपुर सागर सहित अनेक नगरों से लोगो ने बंधा जी पहुंचकर मूलनायक भगवान का मस्तकाभिषेक किया। रविवार को प्रातः 7:00 पात्र शुद्धि ,अजितनाथ भगवान का अनवरत अभिषेक , 8:30 बजे मुनि श्री के मंगल प्रवचन, दोपहर एक बजे धर्म सभा अजितनाथ भगवान को निर्वाण की प्राप्ति इसके बाद निर्वाण लाडू भी चढ़ाया जाएगा।













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