मुनि विनम्रसागर संघ के राजस्थान में पहले वर्षायोग पर चार्तुमास मंगल कलश स्थापना कार्यक्रम विशाल पांडाल में 72 गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं की गुरु भक्ति और आस्था का सैलाब का साक्षी बना बागीदौरा। जैन मंदिर से सकल दिगंबर जैन समाज, साफा पहन सफेद वस्त्रों में कुंथु नवयुवक मंडल एवं महिला मंडल द्वारा शोभायात्रा निकाली। मुनि संघ की पांडाल में अगवानी की तो भक्तों ने खड़े होकर नमन कर गुरुदेव का जय जयकार किया। बागीदौरा से पढ़िए, सतीशचंद्र गांधी की यह खबर…
बागीदौरा। मुनि विनम्रसागर संघ का राजस्थान में पहले वर्षायोग पर चार्तुमास मंगल कलश स्थापना कार्यक्रम विशाल पांडाल में मौजूद खचाखच भरे 72 गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं की गुरु भक्ति और आस्था का सैलाब का साक्षी बना बागीदौरा। जैन मंदिर से सकल दिगंबर जैन समाज, साफा पहन सफेद वस्त्रों में कुंथु नवयुवक मंडल एवं महिला मंडल द्वारा शोभायात्रा निकाल कर मुनि संघ की पांडाल में अगवानी की तो भक्तों ने खड़े होकर नमन कर गुरुदेव का जय जयकार किया। कार्यक्रम की शुरूआत में ध्वजारोहण के दौरान मंगलाचरण राजेश शाह ने किया। बाद में आचार्य विद्यासागर महाराज की चित्राकृति पर दीप प्रज्वलन किया। समाज के सेठ कन्हैयालाल दोसी सेठ, जयंतिलाल मेहता, सेठ विकास दोसी ने अतिथियों का शाला ओढ़ाकर और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया।
इस दौरान मंत्रोच्चार करके मंगल कलश में आचार्य विद्यासागर मंगल कलश मोहित नगीन लाल दोसी, आचार्य समय सागर कलश मेहता जिगर अशोक, दयोदय गोशाला कलश शाह हर्षित चंद्रपाल ने स्थापित किए। शास्त्र भेंट ललित मोतीलाल मेहता, लक्ष्मीलाल छबिलाल मेहता ने किए। कार्यक्रम के अतिथि महेंद्रजीतसिंह मालवीया, अध्यक्ष दिनेश खोड़निया का स्वागत श्रीमंत बसंत सेठ, अशोक मेहता, महेंद्र दोसी, मंडल अध्यक्ष दीपक दोसी, विकेश दोसी ने उपरणा पहनाकर अभिनंदन किया। साथ ही नव जिनालय निर्माण में अर्थदान करने वाले मूलनायक शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा दोसी बसंतलाल चंपालाल, पार्श्वनाथ भगवान पूर्णायु बहन विदुषी, विजेंद्र हीरालाल दोसी, मुनि सुव्रतनाथ भगवान दोसी पूनमचंद दोवाचंद, चंद्र प्रभु भगवान मेहता जीगर अशोक, आदिनाथ भगवान दोसी प्रतीक बसन्तलाल एवं महावीर भगवान सुरेंद्र संजय शाह सहित 125 से अधिक पुण्यार्जक परिवारों का बहुमान किया। संचालन अनुराग जैन विनोद दोसी ने किया।
जहां कलश की स्थापना होती है, वहां पुण्य, शांति और मंगल की वर्षा होती है
प्रवचन में मुनि ने कहा कि बागीदौरा में आज इतिहास रचा जा रहा है। इस चार्तुमास और नवीन जिनालय के प्रत्येक व्यक्ति को भूमिका हो। ये स्थापना तो चार्तुमास का पहला धमाका है दूसरा धमाका पर्यूषण पर्व है। चातुर्मास धर्म और आराधना के लिए रहता है, इसलिए हमें अपने दैनिक जीवन में से धर्म ध्यान और आराधना के लिए नियमित रूप से समय निकालना है। वर्षायोग चातुर्मास के दौरान साधु संतों के अलावा श्रद्धालु धार्मिक साधना-आराधना में लीन हो गए हैं। श्रद्धालु साधु-संतों का प्रवचन श्रवण कर धर्म की गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। बताया जाता है कि वर्षाकाल में जैन धर्म के साधु संत एक ही जगह रहकर साधना आराधना व धर्म की प्रभावना करते हैं। वर्षा ऋतु में असंख्य छोटे छोटे जीव जंतु की उत्त्पत्ति होती है। इस दौरान किसी भी प्रकार के जीव की हत्या न हो, इसलिए जैन धर्म के साधु संत एक ही जगह रहकर साधना आराधना करते हैं। साधु संत धर्म की प्रभावना व धर्म का ज्ञान बांटते है। लोगों को धर्म का मर्म समझाया जाता है।













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