धामनोद में बड़वानी के युवा वैद्य डॉ. सुहास यादव को जैन संतों एवं समाजजनों की वर्षों से की जा रही आयुर्वेदिक सेवा के लिए आर्यिका माताजी द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके समर्पण, सेवा भावना और करुणा का प्रतीक है। पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट…
धामनोद में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में बड़वानी के युवा और प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य वैद्य डॉ. सुहास यादव को विशेष सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उन्हें दिगंबर जैन श्रमण संघ के मुनि, आर्यिका माताजी तथा अन्य समुदायों के साधु-संतों के प्रति उनके वर्षों से चले आ रहे प्रेम, वात्सल्य, करुणा और सेवा भाव के कारण प्रदान किया गया।
डॉ. यादव लंबे समय से संत-साधुओं और समाजजनों को उचित आयुर्वेदिक उपचार एवं मार्गदर्शन प्रदान करते आ रहे हैं। उनकी समर्पित सेवा और विनम्रता के कारण उन्हें जैन समाज में विशेष स्थान प्राप्त है। इसी सेवाभाव के सम्मान स्वरूप दिगंबर जैन समाज के सर्वोत्कृष्ट समाधिधारक राष्ट्र संत आचार्य विराग सागर जी महाराज की शिष्या, श्रमणि विदुषी आर्यिका मां श्री विकुंदन श्री माताजी तथा संघस्थ क्षुल्लिका विश्व रत्न श्री माताजी द्वारा उन्हें आचार्य विराग सागर जी महाराज के प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
यह उल्लेखनीय है कि बड़वानी में डॉ. यादव द्वारा प्रथम पंचकर्म केंद्र स्थापित किया गया है, जो आज स्वास्थ्य सेवा का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। उनके उत्कृष्ट उपचार, समर्पण और साधु-संतों के प्रति विनम्र भाव को देखते हुए आर्यिका माताजी ने उन्हें भरपूर आशीर्वाद दिया तथा उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं प्रदान कीं।













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