चांदखेड़ी में नववर्ष की पूर्व संध्या पर प्रसिद्ध निर्देशिका जैन रत्न साधना मादावत जैन के निर्देशन रंगशाला इंदौर की ओर से महावैराग्य की महागाथा-भरतस्य भारतम, भरत का भारत महानाट्य का भव्य भाव पूर्ण मंचन किया गया। देश में सबसे ज्यादा शांतिधारा चांदखेड़ी क्षेत्र में होती है। 1 जनवरी को लगभग 6000 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। खानपुर (झालावाड़) से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह विशेष रिपोर्ट…
खानपुर (झालावाड़)। आदिनाथ दिगंबर जैन, चंद्रोदय अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी में 31 दिसंबर को भव्य धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम महावैराग्य की महागाथा-भरतस्य भारतम, भरत का भारत का भव्य भाव पूर्ण मंचन किया गया। चंद्रोदय अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी के अध्यक्ष हुकम जैन काका ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि विजय चौधरी, विशिष्ट अतिथि रांकेश गंगवाल, सुमेर रांवका, विजय बहादुर, अजय बाकलीवाल, नरेश जैन वेद, महावीर माडसाब, विनोद सुलराया एवं कोर कमेटी के सभी सदस्यों ने दीप प्रज्वलन किया। प्रातः शांतिधारा रांकेश गंगवाल, सुमेर रांवका, विजय बहादुर ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान पत्रिका के राज्य संपादक विजय चौधरी एवं विशिष्ट अतिथि का कोर कमेटी ने स्वागत किया। सर्वप्रथम बच्चों और महिलाओं ने मंगलाचरण किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में रंगशाला की निर्देशिका साधना मादावत इंदौर का स्वागत एवं सम्मान मनषी जैन, प्रीति जैन, निशा जैन कागला, साक्षी जैन, दिगंबर जैन महिला मंडल चांदखेड़ी कोर कमेटी की महिलाओं ने राजस्थानी पगड़ी और माला पहनाकर किया। रात्रि 8 बजे आर्यवर्त विजेता के महावैराग्य की महागाथा-भरतस्य भारत, भरत का भारत, भरत चक्रवर्ती की भव्य दिग्विजय यात्रा डोल नगाड़े गाजे-बाजे एवं बग्गियों के साथ निकाली गई। जिसमें श्रद्धालुओं ने खूब भक्ति नृत्य करते हुए उत्साह से भाग लिया।
मुनिश्री सुधासागरजी के आशीर्वाद से हो रहा है विकास
महामंत्री नरेश जैन वेद ने क्षेत्र के सभी आगंतुकों का स्वागत किया और क्षेत्र की महिमा के बारे में बताया। उन्होंने क्षेत्र पर चल रहे विकास कार्यों के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही कार्यक्रम में अतिथियों तथा सहयोग करने वाले पुण्यार्थियों व कार्य करने वाले कर्मचारियों का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि मुनिश्री सुधासागरजी के पावन आशीर्वाद से इस क्षेत्र का दिन-प्रतिदिन विकास हो रहा है। इस क्षेत्र पर जो निर्माण हो रहा है और जो भी कार्य चल रहा है। वह सब मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज के आशीर्वाद से हो रहा है। पहले चांदखेड़ी क्षेत्र पर आर्थिक कमी रहती थी लेकिन जब से मुनिश्री सुधासागर जी महाराज का आशीर्वाद मिला है तब से क्षेत्र आर्थिक रूप से संपन्न हो गया है।
क्षेत्र में लगभग 250 कमरों की है व्यवस्था
देश में कहीं सबसे ज्यादा शांतिधारा होती है तो वह चांदखेड़ी में होती है। यहां पर यात्रियों के लिए धर्मशाला बनाई गई थी और अब 100 कमरों की सुसज्जित धर्मशाला बनाई गई है लेकिन, वह भी अभी कम पड़ रही है। क्षेत्र में लगभग 250 कमरों की व्यवस्था है। इसके अलावा दिल्ली धर्मशाला, मांगलिक भवन, स्कुल, गौशाला, मल्टीस्पेशलिटी हॉल, विद्यासागर हॉल, गांव के सभी होटल में रूकने की व्यवस्था की गई। किसी को कोई भी असुविधा नहीं हुई। धर्मशाला में ठहरने के लिए समस्त प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है।
इनका रहा योगदान
इस अवसर पर अमित बुडानिया (एसपी झालावाड़), गरिमा जिंदल (डीएसपी, खानपुर) अनेक प्रशासनिक एवं राजनीतिक गणमान्यजन मौजूद रहे। भोजन व्यवस्था के पुण्यार्जक शिखरचंद जैन (नौगांवा, अलवर), डॉ. अनुरेश जैन एवं डॉ. नेहा जैन (इंदौर), कांतिलाल जी परिवार (इंदौर), जिनेंद्र परिवार (कटनी) एवं दीपचद, आशा लुहाड़िया (छबड़ा) का विशेष योगदान रहा।
यह समाजजन रहे मौजूद
इस अवसर पर चांदखेड़ी समिति के मुकेश चेलावत, अजय बाकलीवाल, विनोद सुरलाया, महेंद्र कांसल, अशोक सेठी, महावीर प्रसाद जैन, मुकेश जैन मासूम, कैलाश जैन पापड़ीवाल, आनंद ठोरा, महावीर भैया, कल्पेश भाई सूरत, देवेंद्र मियाना एवं कमेटी के अन्य सदस्य आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं समाजजनों की उपस्थिति रही। आयोजन आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव एवं सामाजिक समरसता का सशक्त संदेश के साथ संपन्न हुआ। संचालन महेंद्र कांसल एवं महावीर भैया ने किया। संपूर्ण आयोजन सफलता के शिखर पर रहा। समस्त भारत वर्ष से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ गया।
बाबा आदिनाथ के स्वतः दिव्याभिषेक के दर्शन से हुए कृतार्थ
मनोहारी आदिनाथ बाबा के दर्शन से सभी के अंतर्मन में दिव्य शांति का अनुभव हुआ। रात्रि को 12 बजे से 3 बजे भगवान आदिनाथ की मुख्य प्रतिमा पर अपने आप देवों द्वारा अभिषेक सभी श्रद्धालुओं ने देखा और मंदिर में जयकारों की गुंज सुनाई दी। बाबा के सामने जाते ही उनसे दूर नहीं जाने को मन करता परन्तु सभी को दर्शन लाभ मिला। किसी को कोई परेशानी नहीं हुई। मुझे यहां एक भजन की लाइन याद आ रही है कि ‘बाबा तेरा गूंजे जयकारा गजब का है तेरा नजारा स्वर्ग सुख भी इसके आगे खारा’ जय हो चांद खेड़ी वाले बाबा। हजारों श्रद्धालुओं के वात्सल्य भोज की व्यवस्था देखते ही बनती थी। किसी तरह की कोई कमी नजर नहीं आई। वास्तव में बाबा के चमत्कार को नमस्कार है।













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